हिमाचल प्रदेश, 7 जुलाई (दीपक दत्ता): दिहाड़ीदार मजदूरों की दो बेटियों ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की दसवीं कक्षा की परीक्षाओं 2026 में 97.6 प्रतिशत अंक हासिल करके सफलता की एक मिसाल पेश की है। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर सही अवसर मिलें, तो आर्थिक तंगी अकादमिक उत्कृष्टता की राह में रोड़ा नहीं बन सकती।
अकाल एकेडमी खमाणों खुर्द की छात्रा प्रभलीन कौर और अकाल एकेडमी सवद्दी कलां की हरलीन कौर ने अलग-अलग स्कूलों व अलग-अलग शिक्षकों से पढ़ने और अलग-अलग परीक्षा केंद्रों में बैठने के बावजूद बिल्कुल एक समान (97.6%) अंक प्राप्त किए हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से संबंध रखने वाली ये दोनों लड़कियां दिहाड़ीदार मजदूरों की बेटियां हैं। उनके पिता, निर्मल सिंह और गुरप्रीत सिंह, दिहाड़ी मजदूरी करके आजीविका कमाते हैं, जिनकी कोई पक्की आमदन या रोजगार की गारंटी नहीं है। घर का गुजारा मुश्किल से चलाने वाले अन्य परिवारों की तरह, इन बेटियों को पढ़ाना भी एक असंभव सपना बन सकता था।
हालांकि, इन लड़कियों ने ‘द कलगीधर सोसाइटी’ के ‘एजुकेट टू सेव’ (Educate to Save) अभियान के तहत अपनी पढ़ाई जारी रखी। इस अभियान के अधीन उनके स्कूल की फीस, किताबों और हॉस्टल का खर्च उन दानवीरों द्वारा उठाया गया था, जो यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि कोई भी होनहार बच्चा गरीबी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।
उनकी यह शानदार उपलब्धि जरूरतमंद बच्चों के लिए शैक्षणिक सहायता के बदलावकारी प्रभाव को दर्शाती है।
‘द कलगीधर सोसाइटी’ के अनुसार, इस समय उनकी संस्थाओं में 9,000 से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं। इनमें से 2,261 छात्र मजदूर परिवारों से संबंधित हैं, जिन्हें मुफ्त या रियायती दरों पर शिक्षा दी जा रही है। इस वर्ष ऐसे पृष्ठभूमि वाले 50 से अधिक छात्र दसवीं और बारहवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में बैठे थे, जिनमें से 10 छात्रों ने 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं। इनमें से प्रभलीन कौर और हरलीन कौर 97.6 प्रतिशत अंकों के साथ सबसे आगे रहीं।
सोसाइटी ने कहा कि इन दोनों छात्राओं की सफलता ‘एजुकेट टू सेव’ अभियान के उद्देश्य को सार्थक करती है—जो यह सुनिश्चित करना है कि किसी बच्चे का भविष्य उसकी आर्थिक स्थिति के बजाय उसकी प्रतिभा और कड़ी मेहनत से तय हो।






