‘माई’ (निर्मल ऋषि) द्वारा लाहौर छोड़ने के लिए अपना सामान उठाकर जाने के दृश्य ने दर्शकों को भावुक किया-विधायक गुरदेव सिंह देव मान ने पद्मश्री निर्मल ऋषि और अन्य कलाकारों को सम्मानित किया
पटियाला, 29 सितंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): पटियाला स्थित ‘हरपाल टिवाणा सेंटर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स’ में नाटक “जिस लाहौर नहीं वेख्या, ओ जम्याई नहीं” के मंचन के दौरान दिवंगत नाटककार हरपाल टिवाणा की विरासत एक बार फिर जीवंत हो उठी। परिवार की तीसरी पीढ़ी ने इस विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली।इस मौके पर नाभा हलके के विधायक गुरदेव सिंह देव मान ने पद्मश्री निर्मल ऋषि और अन्य कलाकारों को सम्मानित किया।
नाटक की कहानी वर्ष 1947 में देश के विभाजन के बाद लाहौर में रह गई एक हिंदू महिला के इर्द-गिर्द घूमती है। लखनऊ से आकर उसके घर में रहने वाला एक मुस्लिम परिवार शुरुआत में उसे अपने साथ रखने से हिचकिचाता है और चाहता है कि वह वहां से चली जाए। लेकिन धीरे-धीरे वह उस परिवार का हिस्सा बन जाती है और परिवार के सभी सदस्य मिलकर सभी त्योहार, यहां तक कि दिवाली भी, मनाने लगते हैं। कहानी यह भी दर्शाती है कि कुछ कट्टरपंथी लोग इस आपसी सद्भाव को सहन नहीं कर पाते और अंततः उस मौलवी की हत्या कर सकारात्मक आवाज को दबाने का प्रयास करते हैं।
नाटक का वह दृश्य दर्शकों को भावुक कर गया, जब ‘माई’ (निर्मल ऋषि) लाहौर छोड़ने के लिए अपना सामान उठाकर जाने लगती है, लेकिन लाहौर के जौहरियों मोहल्ले के लोग उसे रोक लेते हैं और उसके जीवन के अंतिम समय तक उसका साथ निभाते हैं।

इस नाटक में दिवंगत हरपाल टिवाणा के दो पोतों, अंगद टिवाणा और यश हरपाल टिवाणा ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। उनके साथ उनके पिता और नाटक के निर्देशक मनपाल टिवाणा ने भी अहम भूमिका अदा की। पद्मश्री निर्मल ऋषि ने नाटक में मुख्य अभिनेत्री की भूमिका निभाई।
अपने दादा-दादी, नीना और हरपाल टिवाणा, के पदचिह्नों पर चलते हुए, जो वर्ष 1965 में ‘नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा’ से स्नातक होने वाले पहले पंजाबी थे, यश हरपाल टिवाणा अपने अभिनय कौशल को निखारने के लिए इस संस्थान में प्रशिक्षण लेने जा रहे हैं।
इस नाटक की कई अन्य विशेषताएं भी हैं। हाल ही में, इसके लेखक असगर वजाहत की पटकथा पर आमिर खान प्रोडक्शंस द्वारा ‘बटवारा 1947’ नामक फिल्म बनाई गई थी। नाटक को विकास जुनेजा ने तकनीकी रूप से तैयार किया है, जिसमें आधुनिक लाइटिंग और एलईडी प्रोजेक्शन का इस्तेमाल किया गया है।
नाटक की अन्य कलाकारों की टीम में कई ‘ओल्ड यादविंदरियन्स’ शामिल थे, जिनमें विशेष रूप से फतेह इंदर गर्ग, देवना मंगला, गुणवंत कौर और सोहराब सिद्धू शामिल रहे। इनके साथ पेशेवर कलाकार सुखविंदर सोही और वकीला मान के अलावा स्कूल के पंजाबी विभाग के प्रमुख सुखपाल सिंह ने भी अपनी भूमिका निभाई।






