Wednesday, November 4, 2026
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हरियाणा ने प्रदूषण रोकथाम अभियान तेज किया

हरियाणा, 23 अक्टूबर, 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा सरकार ने पराली जलाने, वाहनों से होने वाले प्रदूषण, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के अध्यक्ष राजेश वर्मा और हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में इन उपायों की समीक्षा की गई। बैठक में वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए पूरे राज्य में की जा रही पहलों और कार्रवाई की प्रगति का जायजा लिया गया।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक अमित खत्री ने बताया कि राज्य में फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के वितरण के लिए निर्धारित 9,000 मशीनों के लक्ष्य के मुकाबले 13,200 मशीनें वितरित की जा चुकी हैं। यह निर्धारित लक्ष्य से 47 प्रतिशत अधिक है। पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए इस वर्ष अब तक 52 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा, 10,000 रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा वसूला गया है। पराली जलाने से जुड़े मामलों में किसानों के राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री भी की गई है।

राज्य में गांव स्तर पर पराली जलाने की घटनाओं की पुष्टि के लिए राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र (NRSC) द्वारा विकसित मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे उपग्रह आधारित आंकड़ों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी करने में मदद मिल रही है। धान के अवशेषों को उपयोगी संसाधन के रूप में बढ़ावा देने के लिए चालू सीजन के दौरान 27.10 लाख मीट्रिक टन धान के अवशेषों के औद्योगिक उपयोग के लिए जिला स्तर पर समझौते किए गए हैं।

बैठक में बताया गया कि 30 सितंबर तक बायोमास आधारित बिजली परियोजनाओं में 7.284 लाख मीट्रिक टन धान की पराली का इस्तेमाल किया जा चुका है, जो उनके वार्षिक लक्ष्य का 77.16 प्रतिशत है। वहीं, संपीड़ित बायोगैस (CBG) संयंत्रों में भी 1.053 लाख मीट्रिक टन पराली का उपयोग किया गया है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में लगातार आ रही गिरावट के लिए हरियाणा सरकार की सराहना की। उन्होंने फसल अवशेष जलाने की प्रवृत्ति को रोकने और पर्यावरण अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।

राजेश वर्मा ने झज्जर जिला प्रशासन द्वारा बादली क्षेत्र में विकसित मॉडल ईंट-भट्ठे की भी सराहना की, जहां धान की पराली का ईंधन के रूप में प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने इस पहल को कृषि अवशेषों को उपयोगी संसाधन में बदलने का व्यावहारिक उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसे नवाचार पराली जलाने और वायु प्रदूषण को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं। उन्होंने इन टिकाऊ उपायों को व्यापक स्तर पर अपनाने और जिला प्रशासन तथा औद्योगिक इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया।

बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से बाहर के आठ जिलों में ईंट-भट्ठों पर धान की पराली से बने पेलेट्स का ईंधन के रूप में उपयोग किया जा रहा है। इनमें औसतन 21.9 प्रतिशत को-फायरिंग दर दर्ज की गई है। इन जिलों के कुल 708 ईंट-भट्ठों में से 707 को निर्धारित मानकों के अनुपालन के दायरे में लाया जा चुका है।

थर्मल पावर प्लांटों में भी कोयले के साथ बायोमास के मिश्रण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इंदिरा गांधी सुपर थर्मल पावर स्टेशन ने अपने को-फायरिंग लक्ष्य का 72.89 प्रतिशत हासिल कर लिया है।

प्रदूषण की निगरानी के लिए सेंसर और ड्रोन तैनात

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष शेखर विद्यार्थी ने बताया कि वायु प्रदूषण और पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी मजबूत करने के लिए राज्य के चिह्नित रेड जोन वाले गांवों में PM2.5 के 79 सेंसर लगाए गए हैं।

निगरानी के पहले चरण में 20 ड्रोन तैनात किए गए हैं, जबकि 30 और ड्रोन तैनात करने की योजना है। इन उपायों से प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी करने और पराली जलाने की घटनाओं की अधिक प्रभावी ढंग से पहचान करने में मदद मिलेगी।

हरियाणा सरकार ने ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों की खरीद के लिए 14.50 करोड़ रुपये की लागत से 600 कैमरे खरीदने की मंजूरी दी है। इसके अतिरिक्त, 1,500 और कैमरों की खरीद के लिए अलग से टेंडर जारी किया गया है।

प्रस्तावित उपायों के तहत राज्य के एनसीआर जिलों में वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के बिना वाहनों को पेट्रोल पंपों और सीएनजी स्टेशनों पर ईंधन उपलब्ध नहीं करवाने की व्यवस्था लागू करने का भी प्रस्ताव है।

