संगरूर, 31 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की उच्चस्तरीय टीम, जिसमें तकनीकी सदस्य डॉ. एस. डी. अत्री और वैज्ञानिक-सी श्री विजय कुमार शामिल थे, ने 30 अक्टूबर, 2026 को संगरूर जिले का दौरा किया। इसके बाद टीम ने 31 अक्टूबर, 2026 को जिला प्रशासनिक परिसर, संगरूर में समीक्षा बैठक की। बैठक का उद्देश्य धान की कटाई के मौजूदा सीजन के दौरान पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन और इसे जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए संगरूर, पटियाला और मालेरकोटला के जिला प्रशासनों की तैयारियों एवं प्रयासों का जायजा लेना था।
30 अक्टूबर को अपने दौरे के दौरान आयोग की टीम ने संगरूर जिले के विभिन्न स्थानों का निरीक्षण कर खेतों में और खेतों से बाहर पराली प्रबंधन संबंधी उपायों के क्रियान्वयन की स्थिति का जायजा लिया। टीम ने पराली जलाने की घटनाओं की दृष्टि से संवेदनशील गांव घराचों का दौरा किया, जहां पराली प्रबंधन की व्यवस्थाओं और फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के उपयोग की समीक्षा की गई। टीम ने किसानों से बातचीत कर उन्हें आ रही कठिनाइयों की जानकारी ली और पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में उनकी सक्रिय भागीदारी के महत्व पर जोर दिया। जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने टीम को पराली के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए किसानों को समय पर मशीनरी उपलब्ध कराने हेतु की गई व्यवस्थाओं से अवगत कराया।
इसके अलावा, टीम ने भवानीगढ़ के गांव नदामपुर स्थित मैसर्स ट्रांसपैसिफिक इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड के पराली से ईंधन की गोलियां तैयार करने वाले संयंत्र का दौरा किया। टीम ने संयंत्र का निरीक्षण कर पराली से जैव ईंधन की गोलियां तैयार करने की प्रक्रिया की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि इन गोलियों का उपयोग ताप विद्युत संयंत्रों और उद्योगों में वैकल्पिक ईंधन के रूप में किया जाता है। इससे खेतों से बाहर पराली प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण विकल्प उपलब्ध होता है और पराली को बेकार समझने के बजाय उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने को बढ़ावा मिलता है।
क्षेत्रीय दौरे के दौरान संगरूर जिले की भवानीगढ़ तहसील के गांव बसीअरक, कपियाल और झनेड़ी में तीन स्थानों पर आग जलती हुई पाई गई। स्थानीय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आग बुझाई। इसके अतिरिक्त, लागू नियमों के अनुसार पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने, प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने और राजस्व रिकॉर्ड में लाल प्रविष्टियां करने जैसी प्रवर्तन कार्रवाइयां भी की गईं।
31 अक्टूबर को आयोग की टीम ने जिला प्रशासनिक परिसर, संगरूर में संगरूर, पटियाला और मालेरकोटला के उपायुक्तों एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कृषि विभाग के अधिकारियों तथा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उड़नदस्तों के सदस्यों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में जिला प्रशासनों की तैयारियों, पराली प्रबंधन मशीनरी की उपलब्धता एवं उपयोग, पराली के संग्रहण, भंडारण एवं रखरखाव की व्यवस्थाओं, क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी, नियमों के प्रवर्तन तथा पराली जलाने की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोकने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में संगरूर की उपायुक्त श्रीमती पूनमदीप कौर, पटियाला के उपायुक्त डॉ. हिमांशु अग्रवाल और मालेरकोटला के उपायुक्त श्री विराज श्यामकर्ण तिड़के सहित संबंधित जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ पर्यावरण अभियंता डॉ. राजीव गुप्ता तथा कार्यकारी अभियंता रोहित सिंगला और रणतेज शर्मा ने भी बैठक में भाग लिया।

विचार-विमर्श के दौरान आयोग के प्रतिनिधियों ने पराली जलाने की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए जिला प्रशासनों और संबंधित विभागों द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने जिला अधिकारियों द्वारा अपनाई गई समन्वित कार्यप्रणाली की सराहना की। साथ ही, क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी को और मजबूत करने, नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने, विभागों के बीच तालमेल बढ़ाने तथा किसानों को अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों में तेजी लाने पर जोर दिया।
आयोग की टीम ने कहा कि पराली का वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित करने और इन जिलों में पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सभी संबंधित विभागों के निरंतर प्रयासों के साथ-साथ किसानों की सक्रिय भागीदारी भी अत्यंत आवश्यक है।
संगरूर में समीक्षा बैठक संपन्न होने के बाद आयोग की टीम पराली प्रबंधन संबंधी जमीनी स्तर की व्यवस्थाओं और प्रयासों का और अधिक जायजा लेने के लिए मालेरकोटला जिले के क्षेत्रीय दौरे पर रवाना हुई।






