28 जुलाई,2026(अमनदीप सरां): हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में सोमवार देर रात हुई तेज बारिश ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई। लगातार बारिश के कारण फ्लैश रनऑफ और भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं, जिससे रिहायशी क्षेत्रों में मलबा भर गया और लोगों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया। राष्ट्रीय राजमार्ग भी मलबा आने से कुछ समय के लिए बाधित हो गया। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बहाली का कार्य शुरू कर दिया है।
बारिश का सबसे अधिक असर सुल्तानपुर वार्ड, सरोल, परेल और तडोहली पंचायत क्षेत्रों में देखने को मिला। मंगलवार सुबह जब लोग घरों से बाहर निकले तो सड़कों, बाजारों और घरों के आसपास कीचड़, पत्थर और मलबा फैला हुआ था। कई मकानों और दुकानों में पानी घुसने से घरेलू सामान और व्यापारिक सामग्री को नुकसान पहुंचा। ओबड़ी क्षेत्र में देर रात पहाड़ी का एक हिस्सा खिसकने से भारी चट्टानें एक मकान पर आ गिरीं। राहत की बात यह रही कि परिवार के सदस्य समय रहते घर से बाहर निकल गए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। हालांकि इस घटना के बाद इलाके में भय का माहौल बन गया। सरोल और घोलटी क्षेत्रों में मलबे के नीचे कई वाहन दब गए, जबकि अनेक घरों में कीचड़ भरने से लोगों को काफी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन किया और पीड़ित परिवारों के लिए शीघ्र राहत एवं मुआवजे की मांग की।
तेज बारिश का असर सुल्तानपुर स्थित सरकारी डिग्री कॉलेज और आसपास के बाजारों पर भी पड़ा। कॉलेज परिसर और कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पानी भर गया। स्थानीय लोग पूरी रात घरों और दुकानों से कीचड़ व मलबा हटाने में लगे रहे। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मानसून से पहले प्रशासन को क्षेत्र की संवेदनशीलता के बारे में जानकारी दी गई थी, लेकिन समय रहते पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। उनका आरोप है कि इसी लापरवाही के कारण इस बार नुकसान का दायरा बढ़ गया। जिला प्रशासन ने संबंधित विभागों को युद्धस्तर पर राहत कार्य करने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित क्षेत्रों से मलबा हटाने, बंद सड़कों को खोलने, जल निकासी व्यवस्था बहाल करने और प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने का कार्य लगातार जारी है। साथ ही नुकसान का विस्तृत सर्वे भी किया जा रहा है।






