संगरूर, 11 सितंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पी.ए.यू.), लुधियाना के निदेशक प्रसार शिक्षा के मार्गदर्शन में पी.ए.यू.-फार्म सलाहकार सेवा केंद्र (एफ.ए.एस.सी.), संगरूर द्वारा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सहयोग से गांव फतेहगढ़ पंजगराइयां में पराली के खेत में ही प्रबंधन (इन-सीटू क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट) को लेकर ब्लॉक स्तरीय किसान जागरूकता कैंप आयोजित किया गया। इस कैंप में आसपास के गांवों टिब्बा और बदेशा के किसानों ने भी भाग लिया।
किसानों को संबोधित करते हुए पी.ए.यू.-एफ.ए.एस.सी., संगरूर के वरिष्ठ प्रसार वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार गर्ग ने किसानों से धान की पराली को जलाने की प्रथा पूरी तरह छोड़ने और पर्यावरण अनुकूल पराली प्रबंधन के तरीकों को अपनाने की अपील की। उन्होंने बताया कि पराली का खेत में ही प्रबंधन करने से मिट्टी में पोषक तत्वों और जैविक पदार्थ का संरक्षण होता है, मिट्टी की सेहत में सुधार आता है, वायु प्रदूषण कम होता है और लंबे समय तक मिट्टी की उत्पादकता बनाए रखने में मदद मिलती है।
डॉ. गर्ग ने खादों के प्रयोग से पहले मिट्टी की जांच करवाने के महत्व पर जोर दिया, ताकि मिट्टी और फसल की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार पोषक तत्वों का इस्तेमाल किया जा सके। उन्होंने किसानों को खादों के विवेकपूर्ण उपयोग और टिकाऊ कृषि के लिए एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आई. एन.एम.) अपनाने की सलाह दी।
इस अवसर पर किसानों को रबी फसलों में अनुशंसित जैव उर्वरकों के प्रयोग और उनके लाभों के बारे में जानकारी दी गई। इसके अलावा पंजाब की परिस्थितियों के लिए पी.ए.यू. द्वारा अनुशंसित गेहूं और अन्य रबी फसलों की उपयुक्त किस्मों के बारे में भी किसानों को जागरूक किया गया। डॉ. गर्ग ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाले अनुशंसित बीजों का उपयोग और संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाकर अधिक उत्पादन तथा बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है।
डॉ. हरप्रीत सिंह, कृषि विकास अधिकारी (ए.डी.ओ.), धूरी ने किसानों को कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने खेत में ही पराली प्रबंधन के लाभों के बारे में भी विस्तार से बताया और किसानों को इन तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

डॉ. गर्ग ने किसानों को अपने घरों में घरेलू बगीचा स्थापित करने और उसकी देखभाल के लिए भी प्रोत्साहित किया, ताकि परिवार के लिए ताजी, पौष्टिक और सुरक्षित सब्जियां पैदा की जा सकें। उन्होंने किसानों से पी.ए.यू. किसान मेलों में अधिक से अधिक भाग लेने की अपील की, ताकि वे कृषि की नई तकनीकों, अनुशंसित किस्मों, कृषि मशीनरी, प्रकाशनों और विशेषज्ञों की सलाह का लाभ उठा सकें।
श्री हरमिंदर सिंह, कृषि उप-निरीक्षक (ए.एस.आई.) ने कैंप के सफल आयोजन के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने में सहयोग दिया।
कैंप के दौरान किसानों को पराली प्रबंधन, मिट्टी की सेहत, संतुलित खादों के उपयोग, जैव उर्वरकों तथा आगामी रबी सीजन की फसलों से संबंधित आवश्यक जानकारी और विशेषज्ञों से सलाह लेने का अवसर मिला।






