भवानीगढ़,24 सितंबर, 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना के निदेशक प्रसार शिक्षा के मार्गदर्शन में पीएयू-फार्म सलाहकार सेवा केंद्र (एफएएससी), संगरूर की ओर से गांव तुरी (भवानीगढ़ के नजदीक) में इन-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन (In-situ CRM) संबंधी गांव स्तरीय किसान जागरूकता कैंप आयोजित किया गया।
किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. अशोक कुमार गर्ग, वरिष्ठ प्रसार वैज्ञानिक (मृदा विज्ञान) ने धान की पराली को बिल्कुल न जलाने तथा पर्यावरण अनुकूल और टिकाऊ तरीकों से इसका प्रबंधन करने की अपील की। उन्होंने बताया कि इन-सीटू पराली प्रबंधन से मिट्टी में पोषक तत्व और जैविक पदार्थ सुरक्षित रहते हैं, मिट्टी की सेहत में सुधार होता है, वायु प्रदूषण कम होता है और लंबे समय तक मिट्टी की उत्पादकता बनी रहती है।
डॉ. गर्ग ने पराली जलाने से होने वाले पोषक तत्वों के नुकसान के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि एक टन धान की पराली जलाने से लगभग 400 किलोग्राम जैविक कार्बन, 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाशियम और 1.2 किलोग्राम सल्फर का नुकसान होता है। इसलिए किसानों को पराली जलाने के बजाय उचित मशीनरी और कृषि तकनीकों के माध्यम से खेत में ही इसका प्रबंधन करना चाहिए। इससे पोषक तत्वों के संरक्षण के साथ-साथ मिट्टी के जैविक स्वास्थ्य में भी सुधार होता है।
उन्होंने हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, पीएयू स्मार्ट सीडर और सरफेस सीडिंग-कम-मल्चिंग जैसी पराली प्रबंधन तकनीकों के बारे में जानकारी दी, जिनके माध्यम से पराली जलाए बिना गेहूं की समय पर बुवाई की जा सकती है। उन्होंने देर से बोई जाने वाली बासमती किस्मों में गोभ अवस्था पर पोटाशियम नाइट्रेट (13:0:45) के 1.5 प्रतिशत घोल का पत्तियों पर छिड़काव करके दानों में फोक की समस्या के प्रबंधन संबंधी जानकारी भी दी। किसानों को धान और बासमती में कीटों तथा बीमारियों की नियमित निगरानी करने और उनके प्रबंधन के लिए पीएयू की सिफारिशों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
मिट्टी की जांच के महत्व पर जोर देते हुए डॉ. गर्ग ने किसानों को खादों के इस्तेमाल से पहले मिट्टी की जांच करवाने तथा मिट्टी और फसल की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने टिकाऊ फसल उत्पादन के लिए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन (INM) अपनाने पर भी जोर दिया।
किसानों को रबी फसलों में अनुशंसित जैव उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों के बारे में भी जानकारी दी गई। इसके अलावा, पंजाब की परिस्थितियों के लिए उपयुक्त पीएयू द्वारा अनुशंसित गेहूं और अन्य रबी फसलों की किस्मों के बारे में भी बताया गया।
डॉ. गर्ग ने किसानों को घरों में किचन गार्डन स्थापित करने और उसकी देखभाल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया। इससे परिवार के लिए ताजी, पौष्टिक और सुरक्षित सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है तथा पारिवारिक पोषण और खाद्य सुरक्षा में योगदान दिया जा सकता है।
उन्होंने किसानों को पीएयू किसान मेलों में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया। इन मेलों में किसानों को नई कृषि तकनीकों, अनुशंसित फसल किस्मों, कृषि मशीनरी और प्रकाशनों की जानकारी प्राप्त करने के साथ-साथ पीएयू के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों से कृषि संबंधी सलाह लेने का अवसर मिलता है।
कैंप के अंत में किसान सुरिंदर सिंह के धान के खेतों का दौरा किया गया और किसानों के साथ फसल एवं पराली प्रबंधन संबंधी विचार-विमर्श किया गया।






