Tuesday, October 13, 2026
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हरियाणा में औद्योगिक निवेश से खुल रहे विकास और रोजगार के नए द्वार, आईएमटी बन रहे विकास के नए इंजन

Haryana is strengthening its industrial ecosystem through expanding IMTs, major corporate investments and modern infrastructure to generate employment and accelerate economic growth.

चंडीगढ़, 13 अक्टूबर 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा तेजी से औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। राज्य में निवेश करने वाली कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी, औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (आईएमटी) का विस्तार और आधुनिक औद्योगिक सुविधाओं का विकास प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देने के साथ-साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने की मजबूत संभावनाएं पैदा कर रहे हैं। हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) द्वारा विकसित औद्योगिक क्षेत्र अब केवल उत्पादन केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि इन्हें उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और श्रमिक सुविधाओं से युक्त संपूर्ण औद्योगिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के विशेष प्रयासों से प्रदेश में औद्योगिक निवेश का लगातार विस्तार हो रहा है। यह इस बात का संकेत है कि हरियाणा देश और वैश्विक कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण निवेश गंतव्य बन रहा है। नए उद्योगों की स्थापना और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हरियाणा के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में सिंगापुर का दौरा किया है। इससे प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ परिवहन, भंडारण, आपूर्ति श्रृंखला, रखरखाव, निर्माण, सुरक्षा, खानपान और अन्य सहायक सेवाओं में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

छह प्रमुख आईएमटी में निवेश के लिए अनुकूल माहौल

डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि हरियाणा में छह प्रमुख औद्योगिक मॉडल टाउनशिप विकसित की गई हैं। इनमें आईएमटी मानेसर लगभग 4,000 एकड़, आईएमटी रोहतक लगभग 3,600 एकड़, आईएमटी बावल लगभग 3,300 एकड़, आईएमटी खरखौदा लगभग 3,200 एकड़, आईएमटी फरीदाबाद लगभग 1,800 एकड़ और आईएमटी सोहना लगभग 1,500 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई हैं।

इन औद्योगिक क्षेत्रों में सरकार की ओर से कंपनियों को उद्योग स्थापित करने के लिए सड़क, बिजली, पानी, लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक प्लॉट और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इससे कंपनियों को अपना कारोबार शुरू करने और संचालित करने के लिए बेहतर आधार मिलता है। नियोजित औद्योगिक क्षेत्रों में निवेशकों को एक ही स्थान पर जमीन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने से परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में आसानी होती है।

बड़ी कंपनियां कर रही हैं निवेश, हरियाणा के विकास को मिल रहा नया आकार

उन्होंने बताया कि हरियाणा की इन आईएमटी में विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियां निवेश कर रही हैं। इन औद्योगिक क्षेत्रों में मारुति सुजुकी 800 एकड़ जमीन पर 18,000 करोड़ रुपये, एटीएल कंपनी 178 एकड़ में 7,000 करोड़ रुपये, आदित्य बिरला समूह 70 एकड़ में 1,140 करोड़ रुपये, टोयोटा बोशोकू 21 एकड़ में 400 करोड़ रुपये, अमूल 10 एकड़ में 300 करोड़ रुपये के निवेश से दूध एवं डेयरी उत्पादों से जुड़ी परियोजनाएं, डेंसो 37 एकड़ में 570 करोड़ रुपये, फ्लिपकार्ट 140 एकड़ में 1,300 करोड़ रुपये, फैवेली ट्रांसपोर्ट 5 एकड़ में 200 करोड़ रुपये, यूफ्लेक्स 14 एकड़ में 300 करोड़ रुपये और यूनो मिंडा 94 एकड़ में 11,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के माध्यम से हरियाणा के विकास को नया आकार दे रही हैं।

इन प्रमुख कंपनियों के अलावा यामाहा, एस्कॉर्ट्स, व्हर्लपूल, इंडियन ऑयल, एशियन पेंट्स, जेसीबी, होंडा, हार्ले-डेविडसन, सन फार्मा, पैनासोनिक, ड्यूरासेल, बेनेटन, हीरो, गुडईयर, डीएलएफ, योकोहामा, गूगल, टाटा, नेस्ले, माइक्रोसॉफ्ट, मोटोरोला, सैमसंग, ओसराम, एयरटेल, सुकेम और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स सहित अनेक कंपनियां भी अपनी परियोजनाएं स्थापित कर रही हैं।

