वडोदरा, 24 सितंबर, 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात के वडोदरा में ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा आयोजित ‘विश्व नवीनीकरण के लिए आध्यात्मिक जागरूकता’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस’ रिट्रीट सेंटर का उद्घाटन भी किया।
राष्ट्रपति ने ब्रह्माकुमारीज़ नडियाद द्वारा आयोजित किए जा रहे ‘विकसित भारत के लिए युवा: राष्ट्र निर्माण के लिए आंतरिक शक्ति की जागरूकता’ कार्यक्रम का वर्चुअल शुभारंभ भी किया।
सिर्फ आर्थिक ही नहीं, मानव विकास भी जरूरी
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज के समय में केवल आर्थिक विकास ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मानव विकास पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो केवल बुद्धि का विकास न करे, बल्कि मनुष्य के विवेक को भी जागृत करे।
उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति वही है जिसमें प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता हो और मनुष्य दूसरों को नियंत्रित करने के बजाय स्वयं पर नियंत्रण रखना सीखे। उनके अनुसार ऐसी आध्यात्मिकता की आवश्यकता है जो लोगों को एक-दूसरे से जोड़े तथा समाज में शांति और सद्भावना पैदा करे।
विचारों और कर्मों में बदलाव से आ सकती है नई सोच
राष्ट्रपति ने कहा कि हर व्यक्ति के भीतर बदलाव की संभावना मौजूद होती है। यदि किसी व्यक्ति में यह विश्वास पैदा हो जाए कि अपने विचारों और कर्मों को बदलकर जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है, तो उसके भीतर आशा और आत्म-सम्मान फिर से पैदा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति में आया सकारात्मक बदलाव परिवार से लेकर पूरे समाज पर प्रभाव डाल सकता है। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस विभिन्न वर्गों के लोगों को शांति, सद्भावना और आपसी समझ के साथ जोड़ने वाला स्थान बनेगा।
युवाओं की आंतरिक शक्ति राष्ट्र निर्माण का आधार
नडियाद में युवाओं से संबंधित कार्यक्रम के वर्चुअल शुभारंभ का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जब युवा अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों को सकारात्मक दिशा देते हैं, तो इसका प्रभाव परिवार, कार्यस्थल, समाज और अंततः पूरे देश पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि ‘आंतरिक शक्ति की जागरूकता’ केवल व्यक्तिगत विकास का संदेश नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण से भी गहराई से जुड़ी हुई है। युवाओं को आत्मनिर्भर, शांतिप्रिय और जिम्मेदार बनाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
आधुनिक भारत को विरासत से जोड़ने की जरूरत
राष्ट्रपति ने कहा कि आत्म-परिवर्तन को सामाजिक परिवर्तन का आधार माना गया है। उन्होंने जोर दिया कि भारत की महान आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं से जोड़ा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य ऐसा देश बनना होना चाहिए जो आर्थिक रूप से समृद्ध, वैज्ञानिक रूप से उन्नत, सामाजिक रूप से समावेशी और आध्यात्मिक रूप से जागरूक हो।






