नई दिल्ली, 1 अक्टूबर, 2026 (हर्षलीन सिंह): ‘वारिस पंजाब दे’ को राजनीतिक पार्टी के रूप में पंजीकृत करने के मामले में भारतीय चुनाव आयोग ने दिल्ली हाई कोर्ट के समक्ष राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कुछ चिंताओं का हवाला दिया है। यह जानकारी ई.सी.आई. की ओर से पेश हुए वकील संजय वशिष्ठ ने अदालत को दी। यह मामला ‘वारिस पंजाब दे’ द्वारा दायर याचिका से संबंधित है, जिसमें चुनाव आयोग को पार्टी के पंजीकरण संबंधी आवेदन पर जल्द फैसला करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने जनवरी 2025 में पंजीकरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन इस पर अभी तक फैसला नहीं हुआ है।
मामले की सुनवाई के दौरान ई.सी.आई. के वकील ने कहा कि पंजीकरण के मामले में कुछ राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताएं हैं। अदालत ने ई.सी.आई. का पक्ष सुने बिना तत्काल कोई निर्देश जारी करने से इनकार किया और आयोग से यह जानने की कोशिश की कि आवेदन पर फैसला करने में कितना समय लग सकता है। ‘वारिस पंजाब दे’ की ओर से अदालत में पंजीकरण प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग की गई है। याचिका से संबंधित रिपोर्टों के अनुसार, आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी की ओर से पंजीकरण और चुनाव चिह्न से संबंधित प्रक्रिया समय पर पूरी करने की मांग की जा रही है।
ई.सी.आई. राजनीतिक पार्टियों का पंजीकरण (Representation of the People Act), री-प्रेजेंटेशन ओफ द पीपल एक्ट 1951 की धारा 29A के तहत करता है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर नई राजनीतिक पार्टियों के पंजीकरण की प्रक्रिया और संबंधित जानकारी उपलब्ध है। इस मामले में अदालत ने अभी पंजीकरण के गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। अगली कार्रवाई में ECI की ओर से आवेदन पर फैसला लेने के लिए समय-सीमा को लेकर अपना पक्ष रखा जाना है।






