पटियाला,13अगस्त,2026 (विशाल गुप्ता): पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला: फीस वृद्धि विरोधी फ्रंट द्वारा विश्वविद्यालय में फीसों में की गई बढ़ोतरी और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर वी.सी कार्यालय के बाहर स्थायी धरना शुरू किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कैबिनेट मंत्री बलबीर सिंह को घेरकर सवाल किए। छात्रों ने मंत्री से पूछा कि पंजाब सरकार द्वारा विश्वविद्यालय का 150 करोड़ रुपये का कर्ज माफ करने का वादा अभी तक पूरा क्यों नहीं किया गया और वादे के अनुसार हर साल विश्वविद्यालय की ग्रांट में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी क्यों नहीं की गई। फ्रंट ने मांग की है कि हॉस्टलों और पाठ्यक्रमों की बढ़ाई गई फीस तुरंत वापस ली जाए और विश्वविद्यालय की बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया जाए।

आज प्रदर्शन के पहले दिन पीएसयू की ओर से वक्षिश गर्ग, एसएफआई की ओर से रमणदीप सिंह, पीएसएफ की ओर से गगन, एआईएसएफ से राहुल, पीएसयू (ल) की ओर से हरप्रीत सिंह, डीएसओ से पारस, अग्रगामी से विकास अदम और पीआरएसयू से केशव ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने बातचीत करते हुए कहा कि पंजाबी यूनिवर्सिटी द्वारा छात्रों की हॉस्टल और विभागीय फीस में भारी बढ़ोतरी की गई है। हॉस्टल फीस में लगभग 30 से 42 प्रतिशत तक वृद्धि की गई है, जबकि विभागीय फीस में 10 प्रतिशत से लेकर 657 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। उदाहरण के तौर पर फिल्म मेकिंग विभाग की फीस 16 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 लाख 22 हजार रुपये कर दी गई है। एम.बी.ए (इंटरनेशनल बिजनेस) की फीस 2 लाख 63 हजार रुपये से बढ़ाकर 2 लाख 90 हजार रुपये कर दी गई है। एम.पी.टी. की फीस 1 लाख 48 हजार रुपये और बीटेक की फीस 1 लाख 29 हजार रुपये कर दी गई है। छात्र संगठन इसके खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा कोई वस्तु नहीं है जिसे खरीदा और बेचा जाए। शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है और शिक्षा हर व्यक्ति की पहुंच में होनी चाहिए।
विश्वविद्यालय का इस वर्ष का कुल बजट 732 करोड़ रुपये है, जिसमें 397 करोड़ रुपये सरकार की ग्रांट है और लगभग 240 करोड़ रुपये छात्रों की फीस से एकत्र होते हैं। इसके साथ ही पंजाबी यूनिवर्सिटी पर 150 करोड़ रुपये का कर्ज भी है, जिस पर विश्वविद्यालय हर साल 14 करोड़ रुपये ब्याज देता है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी यह कर्ज अभी तक माफ नहीं हुआ है।
फ्रंट के वक्ताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन विश्वविद्यालय को डुबोने वाली दिशा में आगे बढ़ रहा है। छात्रों द्वारा बार-बार मांग-पत्र देने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। इसलिए जब तक फ्रंट की मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक वीसी कार्यालय के बाहर स्थायी धरना जारी रहेगा।






