धूरी, 8 अक्टूबर 2026 (छत्रपाल सिंह): मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बुधवार को कहा कि पंजाब ने लाल लकीर के भीतर बने घरों के मालिकाना हक के लिए दशकों से चली आ रही प्रतीक्षा को समाप्त कर दिया है। ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना के तहत परिवारों को संपत्ति स्वामित्व प्रमाण-पत्र सौंपे गए हैं और ऐसी प्रक्रिया शुरू की गई है, जो कानूनी रूप से दर्ज स्वामित्व, मानचित्रित संपत्ति सीमाओं और संस्थागत ऋण तक पहुंच उपलब्ध कराएगी।
उन्होंने कहा कि इस पहल से विशेष रूप से गरीब, दलित और भूमिहीन परिवारों को लाभ मिलेगा, जिनके घर पहले सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं थे। वहीं, सही नक्शे और राजस्व रिकॉर्ड लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति विवादों को हल करने में मदद करेंगे। धूरी में संपत्ति स्वामित्व कार्ड वितरित करने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य ने पंजाब को लाल लकीर से मुक्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिसके तहत लगभग 4,000 गांवों को जल्द ही उचित संपत्ति पंजीकरण मिलने वाला है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “धूरी रैली में हुआ विशाल जनसमूह यह साबित करता है कि हमारे काम की गूंज पंजाब के हर घर तक पहुंच रही है। परिवारों के इर्द-गिर्द केंद्रित राजनीति को समाप्त करते हुए हमने पंजाब को ‘लाल लकीर’ से मुक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत की है। लगभग 4,000 गांवों को जल्द ही उचित संपत्ति पंजीकरण मिलेंगे। हमने धूरी को 47 करोड़ रुपये का जल प्रोजेक्ट उपहार के रूप में दिया है। नहरी पानी 88 प्रतिशत कृषि भूमि के अंतिम छोर तक पहुंचने से हमारे किसानों की फसल उत्पादकता में वृद्धि हुई है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में पंजाब का नंबर-1 होना तथा बिजली के बिल शून्य होना अब वास्तविकता बन चुका है। हम केंद्रीय एजेंसियों की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। हमारा एकमात्र उद्देश्य निस्वार्थ भाव से पंजाब की सेवा करना है और पंजाबी किसी की धमकी बर्दाश्त नहीं करते। इंकलाब जिंदाबाद।”
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का उद्देश्य प्रत्येक पात्र परिवार को अपने घर का स्पष्ट मालिकाना हक और दस्तावेजी मान्यता प्रदान करना है। हमारा संकल्प यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक पात्र परिवार का घर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो और परिवार को उसके स्वामित्व को मान्यता देने वाला दस्तावेज मिले। यह पहल लोगों के अधिकारों, सम्मान और भविष्य की सुरक्षा को मजबूत करेगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “धूरी रैली में हुआ भारी जनसमूह यह साबित करता है कि हमारे काम की गूंज पंजाब के हर घर तक पहुंच रही है। परिवारों के इर्द-गिर्द केंद्रित राजनीति को समाप्त करते हुए हमने पंजाब को लाल लकीर से मुक्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत की है। लगभग 4,000 गांवों को जल्द ही उचित संपत्ति पंजीकरण मिलेगा।”
उन्होंने कहा, “घर का मालिक होना प्रत्येक परिवार की भावनाओं, आकांक्षाओं और भविष्य की उम्मीदों से गहराई से जुड़ा हुआ है। अपने घर के स्वामित्व का स्पष्ट रिकॉर्ड होने से परिवार को सुरक्षा और विश्वास की भावना मिलती है। ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पंजाब में कोई भी पात्र परिवार अपने घर के मालिकाना हक को लेकर असुरक्षित महसूस न करे।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “गांवों के कई परिवार पीढ़ियों से लाल लकीर के भीतर अपने घरों में रह रहे हैं और औपचारिक स्वामित्व रिकॉर्ड की अनुपस्थिति अक्सर उनके लिए कई तरह की समस्याएं पैदा करती है। ऐसे घर के लिए स्पष्ट स्वामित्व दस्तावेज होना, जिसमें एक परिवार की कई पीढ़ियां रह चुकी हों, बेहद महत्वपूर्ण है। ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का मुख्य उद्देश्य पात्र परिवारों को उनके घरों पर उनके मालिकाना हक की कानूनी मान्यता प्रदान करना है।”
