जालंधर, 27 सितंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के दौरान पंजाब के हॉकी खिलाड़ी एवं कोच राजिंदर सिंह सीनियर की सेवाओं और हॉकी के प्रति उनके योगदान का विशेष रूप से उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने 1980 के मॉस्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे राजिंदर सिंह की उपलब्धियों को याद किया। उन्होंने 1981-82 विश्व कप और 1982 एशिया कप से जुड़ी उनकी खेल उपलब्धियों का भी जिक्र किया।
पीएम मोदी ने कहा कि देश में खेल प्रतिभाओं की तलाश के लिए गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने राजिंदर सिंह सीनियर को उन लोगों में शामिल बताया, जो गांवों से युवा खिलाड़ियों की प्रतिभा पहचानने और उसे निखारने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
राजिंदर सिंह सीनियर का जन्म 7 जनवरी 1958 को अमृतसर जिले के करली गांव में हुआ था। कॉलेज के समय से ही उनका रुझान हॉकी की ओर बढ़ा और 1976 में उनकी कप्तानी में पंजाबी यूनिवर्सिटी की टीम ने ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप जीती।
भारतीय टीम के डिफेंडर के रूप में राजिंदर सिंह अपनी पेनल्टी कॉर्नर लगाने की क्षमता के लिए भी जाने जाते थे। 1980 के मॉस्को ओलंपिक में भारत ने फाइनल में स्पेन को हराकर स्वर्ण पदक जीता था और राजिंदर सिंह उस टीम का हिस्सा थे।
1981-82 के विश्व कप में उन्होंने 13 गोल किए और टूर्नामेंट के शीर्ष स्कोरर रहे। 1982 के एशियाई खेलों में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां भारतीय टीम ने रजत पदक जीता।
खेल से संन्यास लेने के बाद राजिंदर सिंह सीनियर ने अपना ध्यान युवा हॉकी खिलाड़ियों को तैयार करने की ओर केंद्रित किया। उन्होंने चंडीगढ़ हॉकी अकादमी और एनआईएस पटियाला सहित विभिन्न संस्थानों से जुड़कर कोच के रूप में सेवाएं दीं।
प्रधानमंत्री ने उनके मौजूदा प्रयासों का भी उल्लेख किया, जिनके तहत पंजाब के गांवों में हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान विकसित किए जा रहे हैं। राजिंदर सिंह सीनियर का विशेष ध्यान उन गांवों के बच्चों को अवसर उपलब्ध कराने पर है, जहां उच्च स्तर की कोचिंग सुविधाओं की कमी है।
इस प्रकार राजिंदर सिंह सीनियर का खेल के मैदान से लेकर कोचिंग और जमीनी स्तर पर हॉकी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने तक का सफर भारतीय हॉकी के साथ उनके लंबे जुड़ाव को दर्शाता है।






