अमृतसर/नई दिल्ली, 11 सितंबर 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): 1984 के सिख विरोधी नरसंहार से जुड़े मामले में दोषी ठहराए गए सज्जन कुमार की मृत्यु के बाद उनके निवास स्थान पर जाने को लेकर दक्षिणी दिल्ली से भाजपा के लोकसभा सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज से माफी मांगी है।
जत्थेदार को लिखे पत्र में बिधूड़ी ने कहा कि वह सज्जन कुमार के परिवार के साथ शोक साझा करने के लिए उनके घर गए थे, लेकिन अब वह अपने इस फैसले को अपनी गलती मानते हैं। उन्होंने जत्थेदार साहिब से अपनी इस भूल के लिए उन्हें माफ करने की अपील की है।
बिधूड़ी ने अपने पत्र में अपने पुराने रुख का हवाला देते हुए कहा कि वह 1984 के सिख नरसंहार के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के हमेशा समर्थक रहे हैं। उनके अनुसार, वह 1993 में उस प्रतिनिधिमंडल का भी हिस्सा रहे थे, जिसने तत्कालीन राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर सज्जन कुमार और एच.के.एल. भगत के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
बिधूड़ी ने अपने पत्र में अपने लोकसभा क्षेत्र के विभिन्न गुरुद्वारा साहिबों से जुड़ी अपनी सेवाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह सिख समुदाय की भावनाओं और 1984 के दर्द से परिचित हैं।
यह मामला उस समय सामने आया जब सज्जन कुमार की मृत्यु के बाद उनके निवास स्थान पर तीन भाजपा सांसदों—रामवीर सिंह बिधूड़ी, योगेंद्र चंदोलिया और कमलजीत सहरावत—के जाने को लेकर सिख समुदाय के कुछ वर्गों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। इसके बाद भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने तीनों सांसदों को फटकार भी लगाई थी।
सज्जन कुमार 1984 के दिल्ली सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई का सामना करते रहे। दिल्ली कैंट से संबंधित एक मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इसी कानूनी और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण उनकी मृत्यु के बाद उनके आवास पर किसी राजनीतिक नेता की मौजूदगी को लेकर सिख समुदाय में विशेष संवेदनशीलता देखी गई।
बिधूड़ी की ओर से जत्थेदार से माफी मांगने को इस विवाद के बाद अपने रुख की सफाई देने और सिख समुदाय की भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता जताने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से बिधूड़ी के पत्र और उनकी माफी की अपील पर क्या प्रतिक्रिया दी जाती है।






