फतेहगढ साहिब, 15 सितंबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): किसान धान की पराली को आग न लगाकर अपने खेतों में ही जोत दें या पराली के गट्टे (बंडल) बनवाकर इसका उचित प्रबंधन करें, ताकि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाया जा सके। इन विचारों का प्रकटीकरण डिप्टी कमिश्नर डॉ. सोना थिंद ने स्थानीय जिला प्रशासनिक कॉम्प्लेक्स से धान के अवशेषों को आग न लगाने के लिए जागरूकता फैलाने हेतु दो प्रचार वैनों को रवाना करते हुए किया।
डिप्टी कमिश्नर डॉ. सोना थिंद ने कहा कि ये प्रचार वाहन जिले के सभी कृषि ब्लॉकों में जाकर पराली जलाने के बुरे रुझान को खत्म करने में लाभदायक साबित होंगे। उन्होंने बताया कि प्रचार वाहनों के माध्यम से पराली को खेतों में ही जोतने के लाभ और पराली को आग लगाने से होने वाले नुकसान के बारे में किसानों को जागरूक किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. जगदेव सिंह ने बताया कि किसानों को धान की पराली न जलाने के प्रति जागरूक करने के लिए 24 अक्टूबर तक गांव स्तर के शिविर, वॉल पेंटिंग, स्कूलों में बच्चों के निबंध लेखन प्रतियोगिता/पेंटिंग/वाद-विवाद आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, साहित्य (प्रचार सामग्री) बांटा जाएगा और धान की पराली को बिना आग लगाए हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, सरफेस सीडर और स्मार्ट सीडर मशीन से गेहूं की बिजाई के लिए प्रदर्शनी प्लॉट लगाए जाएंगे।
इस अवसर पर ए.डी.ओ. दमन झांजी, डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर आत्मा श्री हरमनजीत सिंह और श्री जतिंदर सिंह उपस्थित थे।






