संगरूर, 18 सितंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य श्री गुलजार सिंह बॉबी ने बताया कि होशियारपुर जिले के एक गांव में भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर जी की प्रतिमा से संबंधित वायरल हुए वीडियो का आयोग द्वारा गंभीर संज्ञान लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग अधिनियम-2004 की धारा 10 के तहत सुओ-मोटू (स्वतः संज्ञान) लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
श्री गुलजार सिंह बॉबी ने बताया कि आयोग द्वारा इस मामले की सुनवाई 21 सितंबर 2026 तय की गई है और संबंधित अधिकारियों को मामले से जुड़े तथ्यों और जानकारी के साथ आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया है। उन्होंने बताया कि यदि निर्धारित समयानुसार आवश्यक अनुपालन नहीं किया जाता है, तो आयोग द्वारा अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
आयोग के सदस्य ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर का देश के संविधान निर्माण और सामाजिक समानता के संघर्ष में ऐतिहासिक योगदान है और उनसे जुड़े स्मारकों और प्रतिमाओं का सम्मान बनाए रखना समाज की संयुक्त जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ऐसी जगहों पर किसी भी असामाजिक तत्व द्वारा प्रतिमाओं से छेड़छाड़ या अनादर की घटना सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है, इसलिए ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अग्रिम और पुख्ता इंतजाम किए जाने बेहद जरूरी हैं।
श्री बॉबी ने बताया कि पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग द्वारा राज्य के संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि पूरे पंजाब में जहां भी बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर जी की प्रतिमाएं स्थापित हैं, वहां आवश्यकतानुसार सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाने को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि कैमरों की निगरानी से जहां असामाजिक गतिविधियों को रोकने में मदद मिलेगी, वहीं किसी अप्रिय घटना की स्थिति में जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करने और कानूनी कार्रवाई करने में भी सहायता मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आयोग अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे संवेदनशील मामलों में कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाता रहेगा। उन्होंने सभी वर्गों से आपसी भाईचारा, शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील भी की।






