कुरुक्षेत्र, 27 अक्टूबर 2026 (संजीव शर्मा): जिला शिक्षा अधिकारी सुधीर कालड़ा ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय डीग और गवर्नमेंट मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल शाहबाद मारकंडा का औचक निरीक्षण कर शैक्षणिक गतिविधियों, विद्यार्थियों की सुविधाओं और विद्यालयों में संचालित विभिन्न योजनाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
डीईओ सुधीर कालड़ा ने इस दौरान दसवीं कक्षा में चल रही हिंदी की कक्षा का निरीक्षण किया। उन्होंने विद्यार्थियों को निर्देश दिया कि पढ़ाई में हेल्प बुक्स के बजाय निर्धारित पाठ्यक्रम और विषय की मूल अवधारणाओं पर ध्यान दें। शिक्षकों को भी प्रेरित किया कि वे बच्चों को प्रेम पूर्वक समझाते हुए, उनका आत्मविश्वास बढ़ाकर पढ़ाई के लिए प्रेरित करें। भय या दंड के बजाय सकारात्मक वातावरण में शिक्षा देना अधिक प्रभावी है। विद्यालय में पेयजल टंकी की सफाई व्यवस्था की जांच करते हुए उन्होंने संबंधित रजिस्टर भी देखा। उन्हें बताया गया कि टंकी की पिछली सफाई एक अक्टूबर को हुई थी और अगली सफाई नवंबर के पहले सप्ताह में करवाई जाएगी। निरीक्षण के दौरान कंडम कमरों के बारे में प्रधानाचार्य ने बताया कि इन कमरों को पीडब्ल्यूडी बीएंडआर द्वारा असुरक्षित घोषित किया जा चुका है तथा इनका रिजर्व प्राइस भी निर्धारित है। इनकी नीलामी के लिए मंगलवार को ही विद्यालय में प्रक्रिया निर्धारित की गई है, जिसके बाद स्थल को खाली कराया जाएगा। डीईओ ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
बुनियाद सेंटर में विद्यार्थियों ने बताया पढ़ाई का अनुभव
शाहबाद गवर्नमेंट मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल में डीईओ ने बुनियाद सेंटर के विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने पूछा कि सामान्य कक्षा में पढ़ाई और बुनियाद सेंटर में अध्ययन के अनुभव में क्या अंतर है। विद्यार्थियों ने बताया कि सेंटर में पढऩे से उनमें स्वाध्याय की आदत विकसित हुई है। अब वे विषयों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं और सीखी हुई बातें अधिक समय तक याद रहती हैं। उन्होंने एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी) कार्यक्रम के तहत प्राथमिक शिक्षकों के लिए चल रही छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का निरीक्षण किया। प्रशिक्षण के छठे दिन शिक्षकों ने बताया कि पीयर लर्निंग के माध्यम से उन्हें एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का अवसर मिला है। साथ ही, शिक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध करवाई गई शिक्षण किटों के प्रभावी उपयोग की जानकारी भी मिली है। डीईओ ने विद्यालय की जीव विज्ञान प्रयोगशाला में पीजीटी द्वारा विद्यार्थियों को वनस्पति विज्ञान के प्रायोगिक कार्य करवाते हुए भी देखा। उन्होंने मध्याह्न भोजन योजना के तहत तैयार मीठे दलिये को स्वयं चखकर उसकी गुणवत्ता का जायजा लिया और भोजन की गुणवत्ता को संतोषजनक पाया।

‘मिशन सफलता’ से असफलता को शून्य करने का लक्ष्य
दोनों विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान डीईओ ने प्रधानाचार्यों और शिक्षकों से प्रदेश के प्रधान सचिव स्कूल शिक्षा विजय सिंह दहिया की दूरदर्शी पहल ‘मिशन सफलता’ के बारे में भी चर्चा की। प्रधानाचार्यों ने बताया कि उन्हें शनिवार को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के माध्यम से इस कार्यक्रम की जानकारी मिली है। कार्यक्रम को समझने के बाद उनमें इसे विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करने को लेकर उत्साह है। उनका मानना है कि मिशन को सही तरीके से लागू करने से विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों में उल्लेखनीय सुधार होगा और असफलता की दर को शून्य के करीब लाया जा सकेगा। डीईओ ने कहा कि मिशन सफलता केवल विद्यार्थियों को परीक्षा में उत्तीर्ण करवाने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता को विकसित करने, उसकी शैक्षणिक कमजोरियों को दूर करने और बेहतर अंक प्राप्त करने में सहायता देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा सीखने की प्रक्रिया में पीछे न रह जाए। उन्होंने दोनों विद्यालयों के मुखियाओं एवं शिक्षकों से आह्वान किया कि वे मिशन सफलता को पूरी गंभीरता, प्रतिबद्धता और प्रभावी कार्ययोजना के साथ लागू करें, ताकि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और परीक्षा परिणामों में निरंतर सुधार सुनिश्चित हो सके।






