गुरदासपुर, 12 सितंबर 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): गुरदासपुर से कांग्रेस के लोकसभा सदस्य और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने डेरा बाबा नानक और गुरदासपुर क्षेत्र में गैंगस्टरों से जुड़ी कथित वित्तीय गतिविधियों को लेकर केंद्र सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। रंधावा ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर धन के स्रोत और उसके इस्तेमाल की गहन जांच करवाने की मांग की है।
रंधावा द्वारा उठाया गया मुद्दा विशेष रूप से इस बात से जुड़ा है कि यदि गैंगस्टर नेटवर्क को किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता मिल रही है, तो उस धन का स्रोत क्या है, पैसा किन माध्यमों से पहुंच रहा है और इसके पीछे किन व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका हो सकती है। यह मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित न रहकर मनी ट्रेल और वित्तीय अपराध के दृष्टिकोण से भी जांच का विषय बन सकता है।
जग्गू भगवानपुरिया का नाम फिर चर्चा में: इस पूरे मामले में गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया का नाम भी चर्चा में आ रहा है। हालिया रिपोर्टों में डेरा बाबा नानक क्षेत्र में उसके प्रभाव और स्थानीय गतिविधियों से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। इसी पृष्ठभूमि में रंधावा ने फंडिंग के स्रोतों की जांच की आवश्यकता को उजागर किया है।
हालांकि, किसी व्यक्ति या कारोबारी इकाई को गैंगस्टरों की फंडिंग से जोड़ने के लिए जांच एजेंसियों द्वारा वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, संपत्ति सौदों, संदिग्ध लेन-देन और अन्य सबूतों की पुष्टि करना आवश्यक होगा। केवल राजनीतिक दावे या संदेह अपने आप में किसी को दोषी साबित नहीं करते।
जांच का दायरा कहां तक जा सकता है?: रंधावा की मांग का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि गैंगस्टर नेटवर्क आम तौर पर केवल हथियारबंद अपराधों तक सीमित नहीं रहते। यदि अवैध वसूली, फिरौती, नशा तस्करी या अन्य अपराधों से प्राप्त धन को विभिन्न कारोबारों, संपत्तियों या बैंकिंग चैनलों के माध्यम से घुमाने के सबूत मिलते हैं, तो मामला मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध संपत्ति की जांच की दिशा में भी बढ़ सकता है।
इसलिए संभावित जांच में बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल, संदिग्ध संपत्तियों की जांच, बेनामी या प्रॉक्सी स्वामित्व की जांच तथा देश-विदेश से होने वाले वित्तीय लेन-देन की पड़ताल जैसे पहलू शामिल हो सकते हैं।
केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका पर भी नजर: रंधावा द्वारा मामला केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष उठाए जाने के साथ ही जांच का वित्तीय पक्ष केंद्र में आ गया है। यदि सरकार को प्रारंभिक जांच में वित्तीय अनियमितताओं या मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित ठोस जानकारी मिलती है, तो कानूनी अधिकार क्षेत्र के अनुसार संबंधित केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा मामले की जांच की जा सकती है।
इसके साथ ही पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच तालमेल भी महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े मामलों में आपराधिक गतिविधियों, वित्तीय लेन-देन और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की कड़ियां एक-दूसरे से जुड़ी हो सकती हैं।
डेरा बाबा नानक—सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण मामला अधिक संवेदनशील: डेरा बाबा नानक पाकिस्तान से लगते सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित है। इस कारण यहां सुरक्षा, तस्करी, अवैध हथियारों और आपराधिक नेटवर्क से संबंधित किसी भी संभावित गतिविधि को सामान्य अपराधों की तुलना में अधिक संवेदनशीलता से देखा जाता है।
इस पृष्ठभूमि में यदि गैंगस्टर नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों के बारे में कोई ठोस सबूत सामने आते हैं, तो जांच केवल स्थानीय स्तर तक सीमित न रहकर सीमावर्ती और अंतरराज्यीय स्तर तक भी जा सकती है।
राजनीतिक रूप से भी गरमाया मामला: इस मुद्दे का एक राजनीतिक पहलू भी है। डेरा बाबा नानक सुखजिंदर सिंह रंधावा का विधानसभा क्षेत्र रहा है और 2024 के लोकसभा चुनाव में वह गुरदासपुर से सांसद चुने गए थे। डेरा बाबा नानक की राजनीति में गैंगस्टरों के प्रभाव को लेकर चर्चा पहले भी होती रही है। हालिया रिपोर्टों में भी इस क्षेत्र में जग्गू भगवानपुरिया के प्रभाव और उससे जुड़े सवालों को उठाया गया है।
इसलिए रंधावा द्वारा केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष मामला उठाए जाने को केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय वित्तीय जांच की मांग के रूप में भी देखा जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार और संबंधित जांच एजेंसियां इस पत्र पर क्या कार्रवाई करती हैं।
इस मामले में गैंगस्टरों को कथित फंडिंग, धन के स्रोत या किसी व्यक्ति/संस्था की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकता है। फिलहाल रंधावा ने इस मामले की उच्चस्तरीय वित्तीय जांच की मांग की है।