इस योजना को जन-केंद्रित पहल बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “लोगों को उनके घरों के लिए स्वामित्व दस्तावेज उपलब्ध कराकर यह योजना औपचारिक संपत्ति रिकॉर्ड में लंबे समय से चले आ रहे अंतर को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एक प्रॉपर्टी कार्ड परिवार को यह विश्वास दिलाता है कि उसके घर की पहचान और उसके स्वामित्व से संबंधित जानकारी आधिकारिक रूप से दर्ज की गई है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “इस योजना के तहत संपत्तियों की सीमा निर्धारित करने और मैपिंग के लिए ड्रोन सर्वेक्षण तथा आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। सर्वेक्षण के माध्यम से घरों की स्थिति और सीमाओं की पहचान की जा रही है तथा स्वामित्व से संबंधित रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य लोगों के अधिकारों को स्पष्ट रूप से स्थापित करना और संपत्ति रिकॉर्ड में अधिक पारदर्शिता लाना है, जिससे भविष्य में स्वामित्व संबंधी अस्पष्टता कम होगी।”
उन्होंने कहा, “प्रॉपर्टी कार्ड जारी होने से पात्र लाभार्थियों को उनके घरों के स्वामित्व से संबंधित दस्तावेजी मान्यता और कानूनी सुरक्षा मिलेगी। घरों की सीमाओं और स्वामित्व के स्पष्ट रिकॉर्ड संपत्ति के मालिकाना हक से संबंधित गलतफहमियों और विवादों को कम करने में मदद करेंगे। औपचारिक संपत्ति रिकॉर्ड उपलब्ध होने से बैंकों से ऋण के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया भी आसान हो सकती है, हालांकि किसी भी ऋण की मंजूरी संबंधित बैंक के नियमों और पात्रता मानदंडों के अधीन होगी।”
उन्होंने कहा कि यह पहल लोगों को अपने घरों की देखभाल और सुधार करने तथा अपने परिवारों के भविष्य की योजना बनाने के लिए अधिक विश्वास प्रदान करेगी। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि इस योजना का लाभ प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचे और उनके घरों से संबंधित स्वामित्व रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से स्थापित हों।”
लाभार्थियों से भावनात्मक जुड़ाव व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “मैं सभी लाभार्थियों से अपील करता हूं कि वे अपने प्रॉपर्टी कार्ड में दर्ज नाम, घर के विवरण और अन्य जानकारी की ध्यानपूर्वक जांच करें। यदि कोई गलती या अस्पष्टता है तो उन्हें यह मामला संबंधित अधिकारियों के ध्यान में लाना चाहिए।”
चरणबद्ध वितरण का विवरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पहले चरण में पंजाब भर के 2,295 गांवों में प्रॉपर्टी कार्ड वितरित किए जाने का प्रस्ताव है, जिसमें संगरूर जिले के 221 गांव शामिल हैं। दूसरे चरण में पंजाब भर के 1,668 गांवों में प्रॉपर्टी कार्ड वितरित किए जाएंगे। तीसरा चरण नवंबर में और चौथा चरण दिसंबर में चलेगा।”
