Wednesday, September 30, 2026
HomeHaryanaयुवाओं के ज्ञान और शोध से मजबूत बनेगा हरियाणा – मुख्यमंत्री श्री...

युवाओं के ज्ञान और शोध से मजबूत बनेगा हरियाणा – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी

पंचकूला, 12 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसी भी देश और प्रदेश की ताकत उसकी बड़ी-बड़ी इमारतों और भवनों से नहीं, बल्कि उसके युवाओं के ज्ञान, शोध और नवाचार से होती है। उन्होंने शोधकर्ताओं से अपील की कि वे प्रदेश के विकास और समाजहित से जुड़े विषयों पर गहन शोध करें तथा नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल करते हुए शोध और नवाचार को बढ़ावा दें।

मुख्यमंत्री आज पंचकूला के सेक्टर-3 स्थित स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान में उच्च शिक्षा संस्थानों के शोधकर्ताओं के साथ आयोजित संवाद कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा भी मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 के बजट में ‘हरियाणा विजन-2047’ को धरातल पर उतारने के लिए ‘हरियाणा राज्य शोध फंड’ के लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत 90 शोध परियोजनाओं के लिए कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और निजी विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपने-अपने प्रोजेक्ट पर चर्चा की। हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद द्वारा इन शोधकर्ताओं को 11.25 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शोध का विषय केवल शोध पत्र प्रकाशित करने और किताबें लिखने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य समाज और लोगों के जीवन को आसान बनाना होना चाहिए। ज्ञान और शोध में इतनी शक्ति है कि इनके माध्यम से समाज की ज्वलंत समस्याओं का समाधान कर लोगों को लाभ पहुंचाया जा सकता है। आज जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और कृषि उत्पादन जैसी गंभीर समस्याएं हमारे सामने चुनौती बनी हुई हैं। शोधकर्ता इन विषयों पर शोध करके इनके समाधान में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि पानी एक प्राकृतिक संसाधन है और इसका निर्माण नहीं किया जा सकता। पानी बचेगा, तभी कल जीवन बचेगा। इसलिए इस विषय पर हमें अधिक से अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। बढ़ते औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण पानी की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। उद्योगों को भी पानी की जरूरत है, जबकि भूजल स्तर लगातार गिर रहा है और उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है। शोध के माध्यम से यह पता लगाया जाना चाहिए कि भूजल स्तर को कैसे सुधारा जाए और पानी की गुणवत्ता को किस प्रकार बेहतर बनाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति के लिए कोई भी समस्या बड़ी नहीं होती, हर समस्या का समाधान संभव है। शोधकर्ता अपने ज्ञान और प्रतिभा के माध्यम से लोगों के जीवन को आसान बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। हमारा लक्ष्य हरियाणा को शोध, नवाचार, नई सोच और ज्ञान-आधारित विकास का अग्रणी केंद्र बनाना है। ऐसा हरियाणा, जो उद्यमिता और तकनीक के बल पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप ‘विकसित भारत-2047’ के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाए।

उन्होंने कहा कि आज शक्ति की परिभाषा बदल रही है। भविष्य में वही देश और प्रदेश सबसे अधिक शक्तिशाली होंगे, जिनके पास नया ज्ञान और नई तकनीक होगी।

मुख्यमंत्री ने शोधकर्ताओं से भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्तियों “हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं” को अपना लक्ष्य मानकर शोध के सार्थक परिणाम मिलने तक निरंतर प्रयास करते रहने की अपील की।

उन्होंने शोधकर्ताओं से कहा कि उनका शोध हरियाणा की धरती और यहां के लोगों की वर्तमान जरूरतों से जुड़ा होना चाहिए। कृषि में कम पानी से अधिक उत्पादन कैसे हो, मिट्टी की सेहत कैसे सुधरे, फसल अपशिष्ट का उपयोग किस प्रकार हो, जल प्रबंधन और भूजल संरक्षण के प्रभावी मॉडल कैसे विकसित किए जाएं, जलवायु परिवर्तन का कृषि और जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का समाधान क्या हो—ऐसे सवाल हमारे गांवों, किसानों और आने वाली पीढ़ियों से सीधे जुड़े हैं। शोधकर्ताओं को इन विषयों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल तकनीक और न्यू मैटेरियल्स जैसी उभरती तकनीकें शिक्षा, रोजगार और अर्थव्यवस्था का स्वरूप बदल रही हैं। हमें भी अपनी शिक्षा और शोध प्रणाली को इन बदलावों के अनुरूप आगे बढ़ाना होगा। साथ ही शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी खत्म करना भी हमारी प्राथमिकता है।

