Wednesday, September 30, 2026
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त्योहारी सीजन से पहले हरियाणा सरकार खाद्य सुरक्षा को लेकर मुस्तैद

हरियाणा, 12 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा): त्योहारों के मौसम को देखते हुए हरियाणा सरकार खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क हो गई है। मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग बढ़ाने, निरीक्षण और निगरानी में तेजी लाने तथा असुरक्षित और घटिया खाद्य पदार्थों की बिक्री पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने आज यहां खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की राज्य स्तरीय सलाहकार समिति की दूसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि त्योहारों के मौसम में खाद्य पदार्थों की मांग और बिक्री बढ़ने की संभावना को देखते हुए सैंपलिंग और प्रवर्तन गतिविधियों में विशेष रूप से तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाना केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए सभी संबंधित विभागों और एजेंसियों के समन्वित प्रयास जरूरी हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्रदेश की रणनीति असुरक्षित खाद्य पदार्थों की शीघ्र पहचान करने, वैज्ञानिक जांच को मजबूत करने, फील्ड निरीक्षण और प्रवर्तन प्रणाली को प्रभावी बनाने तथा खाद्य कारोबार संचालकों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

बैठक में बताया गया कि खाद्य सुरक्षा कानूनों के उल्लंघन के मामलों में दोषसिद्धि की संख्या लगातार बढ़ी है। वर्ष 2023-24 में 47 मामलों से बढ़कर वर्ष 2025-26 में दोषसिद्धि की संख्या 111 हो गई। चालू वित्त वर्ष में 31 अगस्त 2026 तक 265 मामलों में दोषसिद्धि हुई है और 55.86 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वर्ष 2025-26 के दौरान खाद्य सुरक्षा संबंधी प्रवर्तन कार्रवाई के तहत 2.35 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

बैठक में एनालॉग/नॉन-डेयरी पनीर के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी समीक्षा की गई। डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा आयुक्त द्वारा जारी अधिसूचना के तहत प्रदेश में एनालॉग/नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक वर्ष के लिए प्रतिबंध लगाया गया है।

बैठक में ‘घी’, ‘घी का दीपक’ और ‘पूजा का घी’ के नाम से बेचे जाने वाले उत्पादों से संबंधित दिशा-निर्देशों की भी समीक्षा की गई। घी के रूप में लेबल किए गए, वर्णित, प्रस्तुत या बेचे जाने वाले उत्पादों के लिए निर्धारित घी मानकों का पालन करना अनिवार्य है।

जमीनी स्तर पर निरीक्षण और समयबद्ध कार्रवाई को मजबूत करने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के 45 नियमित पदों पर भर्ती की मांग हरियाणा लोक सेवा आयोग को भेजी गई है। अतिरिक्त मानव संसाधन से प्रदेश में निरीक्षण, निगरानी, सैंपलिंग, जांच और प्रवर्तन कार्रवाई को और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की बढ़ती वैधानिक और फील्ड से जुड़ी जिम्मेदारियों को देखते हुए विभाग को औपचारिक रूप से ‘प्रवर्तन विभाग’ के रूप में मान्यता देने के विषय पर भी विचार किया गया।

वैज्ञानिक जांच क्षमता को मजबूत करने के लिए वर्ष 2026-27 में पहले चरण में हिसार और नारनौल में खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने के लिए 24 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। यह प्रदेश में हिसार, नारनौल, सिरसा, जींद, यमुनानगर, रोहतक, फरीदाबाद और गुरुग्राम में आठ व्यापक एकीकृत खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है।

इन प्रयोगशालाओं के विस्तार से खाद्य पदार्थों की वैज्ञानिक जांच और निगरानी क्षमता बढ़ेगी तथा खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों की पहचान और प्रभावी कार्रवाई के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था विकसित होगी।

प्रदेश के सभी जिलों में जिला स्तरीय सलाहकार समितियों का गठन कर उनकी बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। मुख्य सचिव ने इन समितियों के नियमित संचालन, उनके निर्णयों के प्रभावी क्रियान्वयन और फॉलो-अप की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

वर्ष 2026 के दौरान खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा घीवर, दूध एवं दूध उत्पादों, कैफीनयुक्त पेय पदार्थों और आयातित खाद्य पदार्थों की लेबलिंग संबंधी आवश्यकताओं को लेकर विशेष प्रवर्तन अभियान चलाए गए। इसके अलावा 236 खाद्य प्रतिष्ठानों पर खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता संबंधी जागरूकता अभियान चलाया गया। इनमें स्ट्रीट फूड कार्ट, खाद्य पदार्थों की दुकानें, रेस्टोरेंट, ढाबे तथा कटे हुए फल और तैयार खाद्य पदार्थ बेचने वाले विक्रेता शामिल थे।

इनमें से 153 प्रतिष्ठान और विक्रेता स्वच्छता संबंधी आवश्यकताओं का पालन करते पाए गए, जबकि नियमों के उल्लंघन के मामलों में लागू प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई शुरू की गई।

बैठक में विभाग के फील्ड स्तर पर प्रवर्तन अभियानों के लिए संस्थागत और सुरक्षा संबंधी सहायता की आवश्यकता की भी समीक्षा की गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को आकस्मिक निरीक्षण, छापेमारी, रात के समय की कार्रवाई और अन्य संवेदनशील प्रवर्तन गतिविधियों के दौरान पुलिस सहायता एवं सुरक्षा उपलब्ध करवाने पर सहमति व्यक्त की गई, ताकि फील्ड कार्रवाई प्रभावी और सुरक्षित तरीके से सुनिश्चित की जा सके।

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