उन्होंने कहा कि चरणबद्ध वितरण की योजना इसलिए बनाई गई है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रॉपर्टी कार्ड अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों तक सुचारू और योजनाबद्ध तरीके से पहुंच सकें। उन्होंने कहा, “मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे सर्वेक्षण, रिकॉर्ड के सत्यापन और प्रॉपर्टी कार्ड के वितरण के दौरान संबंधित टीमों के साथ सहयोग करें। यह जनहितैषी योजना मिशन मोड में लागू की जा रही है और इस वर्ष के अंत तक पूरे राज्य को कवर कर लेगी।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमने धूरी को 47 करोड़ रुपये का जल प्रोजेक्ट उपहार में दिया है। नहरी पानी 88 प्रतिशत कृषि भूमि तक पहुंचने से हमारे किसानों की फसल उत्पादकता में वृद्धि हुई है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में पंजाब का नंबर-1 होना और बिजली के बिल शून्य होना अब वास्तविकता है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “हम केंद्रीय एजेंसियों की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। हमारा एकमात्र उद्देश्य पंजाब की निस्वार्थ सेवा करना है और पंजाबी किसी की धमकी बर्दाश्त नहीं करते।”

परिवारों को सुरक्षित मालिकाना हक देने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया
‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का महत्व केवल प्रॉपर्टी कार्ड सौंपने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन घरों के अधिकारों का आधिकारिक और प्रमाणित रिकॉर्ड तैयार करने में है, जो ऐतिहासिक रूप से औपचारिक राजस्व रिकॉर्ड से बाहर रहे हैं।
इस प्रक्रिया के तहत अधिसूचित आबादी क्षेत्र के प्रत्येक घर और प्लॉट का सर्वेक्षण एवं मैपिंग आधुनिक तकनीक के माध्यम से की जाती है, जिसमें ड्रोन मैपिंग भी शामिल है। वहीं, मालिक की पहचान गांव स्तरीय समिति की मौजूदगी में पटवारी या सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा घर-घर जाकर की जाती है।
ड्राफ्ट नक्शा और स्वामित्व संबंधी विवरण गांव में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाते हैं तथा पंचायत के साथ साझा किए जाते हैं। वहीं, मालिकों को व्हाट्सऐप के माध्यम से अपनी जानकारी प्राप्त होती है, ताकि वे प्रविष्टियों की पुष्टि कर सकें और रिकॉर्ड को अंतिम रूप देने से पहले आवश्यक सुधार की मांग कर सकें। यह पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया परिवारों को अधिकारों के अंतिम रिकॉर्ड का हिस्सा बनने से पहले अपने स्वामित्व विवरण की जांच करने का अवसर देती है।
रिकॉर्ड को अंतिम रूप दिए जाने के बाद अधिकारों के रिकॉर्ड का औपचारिक रूप से सत्यापन किया जाता है और उसके आधार पर प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किया जाता है। कार्ड में सर्वेक्षण यूनिट नंबर, GPS स्थान, ड्रोन नक्शा और ऑनलाइन सत्यापन के लिए QR कोड होता है। इससे परिवार को अपनी संपत्ति का दस्तावेजी और प्रमाणित रिकॉर्ड मिलता है।
यह विशेष रूप से गरीब और अनुसूचित जाति के परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके पास आबादी क्षेत्र के बाहर कोई जमीन नहीं है और जिनके लिए उनका घर ही एकमात्र संपत्ति हो सकता है। औपचारिक मान्यता से मालिकाना हक को अधिक सुरक्षा मिल सकती है, संपत्ति की सीमाओं को सही करने और विवादों को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, संपत्ति को कारोबार, कृषि, शिक्षा या स्वास्थ्य के लिए बैंक ऋण प्राप्त करने हेतु सुरक्षा के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह रिकॉर्ड पंजीकरण, हस्तांतरण और विरासत के मामलों में भी सहायता कर सकता है, जिसमें प्रत्येक सह-मालिक का हिस्सा दर्ज किया जाता है। इस बीच, ग्राम पंचायतों को गांव के विकास की योजना बनाने के लिए घरों, सड़कों, नालियों और सार्वजनिक स्थानों के सटीक नक्शे मिलते हैं, जबकि प्रशासन को डिजिटाइज्ड और सटीक गांव रिकॉर्ड उपलब्ध होते हैं।





