Thursday, August 27, 2026
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अलका याज्ञनिक की बीमारी ने बढ़ाई चिंता, जानिए क्या है सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस और इसके लक्षण

अलका याज्ञनिक की सेहत चर्चा में, विशेषज्ञों ने बताया सुनने की इस बीमारी का सच
नई दिल्ली, 26 जून 2026 : पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान राष्ट्रपति भवन में प्रसिद्ध पार्श्व गायिका अलका याज्ञनिक को व्हीलचेयर पर देखकर उनके प्रशंसकों की चिंता बढ़ गई। कभी अपनी मधुर आवाज से बॉलीवुड पर राज करने वाली गायिका का कमजोर स्वास्थ्य देखकर लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा कि आखिर उन्हें कौन-सी बीमारी है और क्या इसका इलाज संभव है।
अलका याज्ञनिक वर्ष 2024 में सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस (Sensorineural Hearing Loss-SNHL) से पीड़ित होने की जानकारी दे चुकी हैं। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें कान के भीतरी हिस्से (इनर ईयर) के कोक्लिया में मौजूद सूक्ष्म हेयर सेल या श्रवण तंत्रिका (ऑडिटरी नर्व) क्षतिग्रस्त हो जाती है। यही तंत्रिका ध्वनि को मस्तिष्क तक पहुंचाने का कार्य करती है। विशेषज्ञों के अनुसार एक बार इन कोशिकाओं या नसों को गंभीर नुकसान पहुंचने पर सामान्य रूप से सुनने की क्षमता का पूरी तरह वापस आना कठिन माना जाता है।
यह समस्या एक या दोनों कानों में हो सकती है। कुछ लोगों में सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती है, जबकि कुछ मामलों में यह अचानक भी हो सकती है।
चिकित्सकों के अनुसार इस बीमारी के सामान्य लक्षणों में बातचीत समझने में कठिनाई होना, लोगों से बार-बार बात दोहराने के लिए कहना, टीवी या मोबाइल की आवाज अधिक रखकर सुनना, ऊंची आवृत्ति वाली आवाजें स्पष्ट न सुन पाना, लोगों की आवाज अस्पष्ट महसूस होना, कानों में लगातार सीटी या भनभनाहट (टिनिटस) सुनाई देना तथा लंबे समय तक बातचीत सुनने के बाद मानसिक थकान या तनाव महसूस होना शामिल है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती उम्र, लंबे समय तक तेज आवाज वाले वातावरण में काम करना, हेडफोन का अत्यधिक तेज आवाज में उपयोग, पारिवारिक इतिहास, वायरल संक्रमण, कान में संक्रमण, सिर या कान पर चोट, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, ऑटोइम्यून रोग, कुछ एंटीबायोटिक या कीमोथेरेपी की दवाओं के दुष्प्रभाव तथा धूम्रपान जैसी आदतें इस बीमारी का जोखिम बढ़ा सकती हैं।
चिकित्सकों के अनुसार सुनने की क्षमता प्रभावित होने पर मरीजों को हियरिंग एड या गंभीर मामलों में कोक्लियर इम्प्लांट की सहायता दी जा सकती है। यदि बीमारी अचानक हुई हो और समय रहते उपचार शुरू कर दिया जाए तो कुछ मामलों में सुनने की क्षमता आंशिक या पूरी तरह लौट सकती है। इसके अलावा स्पीच थेरेपी और ऑडिटरी रिहैबिलिटेशन भी मरीजों को नई परिस्थितियों के अनुरूप ढलने में मदद करते हैं।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लंबे समय तक तेज शोर से बचें, हेडफोन का उपयोग मध्यम आवाज में करें, कान में संक्रमण या सुनने में परेशानी होने पर तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से संपर्क करें, मधुमेह और उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखें तथा धूम्रपान से दूरी बनाएं।
हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि इस बीमारी में पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना प्रत्येक मरीज में अलग-अलग होती है। कुछ लोगों में उपचार से सुधार हो जाता है, जबकि कुछ मामलों में सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित रह सकती है।
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