न्यूयॉर्क, 21 अक्टूबर 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में मानवाधिकारों के मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि मानवाधिकारों का इस्तेमाल किसी देश पर राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा तरीके से निशाना साधने के साधन के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। भारत की ओर से विदेश मंत्रालय की उप सचिव बरखा तामराकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में यह बयान दिया।
भारत ने क्या कहा?
– अपुष्ट आरोपों पर आपत्ति: भारत ने कहा कि अधूरे आंकड़ों और बिना सत्यापन किए गए आरोपों के आधार पर किसी देश की नकारात्मक छवि पेश करना उचित नहीं है।
– रिपोर्टों की सही व्याख्या: भारत ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों से अपील की कि रिपोर्टों का उल्लेख सही संदर्भ में किया जाए और मानवाधिकारों से संबंधित संचार को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाए।
– संवैधानिक सुरक्षा: भारत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 सहित देश के कानून मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रिया की रक्षा करते हैं।
– संवाद पर जोर: भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं के साथ सहयोग निष्पक्षता, पारदर्शिता और बातचीत के आधार पर होना चाहिए।
क्यों खड़ा हुआ विवाद?
संयुक्त राष्ट्र के 20 से अधिक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने दिल्ली में हाल ही में हुए युवाओं के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग, गिरफ्तारियों और शांतिपूर्ण सभाओं पर प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। भारत ने इन आलोचनाओं को अपुष्ट आरोपों और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देखा है।
भारत का पक्ष है कि मानवाधिकारों की समीक्षा निष्पक्ष और साक्ष्यों पर आधारित होनी चाहिए, जबकि संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित व्यवहार की जांच की मांग की है।
यह दोनों पक्षों के बीच मानवाधिकारों और राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र को लेकर जारी विवाद का हिस्सा है।






