9अगस्त,2026 (विशाल गुप्ता): भारत के युवाओं में शरीर को लेकर बढ़ती चिंता अब केवल मोटापे तक सीमित नहीं रह गई है। कम वजन वाले युवा भी अपने शरीर और व्यक्तित्व को लेकर मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं। दूसरों से तुलना, सामाजिक टिप्पणियां और आकर्षक शरीर को लेकर बढ़ती अपेक्षाएं युवाओं के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही हैं।शोधकर्ताओं के अध्ययन में 18 से 30 वर्ष की उम्र के 1,071 युवाओं को शामिल किया गया। शोध में पाया गया कि मोटापे से ग्रस्त करीब 49.6 प्रतिशत और कम वजन वाले लगभग 47.1 प्रतिशत युवाओं में मध्यम से गंभीर स्तर की बॉडी इमेज संबंधी चिंता मौजूद थी।
शोध के मुताबिक, शरीर के वजन की स्थिति के अनुसार मानसिक परेशानी के स्वरूप में भी अंतर देखा गया। मोटापे से जूझ रहे युवाओं में अपने रूप-रंग को लेकर आत्म-जागरूकता और आत्मविश्वास की कमी अधिक दिखाई दी। वहीं, कम वजन वाले युवाओं में चिंता, अकेलापन और शर्मिंदगी जैसे भाव अपेक्षाकृत ज्यादा सामने आए। शोधकर्ताओं का कहना है कि बॉडी इमेज से जुड़ी समस्या को केवल मोटापे से जोड़कर देखना सही नहीं है। कम वजन वाले युवाओं को भी अपने शरीर को लेकर सामाजिक दबाव और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। डिजिटल मीडिया और लगातार होने वाली सामाजिक तुलना इस समस्या को और बढ़ा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वजन प्रबंधन को सिर्फ शरीर के वजन या कैलोरी तक सीमित रखने के बजाय मानसिक स्वास्थ्य को भी इसका अहम हिस्सा माना जाना चाहिए। यदि युवा अपने शरीर को लेकर लगातार तनाव में रहते हैं, तो इसका असर उनकी सामाजिक जिंदगी, आत्मविश्वास और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की क्षमता पर पड़ सकता है। अध्ययन के निष्कर्षों के आधार पर शोधकर्ताओं ने व्यक्तिगत स्तर पर देखभाल, पोषण संबंधी सलाह के साथ मानसिक स्वास्थ्य सहायता और बॉडी इमेज को लेकर संवेदनशील काउंसलिंग की जरूरत पर जोर दिया है। खास तौर पर स्कूलों और कॉलेजों जैसे संस्थानों में युवाओं को शरीर को लेकर स्वस्थ सोच विकसित करने के लिए जागरूक करना उपयोगी हो सकता है।






