नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026 (शहीद-ए-आज़म ब्यूरो): यू.पी.आई. भुगतान पर नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एम.डी.आर.) को लेकर चल रही चर्चा के बीच केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम यू.पी.आई. ग्राहकों से कोई ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लिया जाएगा। नया एम.डी.आर मुख्य रूप से चुनिंदा व्यापारी लेन-देन पर लागू होगा और 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने की जानकारी दी गई है।
नए ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के कुछ पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यू.पी.आई. भुगतान पर 0.4% एम.डी.आर लगेगा। यह शुल्क व्यापारी द्वारा अदा किया जाएगा और प्रति लेन-देन अधिकतम ₹300 की सीमा रखी गई है। उदाहरण के तौर पर ₹10,000 की पात्र व्यापारी यू.पी.आई. प्राप्ति पर एम.डी.आर. ₹40 होगा।
सरकार ने यह भी कहा है कि P2P (व्यक्ति से व्यक्ति) ट्रांसफर मुफ्त रहेंगे। छोटे व्यापारियों के लिए भी जीरो-एम.डी.आर. व्यवस्था जारी रहेगी। सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक, ₹1 लाख तक मासिक यू.पी.आई. प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारी इस श्रेणी में आएंगे।
क्या यह ट्रंप के दबाव के कारण हुआ?
इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया है कि अमेरिकी दबाव, खासकर अमेरिकी भुगतान कंपनियों से जुड़े कारोबारी मुद्दों ने नीति में बदलाव में भूमिका निभाई। दूसरी ओर, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि यू.पी.आई. नीति से जुड़े फैसले भारत ने स्वतंत्र रूप से लिए हैं और इसका उद्देश्य यू.पी.आई. प्रणाली को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एम.डी.आर. कोई सरकारी टैक्स नहीं है। इससे प्राप्त राशि भुगतान प्रणाली से जुड़े बैंकों, ऐप्स और अन्य भागीदारों के बीच वितरित की जाएगी। सरकार के मुताबिक, यू.पी.आई. का इस्तेमाल करने वाले आम नागरिकों के रोजमर्रा के भुगतान पहले की तरह बिना किसी शुल्क के जारी रहेंगे।