इससे स्पष्ट होता है कि हरियाणा में निवेश केवल किसी एक उद्योग या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑटोमोबाइल, उन्नत विनिर्माण, ऊर्जा भंडारण, रेल परिवहन और खाद्य प्रसंस्करण सहित विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां विकसित हो रही हैं।

रोजगार सृजन की पूरी श्रृंखला को मिलेगा प्रोत्साहन

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि किसी भी औद्योगिक परियोजना का प्रभाव केवल कारखाने में काम करने वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहता। उद्योगों के विस्तार से कुशल तकनीकी कर्मचारियों, इंजीनियरों, मशीन ऑपरेटरों, गुणवत्ता नियंत्रण विशेषज्ञों, प्रशासनिक कर्मचारियों और अन्य श्रमिकों की मांग बढ़ती है।

इसके साथ ही माल ढुलाई, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग, औद्योगिक रखरखाव, निर्माण कार्य और स्थानीय आपूर्ति सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास आवास, परिवहन, बाजार, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सुविधाओं की मांग बढ़ने से स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलती है।

इस प्रकार औद्योगिक निवेश का लाभ बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे एवं मध्यम उद्योगों, स्थानीय कारोबारियों और सेवा क्षेत्र तक पहुंचता है। विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) बड़ी कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़कर अपने कारोबार का विस्तार करते हैं।

निवेशकों के लिए सुविधाएं, उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि हरियाणा सरकार की रणनीति केवल कंपनियों को औद्योगिक जमीन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों को प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं, स्पष्ट भूमि स्वामित्व, पूर्व-स्वीकृत औद्योगिक भूमि उपयोग, सिंगल-विंडो सहायता और बेहतर सड़क संपर्क के साथ विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

औद्योगिक क्षेत्रों के भीतर तैयार फैक्ट्री शेड, गोदाम, लॉजिस्टिक्स सुविधाएं, कर्मचारियों के लिए आवास, अस्पताल, व्यावसायिक केंद्र, कौशल विकास केंद्र और स्टार्टअप एवं इन्क्यूबेशन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन सुविधाओं का उद्देश्य कंपनियों के लिए उद्योग स्थापित करने और संचालन शुरू करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। वहीं, कर्मचारियों के आवास, हॉस्टल और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाएं औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए जा रहे बुनियादी ढांचे का हिस्सा हैं।

सभी प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में महिला कर्मचारियों के लिए हॉस्टल, औद्योगिक क्षेत्रों में 10 मातृशक्ति क्रेच नेटवर्क, सामान्य सुविधा केंद्र तथा श्रमिकों के लिए डॉर्मिटरी और सिंगल रूम आवास जैसी पहल भी विकसित की गई हैं। ये सुविधाएं कार्यस्थल के आसपास रहने और काम करने की परिस्थितियों को बेहतर बनाने में सहायक होती हैं।

खरखौदा से बावल तक औद्योगिक नेटवर्क का होगा विस्तार

डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि हरियाणा में औद्योगिक विकास को नए क्षेत्रों तक पहुंचाने की भी योजना है। आईएमटी खरखौदा के विस्तार के लिए लगभग 5,800 एकड़, आईएमटी कोसली के लिए लगभग 5,000 एकड़, आईएमटी बावल के विस्तार के लिए लगभग 2,000 एकड़ और आईएमटी सोहना के विस्तार के लिए लगभग 1,500 एकड़ अतिरिक्त जमीन चिह्नित की गई है।

उद्योगों के साथ कौशल विकास पर भी जोर

उन्होंने बताया कि निवेश के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कुशल कार्यबल तैयार करना भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए कौशल विकास केंद्रों, सामान्य सुविधा केंद्रों, स्टार्टअप सहायता और इन्क्यूबेशन सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।

इसके अलावा, पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए 500 करोड़ रुपये की प्रारंभिक राशि वाला समर्थ फंड, एमएसएमई के लिए सामान्य सुविधा केंद्र और औद्योगिक क्षेत्रों में संबंधित विभागों की संयुक्त व्यवस्था जैसी पहल भी शामिल हैं।

 

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