Wednesday, November 4, 2026
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12 दिसंबर को नेशनल लोक अदालत; लोगों से अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील

संगरूर, 02 नवंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति दीपक सिब्बल, न्यायाधीश पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय चंडीगढ़ के निर्देशों के अनुसार, श्री मुनीश संगल, जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, संगरूर के दिशा-निर्देशों के तहत तथा श्री आशीष ठठई, सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/सी.जे.एम-सह-सचिव, जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, संगरूर के नेतृत्व में 12 दिसंबर 2026 (दिसंबर महीने का दूसरा शनिवार) को जिला कोर्ट कॉम्प्लेक्स संगरूर तथा उप-मंडल कोर्ट कॉम्प्लेक्स धूरी, सुनाम और मूनक में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है।

यह जानकारी श्री आशीष ठठई, सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/सी.जे.एम-सह-सचिव, जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, संगरूर ने दी। उन्होंने बताया कि इस लोक अदालत में अदालतों में लंबित मामलों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन (अदालत में दायर होने से पहले के) मामलों का भी आपसी सहमति से निपटारा किया जाएगा। इनमें मुख्य रूप से चेक बाउंस के मामले (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138), बैंक रिकवरी के मामले, मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले, वैवाहिक विवाद (तलाक को छोड़कर), श्रम एवं श्रम संबंधी विवाद, बिजली और पानी के बिलों से संबंधित मामले, राजस्व और भूमि विवाद, दीवानी मामले, समझौते योग्य आपराधिक मामले तथा ट्रैफिक चालान शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से मामलों का निपटारा कराने के कई लाभ हैं; मामले का फैसला उसी दिन हो जाता है, जिससे समय और पैसे की बचत होती है। लोक अदालत में कोई कोर्ट फीस नहीं लगती, और अदालत में पहले जमा कराई गई कोर्ट फीस कानून के अनुसार वापस मिल जाती है। लोक अदालत का फैसला अंतिम होता है और दोनों पक्षों को मान्य होता है। इसके खिलाफ कोई अपील नहीं होती। आपसी सहमति से फैसला होने के कारण पक्षों के बीच आपसी भाईचारा और सद्भाव बना रहता है। उन्होंने जिला संगरूर के समस्त निवासियों, वकीलों, बैंकों, बीमा कंपनियों और विभागों से अपील की कि वे अपने मामलों का निपटारा कराने के लिए इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

अधिक जानकारी के लिए जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, संगरूर के कार्यालय ‘समझौता सदन’ (न्यायिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स के पास, संगरूर) से संपर्क किया जा सकता है, या टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 पर कॉल की जा सकती है।

उन्होंने यह भी बताया कि 21 नवंबर 2026 को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत एक स्पेशल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। 21 नवंबर 2026 को लगने वाली इस स्पेशल लोक अदालत में धारा 138 के तहत चेक बाउंस के अदालतों में लंबित मामलों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन मामलों का भी आपसी सहमति से निपटारा किया जाएगा। इस संबंध में अधिक से अधिक मामलों के निपटारे के लिए लोक अदालत से पहले ‘प्री-लोक अदालत’ बैठकों का भी आयोजन किया जा रहा है, जहां दोनों पक्षों को बुलाकर समझौते के लिए प्रेरित किया जाता है। उन्होंने बैंकों, वित्तीय संस्थानों, व्यापारियों, वकीलों और आम जनता से अपील की कि जिनके चेक बाउंस संबंधी मामले चल रहे हैं या जो ऐसे मामलों को अदालत में ले जाने से पहले ही सुलझाना चाहते हैं, वे इस अवसर का लाभ अवश्य उठाएं।

संगरूर, 02 नवंबर: पंजाब राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति दीपक सिब्बल, न्यायाधीश पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय चंडीगढ़ के निर्देशों के अनुसार, श्री मुनीश संगल, जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, संगरूर के दिशा-निर्देशों के तहत तथा श्री आशीष ठठई, सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/सी.जे.एम-सह-सचिव, जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, संगरूर के नेतृत्व में 12 दिसंबर 2026 (दिसंबर महीने का दूसरा शनिवार) को जिला कोर्ट कॉम्प्लेक्स संगरूर तथा उप-मंडल कोर्ट कॉम्प्लेक्स धूरी, सुनाम और मूनक में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है।

यह जानकारी श्री आशीष ठठई, सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/सी.जे.एम-सह-सचिव, जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, संगरूर ने दी। उन्होंने बताया कि इस लोक अदालत में अदालतों में लंबित मामलों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन (अदालत में दायर होने से पहले के) मामलों का भी आपसी सहमति से निपटारा किया जाएगा। इनमें मुख्य रूप से चेक बाउंस के मामले (नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138), बैंक रिकवरी के मामले, मोटर दुर्घटना मुआवजा मामले, वैवाहिक विवाद (तलाक को छोड़कर), श्रम एवं श्रम संबंधी विवाद, बिजली और पानी के बिलों से संबंधित मामले, राजस्व और भूमि विवाद, दीवानी मामले, समझौते योग्य आपराधिक मामले तथा ट्रैफिक चालान शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से मामलों का निपटारा कराने के कई लाभ हैं; मामले का फैसला उसी दिन हो जाता है, जिससे समय और पैसे की बचत होती है। लोक अदालत में कोई कोर्ट फीस नहीं लगती, और अदालत में पहले जमा कराई गई कोर्ट फीस कानून के अनुसार वापस मिल जाती है। लोक अदालत का फैसला अंतिम होता है और दोनों पक्षों को मान्य होता है। इसके खिलाफ कोई अपील नहीं होती। आपसी सहमति से फैसला होने के कारण पक्षों के बीच आपसी भाईचारा और सद्भाव बना रहता है। उन्होंने जिला संगरूर के समस्त निवासियों, वकीलों, बैंकों, बीमा कंपनियों और विभागों से अपील की कि वे अपने मामलों का निपटारा कराने के लिए इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

अधिक जानकारी के लिए जिला कानूनी सेवाएं प्राधिकरण, संगरूर के कार्यालय ‘समझौता सदन’ (न्यायिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स के पास, संगरूर) से संपर्क किया जा सकता है, या टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 पर कॉल की जा सकती है।

उन्होंने यह भी बताया कि 21 नवंबर 2026 को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत एक स्पेशल लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। 21 नवंबर 2026 को लगने वाली इस स्पेशल लोक अदालत में धारा 138 के तहत चेक बाउंस के अदालतों में लंबित मामलों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन मामलों का भी आपसी सहमति से निपटारा किया जाएगा। इस संबंध में अधिक से अधिक मामलों के निपटारे के लिए लोक अदालत से पहले ‘प्री-लोक अदालत’ बैठकों का भी आयोजन किया जा रहा है, जहां दोनों पक्षों को बुलाकर समझौते के लिए प्रेरित किया जाता है। उन्होंने बैंकों, वित्तीय संस्थानों, व्यापारियों, वकीलों और आम जनता से अपील की कि जिनके चेक बाउंस संबंधी मामले चल रहे हैं या जो ऐसे मामलों को अदालत में ले जाने से पहले ही सुलझाना चाहते हैं, वे इस अवसर का लाभ अवश्य उठाएं।

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