स्टॉकहोम, 7 अक्टूबर, 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): बेल्जियम में जन्मे अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हैल्जेन को भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान अंटार्कटिका स्थित ‘आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी’ के निर्माण और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने तथा खगोलीय स्रोतों से आने वाले अत्यधिक ऊर्जावान न्यूट्रिनो की खोज में योगदान के लिए दिया गया है।
नोबेल समिति के अनुसार, हैल्जेन के नेतृत्व में वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की अंतरराष्ट्रीय टीम ने ब्रह्मांड के उन रहस्यमयी कणों का अध्ययन करने के लिए एक अत्याधुनिक प्रयोगशाला तैयार की, जो सामान्य परिस्थितियों में पकड़ना बेहद कठिन है। उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों ने ब्रह्मांड को समझने के लिए ‘न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान’ के एक नए दौर की नींव रखी है।
भौतिक विज्ञान की नोबेल समिति के अध्यक्ष मार्क पीयर्स ने कहा कि फ्रांसिस हैल्जेन ने दुनिया भर के शोधकर्ताओं और इंजीनियरों को एकजुट कर ऐसी वैज्ञानिक सुविधा विकसित करने में नेतृत्व दिया, जिसने अंतरिक्ष से आने वाले उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो के अध्ययन को नई दिशा दी। उन्होंने हैल्जेन की वैज्ञानिक दृढ़ता और दूरदर्शिता को इस उपलब्धि का महत्वपूर्ण आधार बताया।
अंटार्कटिका की बर्फ में छिपी है विशाल प्रयोगशाला
‘आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी’ अंटार्कटिका के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ की मोटी परतों के भीतर स्थापित दुनिया की सबसे अनोखी वैज्ञानिक वेधशालाओं में से एक है। यहां हजारों प्रकाश-संवेदी सेंसर बर्फ के भीतर गहराई तक लगाए गए हैं। इनका उद्देश्य अंतरिक्ष से पृथ्वी की ओर आने वाले न्यूट्रिनो के बेहद दुर्लभ संकेतों को दर्ज करना है।
न्यूट्रिनो ऐसे सूक्ष्म कॉस्मिक कण हैं जिनका द्रव्यमान बेहद कम होता है और वे पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं। यही कारण है कि वे तारों, आकाशगंगाओं और ब्रह्मांड की अत्यंत शक्तिशाली खगोलीय घटनाओं से निकलकर लगभग बिना किसी बाधा के अंतरिक्ष की लंबी दूरी तय कर सकते हैं।
ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली स्रोतों की जानकारी
वैज्ञानिकों के लिए उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि इनके अध्ययन से उन खगोलीय घटनाओं के बारे में जानकारी मिल सकती है जहां अत्यधिक ऊर्जा पैदा होती है। इनमें दूरस्थ आकाशगंगाओं के सक्रिय केंद्र और अन्य बेहद शक्तिशाली कॉस्मिक घटनाएं शामिल हो सकती हैं।
हैल्जेन के नेतृत्व में ‘आइसक्यूब’ परियोजना ने ऐसे न्यूट्रिनो का पता लगाने की क्षमता विकसित की। इससे वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड को केवल प्रकाश या अन्य विद्युतचुंबकीय संकेतों के माध्यम से देखने के बजाय न्यूट्रिनो के जरिए भी समझने का अवसर मिला।
82 वर्षीय हैल्जेन ने इटली से की समिति से बातचीत
बेल्जियम में जन्मे 82 वर्षीय फ्रांसिस हैल्जेन अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन–मैडिसन से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। नोबेल पुरस्कार की घोषणा के बाद उन्होंने बताया कि उस समय वह इटली में थे और उन्होंने फोन पर नोबेल समिति से बातचीत की।
हालांकि उनके नाम की चर्चा पहले भी संभावित नोबेल पुरस्कार विजेताओं में होती रही थी, लेकिन आधिकारिक घोषणा के बाद उन्होंने इसे अपने लिए एक अलग और विशेष अनुभव बताया।
क्यों महत्वपूर्ण है न्यूट्रिनो का अध्ययन?
न्यूट्रिनो को अक्सर ‘घोस्ट पार्टिकल’ यानी ‘भूत कण’ कहा जाता है, क्योंकि ये सामान्य पदार्थ से बेहद कम संपर्क करते हैं। अरबों-खरबों न्यूट्रिनो लगातार पृथ्वी और मानव शरीर से होकर गुजरते रहते हैं, लेकिन उनका पता लगाना बेहद मुश्किल होता है।
आइसक्यूब जैसी विशाल वेधशाला ने वैज्ञानिकों को इन कणों के दुर्लभ संकेत दर्ज करने का माध्यम दिया है। इसके जरिए ब्रह्मांड की उत्पत्ति, उसकी संरचना और अत्यधिक ऊर्जा वाली अंतरिक्षीय घटनाओं को समझने के प्रयासों को नई गति मिली है।
फ्रांसिस हैल्जेन का नोबेल सम्मान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उनके शोध ने कण भौतिकी और खगोल विज्ञान के बीच एक नया सेतु तैयार किया है, जिससे आने वाले वर्षों में ब्रह्मांड के कई अनसुलझे रहस्यों पर से पर्दा उठने की उम्मीद है।





