Saturday, October 10, 2026
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राजस्थान में 8,100 रुपये में नल कनेक्शन देने की व्यवस्था पर हाईकोर्ट की रोक, सर्कुलर से नियम बदलने पर उठे सवाल

जयपुर, 8 अक्टूबर 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): राजस्थान में नए घरेलू नल कनेक्शन से जुड़ी 8,100 रुपये की शुल्क व्यवस्था को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने जलदाय विभाग की ओर से 12 फरवरी 2025 को जारी उस सर्कुलर को रद्द कर दिया, जिसके आधार पर ठेकेदारों के माध्यम से नए नल कनेक्शन से संबंधित विभिन्न कार्य कराने की व्यवस्था लागू की गई थी। कोर्ट ने माना कि नियमों में बदलाव केवल प्रशासनिक सर्कुलर जारी करके नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है।

यह मामला पी.एच.ई.डी. कॉन्ट्रैक्टर वेलफेयर कमेटी की ओर से दायर याचिका से जुड़ा था। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश शुभा मेहता ने विभाग की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कहा कि वैधानिक नियमों में संशोधन के लिए कानून के अनुरूप अधिसूचना जारी करना जरूरी है।

12 फरवरी 2025 के सर्कुलर में क्या बदला था?

जलदाय विभाग ने 12 फरवरी 2025 को जारी सर्कुलर के जरिए नए नल कनेक्शन से जुड़े कार्यों के लिए 8,100 रुपये की राशि निर्धारित की थी। प्रस्तावित व्यवस्था में ठेकेदारों के माध्यम से लाइसेंसधारी प्लंबरों की सेवाएं लेकर कनेक्शन से जुड़े काम कराने का प्रावधान था।

इस पूरी प्रक्रिया में केवल पाइप या नल लगाने का काम ही शामिल नहीं था, बल्कि प्लंबिंग, वाटर मीटर की व्यवस्था, सड़क कटिंग और नए नल कनेक्शन से संबंधित अन्य कार्य भी इसके दायरे में आते थे। इसी व्यवस्था को लेकर ठेकेदार पक्ष ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

हाईकोर्ट ने सर्कुलर को क्यों माना अनुचित?

याचिकाकर्ताओं की ओर से मुख्य आपत्ति यह थी कि विभाग ने मौजूदा नियमों में बदलाव करने के लिए जिस प्रक्रिया का इस्तेमाल किया, वह कानूनी रूप से उचित नहीं थी। मामले में यह सवाल प्रमुख था कि क्या किसी वैधानिक नियम में बदलाव केवल विभागीय आदेश या सर्कुलर के जरिए किया जा सकता है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियम बनाने और उनमें संशोधन करने के लिए कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। केवल प्रशासनिक स्तर पर जारी किए गए सर्कुलर के आधार पर वैधानिक नियमों की मूल व्यवस्था को बदला नहीं जा सकता।

ठेकेदारों के जरिए कनेक्शन देने की व्यवस्था पर असर

फैसले का सीधा असर उस व्यवस्था पर पड़ा है, जिसके तहत आवेदकों से 8,100 रुपये लेकर ठेकेदारों के माध्यम से नए नल कनेक्शन से जुड़े कार्य कराए जाने थे। हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह व्यवस्था फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगी।

हालांकि, अदालत के फैसले के बाद नए नल कनेक्शन की प्रक्रिया पूरी तरह बंद होगी या विभाग किसी वैकल्पिक व्यवस्था के तहत आवेदन स्वीकार करेगा, इस बारे में जलदाय विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना बाकी है।

क्या पुरानी एल-फॉर्म व्यवस्था वापस आएगी?

फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए कनेक्शन के लिए अब कौन-सी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पहले नल कनेक्शन के लिए एल-फॉर्म के माध्यम से प्रक्रिया अपनाई जाती थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद इस व्यवस्था को दोबारा लागू किए जाने की संभावना पर चर्चा हो सकती है, लेकिन फिलहाल इसे लेकर विभाग की ओर से कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

इसी तरह, विभाग इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय की बड़ी पीठ या सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगा अथवा नहीं, यह भी अभी स्पष्ट नहीं है।

उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने रखता है?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 8,100 रुपये वाली ठेकेदार आधारित नई व्यवस्था पर हाईकोर्ट के आदेश का असर पड़ा है। ऐसे में नए नल कनेक्शन के लिए आवेदन करने वाले लोगों को विभाग की ओर से जारी होने वाले अगले आधिकारिक आदेश या दिशा-निर्देश का इंतजार करना होगा।

फैसले का व्यापक महत्व इसलिए भी है क्योंकि अदालत ने केवल 8,100 रुपये की राशि से जुड़े प्रावधान पर ही सवाल नहीं उठाया, बल्कि यह सिद्धांत भी स्पष्ट किया कि वैधानिक नियमों में परिवर्तन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। इससे भविष्य में विभाग द्वारा नियमों में किए जाने वाले संशोधनों की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।

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