चंडीगढ़, 10 सितंबर, 2026 (राजेश कुमार): पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने पैंपसू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन में निजी आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से तैनात कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति से जुड़ी याचिकाओं पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल लंबे समय तक सेवा करने के आधार पर आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता।
जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस मिंदरजीत यादव की खंडपीठ ने पी.आर.टी.सी. की ओर से दायर चार अपीलों को स्वीकार करते हुए एकल पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें संबंधित कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने के निर्देश दिए गए थे।
खंडपीठ ने कहा कि इन कर्मचारियों की भर्ती पी.आर.टी.सी. ने सीधे तौर पर नहीं की थी। उनके लिए विज्ञापन निजी आउटसोर्सिंग एजेंसी द्वारा जारी किए गए और नियुक्ति पत्र भी उसी एजेंसी ने जारी किए थे। ऐसे में कर्मचारियों और पी.आर.टी.सी. के बीच सीधे नियोक्ता-कर्मचारी संबंध स्थापित नहीं होता।
अदालत ने कहा कि किसी संस्थान के साथ नियोक्ता और कर्मचारी का संबंध साबित करने के लिए नियुक्ति पत्र जैसे दस्तावेज महत्वपूर्ण होते हैं। मौजूदा मामले में पी.आर.टी.सी. की ओर से इन कर्मचारियों को कोई नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया था।
हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पी.आर.टी.सी. के साथ सीधे अनुबंध के आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों की तुलना आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए तैनात कर्मचारियों से नहीं की जा सकती। आउटसोर्स कर्मचारियों ने पी.आर.टी.सी. में सेवाएं तो दीं, लेकिन वे कॉरपोरेशन के प्रत्यक्ष कर्मचारी नहीं थे।
इन्हीं तथ्यों और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने एकल पीठ के पूर्व आदेश को निरस्त कर दिया और संबंधित रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया।






