बठिंडा, 10 सितंबर, 2026 (प्रभजोत सिंह): पंजाबी यूनिवर्सिटी के कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों द्वारा अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर चलाया जा रहा संघर्ष बुधवार को और तेज हो गया। पंजाबी यूनिवर्सिटी कॉन्ट्रैक्ट टीचर्स एसोसिएशन के आह्वान पर कॉन्ट्रैक्ट असिस्टेंट प्रोफेसरों ने तलवंडी साबो स्थित गुरु काशी कैंपस के मुख्य गेट को बंद कर रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपनी मांगों का तत्काल समाधान करने की मांग की। गेट बंद होने के कारण विश्वविद्यालय के मुख्य कैंपस, क्षेत्रीय केंद्रों, नजदीकी कैंपसों और कंस्टीट्यूएंट कॉलेजों की गतिविधियां भी प्रभावित हुईं।
शिक्षकों ने बताया कि यह प्रदर्शन 18 अगस्त से जारी शांतिपूर्ण संघर्ष की अगली कड़ी है। एसोसिएशन की नेता डॉ. मनमिंदर कौर ने कहा कि लगातार मांगें उठाए जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके चलते शिक्षकों को अपना संघर्ष तेज करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इस अवसर पर डॉ. बलदेव सिंह ने शिक्षकों और स्टाफ को नियमित, कॉन्ट्रैक्ट, गेस्ट और पीटीए जैसी अलग-अलग श्रेणियों में बांटे जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था शिक्षकों की सामूहिक शक्ति को कमजोर करती है और साझा अधिकारों के लिए चलाए जा रहे संघर्ष को प्रभावित करती है।
गेस्ट फैकल्टी सदस्य गुरमीत सिंह ने कॉन्ट्रैक्ट, गेस्ट और पीटीए शिक्षकों के साथ कथित भेदभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन श्रेणियों में कार्यरत शिक्षकों को कई बार बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ता है।
शिक्षकों की प्रमुख मांगों में यूजीसी के 2010 और 2018 के नियमों के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट असिस्टेंट प्रोफेसरों को पूरा पे-स्केल देना शामिल है। डॉ. अमनदीप कौर ने इस मांग को तत्काल लागू करने की मांग की। इसके अलावा प्रोफेसर गगनप्रीत सिंह ने शिक्षकों के पक्ष में आए अदालती फैसलों को तुरंत लागू करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान 7 सितंबर को शिक्षकों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले को भी उठाया गया। प्रोफेसर लखबीर सिंह ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की।
इस संघर्ष को विश्वविद्यालय के विभिन्न वर्गों का समर्थन भी मिला। नियमित शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों, गेस्ट फैकल्टी, पीटीए शिक्षकों और विद्यार्थियों ने कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों की मांगों के समर्थन में अपनी एकजुटता जताई। प्रदर्शनकारी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द उनकी मांगों का समाधान नहीं किया तो संघर्ष को और तेज किया जाएगा।
इस दौरान मालवा स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (एस.ओ.आई.) की अध्यक्ष धर्मवीर कौर ने भी कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों के संघर्ष का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की मांगें केवल उनके व्यक्तिगत हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये शिक्षा क्षेत्र में समान अधिकार, उचित मेहनताना और सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा हैं।






