नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): जी.एस.टी. व्यवस्था को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए जी.एस.टी. परिषद कई अहम प्रक्रियागत सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि भविष्य में जीएसटी की दरों में बदलाव पर साल में केवल एक बार विचार किया जाएगा और ऐसे फैसले 1 अप्रैल से प्रभावी होंगे। जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में मुख्य रूप से कर अनुपालन आसान बनाने, कारोबारियों को राहत देने और टैक्स संबंधी विवाद कम करने पर चर्चा हुई। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस बैठक में जीएसटी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया। परिषद का जोर मौजूदा व्यवस्था को बेहतर बनाने और कारोबारियों के लिए प्रक्रियाओं को सुविधाजनक बनाने पर रहा।
जी.एस.टी. मामलों में गिरफ्तारी से जुड़े अधिकारों पर अहम प्रस्ताव
जी.एस.टी. परिषद ने कर अधिकारियों के हाथों से गिरफ्तारी की शक्तियां हटाने की सिफारिश की है। साथ ही, आपराधिक अभियोजन शुरू करने की मौद्रिक सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि जी.एस.टी. कानून के तहत आपराधिक कृत्य सामने आने पर अभियोजन की कार्रवाई जारी रह सकेगी। यानी प्रस्ताव का उद्देश्य कर अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों में बदलाव करना है, ना कि आपराधिक मामलों में कानूनी कार्रवाई को पूरी तरह समाप्त करना।
जुर्माने और नोटिस संबंधी नियमों में बदलाव
परिषद ने सामान्य जुर्माने को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने की सिफारिश की है। इसके अतिरिक्त, न्यूनतम सजा से संबंधित प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव है, जिससे सजा निर्धारित करते समय न्यायिक विवेक को महत्व दिया जा सकेगा। करदाताओं के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव के तहत 10,000 रुपये से कम राशि वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं करने की सिफारिश की गई है। ऐसे मामलों में पहले से जारी लंबित नोटिसों को वापस लेने का भी प्रस्ताव है। इससे कम राशि के विवादों में उलझे कारोबारियों को राहत मिलने की संभावना है।
बीमा, पाइपलाइन और टेलीकॉम क्षेत्र को ITC का लाभ
जी.एस.टी. परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दायरे को बढ़ाने की सिफारिश की है। इसके अंतर्गत कर्मचारियों के स्वास्थ्य और जीवन बीमा, दूरसंचार टावरों तथा फैक्ट्री परिसर से बाहर बिछाई गई पाइपलाइनों से संबंधित कुछ खर्चों पर आई.टी.सी. देने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा, मुफ्त वितरित किए गए नमूनों और कानूनी प्रावधानों के तहत नष्ट किए जाने वाले एक्सपायर हो चुके स्टॉक पर भी आईटीसी उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है। इससे विशेष रूप से दवा निर्माताओं और तेजी से बिकने वाले उपभोक्ता उत्पादों (FMCG) से जुड़े कारोबारियों को लाभ हो सकता है।
रिफंड के लिए 10 दिन की समयसीमा का प्रस्ताव
कारोबारियों की नकदी संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जीएसटी रिफंड प्रक्रिया में तेजी लाने की सिफारिश की गई है। इसके तहत रिफंड आवेदन की प्राप्ति की पुष्टि करने की अवधि 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव है। जोखिम आकलन के आधार पर पात्र रिफंड दावों की 90 प्रतिशत राशि को स्वचालित तरीके से मंजूर करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। वित्त मंत्री के अनुसार, इससे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी में सुधार होगा। रिफंड पात्रता का विस्तार करते हुए 1 नवंबर 2026 से पात्र इनपुट सेवाओं से जुड़े क्रेडिट को शामिल करने की सिफारिश की गई है। वहीं, प्लांट और मशीनरी के लिए पात्र क्रेडिट से संबंधित रिफंड सुविधा 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का प्रस्ताव है।
5 करोड़ रुपये तक के कारोबार वालों के लिए नई सुविधा
छोटे कारोबारियों के लिए परिषद ने एक वैकल्पिक व्यवस्था को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके तहत 5 करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार वाले और केवल अंतिम उपभोक्ताओं को आपूर्ति करने वाले पात्र करदाता सालाना रिटर्न दाखिल कर सकेंगे, जबकि टैक्स का भुगतान हर तिमाही किया जा सकेगा। दूसरी ओर, सप्लाई चेन में किसी अन्य आपूर्तिकर्ता की चूक के कारण वास्तविक खरीदार का इनपुट टैक्स क्रेडिट प्रभावित होने से बचाने संबंधी प्रस्ताव पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इस मुद्दे को आगे विचार के लिए अधिकारियों की समिति के पास भेजा गया है।
अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि प्रक्रिया संबंधी सुधारों को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। समिति के पास भेजे गए मुद्दों पर भी इससे पहले निर्णय लेने की योजना है।इन प्रस्तावित बदलावों से जीएसटी दरों में बार-बार होने वाले बदलावों को सीमित करने, छोटे कारोबारियों के लिए अनुपालन आसान बनाने, रिफंड में तेजी लाने और कर विवादों को कम करने की दिशा में मदद मिल सकती है। हालांकि, परिषद की सिफारिशों और प्रस्तावों के अंतिम कार्यान्वयन की स्थिति संबंधित औपचारिक निर्णयों पर निर्भर करेगी।