इस वर्ष जनवरी से अक्टूबर के मध्य तक हरियाणा ट्रैफिक पुलिस ने निर्धारित आयु सीमा पूरी कर चुके 19,067 वाहनों को जब्त किया है। इनमें से 785 वाहनों को स्क्रैपिंग के लिए भेजा गया है।

‘परिवर्तन योजना’ के तहत पुराने व्यावसायिक ट्रकों और बसों को स्वच्छ BS-VI, इलेक्ट्रिक या सीएनजी वाहनों से बदलने के लिए 18,501 लाभार्थियों ने पंजीकरण करवाया है।

राज्य के एनसीआर जिलों में डीजल से चलने वाले 596 ऑटो रिक्शा को भी चरणबद्ध तरीके से हटाया गया है। जनवरी 2023 से नए डीजल ऑटो रिक्शा के पंजीकरण पर रोक लगी हुई है।

ट्रैफिक जाम और सड़क की धूल से होने वाले प्रदूषण पर कार्रवाई

ट्रैफिक जाम और उससे होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए 84 ऐसे स्थानों पर अल्पकालिक उपाय किए गए हैं, जहां तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत थी। इसके अलावा, 10 स्थानों पर दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कदम उठाए गए हैं। स्वचालित निगरानी को प्रभावी बनाने के लिए इन स्थानों पर कुल 205 ANPR कैमरे लगाए गए हैं।

सड़क की धूल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, मानेसर, करनाल, पानीपत और रोहतक में 748.89 किलोमीटर सड़कों का पुनर्विकास किया गया है। इसके अलावा, 81 मशीनों की आवश्यकता के मुकाबले 78 मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें तैनात की गई हैं।

इन सात शहरों में निर्माण एवं विध्वंस (C&D) मलबे के लिए सभी 44 सेकेंडरी कलेक्शन सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। मलबा एकत्र करने के लिए जीपीएस से लैस वाहन भी तैनात किए गए हैं। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण को बेहतर बनाने के लिए 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली इमारतों के 56 भवन नक्शे ‘डस्ट पोर्टल’ पर पंजीकृत किए गए हैं।

शहरी स्थानीय निकायों को धूल नियंत्रण संबंधी उपायों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें वीडियो निगरानी, प्रत्येक पखवाड़े स्व-मूल्यांकन, कम लागत वाले वायु गुणवत्ता सेंसर, हवा रोकने वाले बैरियर, धूलरोधी पर्दे, पानी का छिड़काव और निर्माण सामग्री का ढककर परिवहन सुनिश्चित करना शामिल है।

औद्योगिक इकाइयों पर भी बढ़ाई निगरानी

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव योगेश कुमार ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए औद्योगिक इकाइयों की जांच तेज कर दी गई है। जनवरी से सितंबर के बीच बोर्ड ने मानकों के अनुरूप निर्धारित क्षेत्रों में 4,129 और गैर-अनुरूप क्षेत्रों में 462 औद्योगिक इकाइयों की जांच की। नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिसमें इकाइयों को बंद करना भी शामिल है।

कुल 191 स्टोन क्रशर इकाइयों ने वेबकैम या वीडियो निगरानी प्रणाली स्थापित की है, जबकि 293 इकाइयों में कम लागत वाले पार्टिकुलेट मैटर सेंसर लगाए गए हैं। कुल 708 स्टोन क्रशर इकाइयों में से 707 को धूल नियंत्रण संबंधी शर्तों के साथ संशोधित संचालन प्रमाणपत्र (सहमति) जारी किया गया है।

डीजल जनरेटर (DG) सेटों से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए भी कार्रवाई की गई है। जांच के बाद 2,978 डीजी सेटों में से मानकों का पालन नहीं करने वाली 153 इकाइयों को बंद करवाया गया है।

पराली को आर्थिक संसाधन में बदलने पर जोर

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के सदस्य सचिव तरुण कुमार पिथोड़े ने कहा कि धान की पराली को उपयोगी आर्थिक संसाधन में बदलना और उसका बेहतर प्रबंधन करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आयोग का प्रयास पंजाब और हरियाणा में ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिससे पराली जलाने की घटनाओं को रोका जा सके और फसल अवशेषों का उत्पादक उपयोग सुनिश्चित हो।

उन्होंने कहा कि फसल अवशेषों पर आधारित चक्रीय अर्थव्यवस्था विकसित करना इस पहल का मुख्य उद्देश्य है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय अर्जित करने के अवसर मिलेंगे और ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर प्रदूषण के दुष्प्रभावों को कम करने में भी मदद मिलेगी।

बैठक में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा, परिवहन आयुक्त प्रभजोत सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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