श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी,24 सितंबर, 2026 (जगजीत सिंह): फतेहगढ़ साहिब के शिक्षा विभाग के अधीन सेंटर ऑफ साइकोलॉजिकल असेसमेंट एंड गाइडेंस द्वारा शिक्षा एवं मनोविज्ञान के विद्यार्थियों के लिए “जीवन कौशल, आत्म-जागरूकता और भावनात्मक नियमन” विषय पर पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्म-जागरूकता, भावनात्मक नियमन, तनाव प्रबंधन, लचीलापन और व्यावहारिक जीवन कौशल का विकास करना था।
कार्यशाला के संयोजक एवं शिक्षा विभाग के प्रमुख डॉ. हरनीत बिलिंग ने कार्यशाला की आवश्यकता और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थियों को शैक्षणिक, सामाजिक और भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और इनसे निपटने के लिए जीवन कौशल एवं भावनात्मक नियमन महत्वपूर्ण हैं।
पहले दिन “आत्म-जागरूकता और आत्म-विश्लेषण” सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी खूबियों, भावनाओं और व्यवहार के तरीकों को समझा। दूसरे दिन शिक्षा विभाग की सहायक प्रोफेसर श्रीमती नवजोत कौर द्वारा “भावनात्मक नियमन” संबंधी सत्र आयोजित किया गया। तीसरे दिन मनोवैज्ञानिक श्री नवीन कुमार ने “व्यक्तिगत कल्याण के लिए कार्य योजना तैयार करना” विषय पर संवाद-आधारित सत्र आयोजित किया। मनोवैज्ञानिक खेलों, आत्म-चिंतन और श्वास संबंधी अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों ने तनाव प्रबंधन और भावनात्मक संतुलन के लिए व्यावहारिक तरीके सीखे। चौथे दिन व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र के दौरान भूमिका-अभिनय गतिविधियों, निर्देशित अभ्यास और व्यवहारिक कार्यों के माध्यम से सीखी गई तकनीकों को अमल में लाया गया।

पांचवें दिन समापन समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने अपने सुझाव और प्रमुख सीख साझा की। प्रो. प्रितपाल सिंह, वाइस चांसलर, ने शिक्षा विभाग और सेंटर के प्रयासों की सराहना की। प्रो. सुखविंदर सिंह बिलिंग, डीन अकादमिक मामले, ने इस पहल की सराहना करते हुए अनुभवात्मक शिक्षा और व्यक्तिगत विकास के महत्व पर जोर दिया। डॉ. सुमन प्रीत कौर, कोऑर्डिनेटर, ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
पांच दिवसीय यह कार्यशाला शिक्षा विभाग की विद्यार्थियों में जीवन कौशल, आत्म-जागरूकता, भावनात्मक लचीलापन और सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देने के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।






