पर्थ (ऑस्ट्रेलिया), 29 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): विदेश में रह रही नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में ‘पंजाबी इम्तिहान 2026’ का आयोजन किया गया। पंजाबी सੱਥ की ओर से संगत के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रवासी बच्चों ने पंजाबी भाषा के प्रति अपनी रुचि और सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रदर्शन किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों में पंजाबी पढ़ने-लिखने की क्षमता विकसित करने के साथ-साथ उन्हें अपनी भाषाई और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखना है।
ऑनलाइन परीक्षा में बच्चों ने दिखाई भाषाई दक्षता
शिक्षक जगतार सिंह की देखरेख में ऑनलाइन आयोजित परीक्षा में बच्चों ने अपनी कक्षाओं के अनुरूप अक्षर-बोध, शब्द-बोध, वाक्य-बोध तथा पढ़ने-लिखने की क्षमता का प्रदर्शन किया। परीक्षा के माध्यम से पंजाबी भाषा की बुनियादी समझ और उसके व्यावहारिक ज्ञान को परखने का प्रयास किया गया। विदेश में पले-बढ़ रहे बच्चों के लिए इस तरह की गतिविधियां मातृभाषा के नियमित अभ्यास और सीखने की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने में सहायक हो सकती हैं।
कविता, वीर रस और लोक संस्कृति ने बांधा समां
कार्यक्रम की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में बच्चों ने पंजाबी साहित्य और लोक परंपराओं की झलक पेश की। इसकी शुरुआत जैज़वीर सिंह के शब्द-गायन से हुई। इसके बाद रीत कौर और सुखलीन कौर ने ‘राय बुलार दी पुकार’ शीर्षक से कविशरी प्रस्तुत की, जबकि ब्रहमनूर सिंह ने शहीदों को समर्पित वार सुनाई।
बच्चों की भंगड़ा और गिद्धा प्रस्तुतियों के साथ बोलियों तथा लोकगीतों ने कार्यक्रम में पंजाबी लोक संस्कृति के रंग भर दिए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों ने न केवल अपनी कला का प्रदर्शन किया, बल्कि पंजाबी सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति अपनी समझ और जुड़ाव भी व्यक्त किया।
अतिथियों ने बढ़ाया बच्चों का उत्साह
कार्यक्रम में विशेष अतिथि अशोक कुमार, मास्टर रूप सिंह और ज्ञानी अवतार सिंह लोपो ने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। मंच संचालन अमनदीप कौर ने किया। कार्यक्रम के समापन पर परीक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया।

डेढ़ दशक से पंजाबी भाषा और विरासत के संरक्षण के प्रयास
पंजाबी के संचालक हरलाल सिंह के अनुसार, संस्था पिछले लगभग 15 वर्षों से ऑस्ट्रेलिया में पंजाबी भाषा और विरासत की जड़ों को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। ‘पंजाबी इम्तिहान 2026’ इसी दिशा में एक प्रयास है, जिसमें भाषा की शिक्षा को सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ जोड़ा गया।
प्रवासी समुदायों के लिए मातृभाषा का संरक्षण केवल बोलचाल तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें पढ़ने-लिखने, साहित्य को समझने और लोक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की भूमिका भी अहम होती है। पर्थ में आयोजित यह कार्यक्रम इसी सोच को आगे बढ़ाने का एक उदाहरण रहा।






