चंडीगढ़, 16 सितंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): पंजाब में भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार अपने कार्यकाल के अंतिम छह महीनों में प्रवेश कर चुकी है। इसके साथ ही विधानसभा के आम चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में हलचल तेज होने की संभावना है। मौजूदा स्थिति में पंजाब की किसी भी विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने की संभावना नहीं बची है। पंजाब विधानसभा के आम चुनाव फरवरी 2027 के आसपास होने की उम्मीद है। हालांकि, चुनाव आयोग द्वारा आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होना अभी बाकी है। वर्ष 2022 में पंजाब विधानसभा के चुनाव फरवरी में हुए थे।
सरकार के दावे और मुद्दे
मुख्यमंत्री भगवंत मान कह चुके हैं कि उनकी सरकार ने 2022 के चुनावों के दौरान किए गए वादों को पूरा किया है। मार्च 2026 में सरकार के चार साल पूरे होने पर मान ने मुफ्त बिजली, किसानों के लिए दिन में बिजली, नहरी सिंचाई, सरकारी नौकरियों और स्वास्थ्य सुविधाओं सहित कई उपलब्धियों का जिक्र किया था। दूसरी ओर, सरकारी कर्मचारियों द्वारा बकाया महंगाई भत्ता (DA) जारी करने और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लागू करने सहित कई मांगों को लेकर विरोध जारी है। OPS से संबंधित अधिसूचना जारी होने के बावजूद इसे पूरी तरह लागू करने को लेकर विवाद बना हुआ है, जबकि DA की बकाया किस्तें भी कर्मचारियों का मुख्य मुद्दा हैं।
वित्तीय दबाव भी चुनौती
राज्य सरकार के सामने वित्तीय दबाव भी एक अहम मुद्दा है। हालांकि पंजाब के टैक्स राजस्व में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन अर्थशास्त्रियों के अनुसार कर्ज और लगातार वित्तीय घाटे जैसी संरचनात्मक चुनौतियों के कारण सरकार पर वित्तीय बोझ बना हुआ है। इसके अलावा राज्य में बिजली आपूर्ति को लेकर भी विरोध और शिकायतें सामने आई हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार बिजली की मांग में वृद्धि और उत्पादन क्षमता से जुड़ी समस्याओं के कारण कुछ क्षेत्रों में कटौती की शिकायतें रही हैं।
उपचुनाव का रास्ता बंद, राजनीतिक हलचल की संभावना
अब जब विधानसभा के आम चुनावों के लिए समय कम रह गया है, तो विभिन्न राजनीतिक दलों के विधायकों और नेताओं की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रहेगी। उपचुनाव की गुंजाइश खत्म होने से आने वाले दिनों में विधायकों के दल बदलने या राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की संभावनाओं पर भी चर्चा तेज हो सकती है।