शोध को पेटेंट, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इनोवेशन से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता : शिक्षा मंत्री

शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने कहा कि ‘हरियाणा विजन-2047’ के तहत एक विकसित, आधुनिक और ज्ञान-आधारित राज्य के निर्माण में उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शोध केवल किताबों और रिसर्च पेपर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा संबंध जमीनी समस्याओं के समाधान से होगा।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘हरियाणा राज्य शोध फंड’ के तहत 90 शोध परियोजनाओं के लिए 11.25 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। सरकार का मुख्य लक्ष्य शोध को पेटेंट, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इनोवेशन से जोड़ना है, ताकि विश्वविद्यालय में आया एक विचार पेटेंट और तकनीक के माध्यम से उत्पाद, उद्यम और रोजगार में परिवर्तित हो सके।

श्री महीपाल ढांडा ने कहा कि वर्ष 2026-27 के बजट में मुख्यमंत्री द्वारा उच्च शिक्षा और युवाओं के लिए की गई घोषणाओं को हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद ने प्रभावी ढंग से लागू करने का ढांचा तैयार कर लिया है। एनईपी-2020 के तहत 3 और 4 वर्षीय अंडरग्रेजुएट कार्यक्रम, अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स तथा मल्टीपल एंट्री-एग्जिट जैसी नीतियों को धरातल पर उतारा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि करियर डेवलपमेंट सेल के माध्यम से युवाओं को उद्योग जगत से जोड़ा जा रहा है और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा का हिस्सा बनाया जा रहा है। सरकार, विश्वविद्यालय, उद्योग और हरियाणा राज्य शोध फंड की इस मजबूत साझेदारी से हरियाणा का युवा केवल नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाला बनेगा।

350 शोध प्रस्तावों में से 90 परियोजनाओं को मिली मंजूरी : प्रो. के.सी. शर्मा

हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के चेयरपर्सन प्रो. के.सी. शर्मा ने मुख्यमंत्री को बताया कि ‘विकसित भारत-विकसित हरियाणा-2047’ विजन के अनुसार परिषद द्वारा सामान्य नियमावली तैयार की गई, जिसे सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को जारी किया गया था।

उन्होंने बताया कि हरियाणा राज्य शोध परियोजना के तहत कुल 350 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 163 आवेदनों को स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा मंजूरी दी गई। इनमें से 90 परियोजनाओं के आवेदनों को अंतिम रूप से स्वीकृति प्रदान की गई, जिनमें 75 फैकल्टी सदस्यों तथा 15 विद्यार्थियों की परियोजनाएं शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के अलावा निजी विश्वविद्यालयों के शोधकर्ताओं के लिए भी वित्तीय सहायता राशि जारी की गई है।

शोधकर्ताओं को 5,000 पेटेंट का लक्ष्य : डॉ. राज नेहरू

स्वर्ण जयंती हरियाणा वित्तीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक और मुख्यमंत्री के ओएसडी डॉ. राज नेहरू ने अपने संबोधन में विकसित हरियाणा के विजन को साकार करने में शोधकर्ताओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुसार शोधकर्ताओं को 5,000 पेटेंट का लक्ष्य दिया गया है। इनमें पेटेंट को उद्योग के साथ मिलकर व्यावसायिक रूप देने का लक्ष्य भी रखा गया है।

2030 तक 1,000 पेटेंट का लक्ष्य : ए.के. सिंह

उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ए.के. सिंह ने कहा कि पिछले वर्ष 168 पेटेंट का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जबकि इस वर्ष यह लक्ष्य बढ़ाकर 350 किया गया है और वर्ष 2030 तक इसे 1,000 तक ले जाने का लक्ष्य है।

इस अवसर पर हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष प्रो. एस.के. गक्खड़ तथा उच्च शिक्षा संस्थानों के शोधकर्ता, प्रोफेसर और विद्यार्थी मौजूद थे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments