चंडीगढ़, 12 सितंबर 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): पंजाब की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। ‘आप’ पंजाब के प्रभारी और दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने पंजाब कांग्रेस के नए प्रभारी सचिन पायलट को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि आम आदमी पार्टी पंजाब में 1,000 ऐसे सरकारी स्कूल दिखा सकती है, जहां शिक्षा और बुनियादी ढांचे में बड़े स्तर पर सुधार किए गए हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या सचिन पायलट कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश में इसी स्तर के 1,000 स्कूल दिखा सकते हैं?
सिसोदिया ने सचिन पायलट को संबोधित करते हुए कहा, “सचिन जी, हम आपको पंजाब में 1,000 शानदार सरकारी स्कूल दिखा सकते हैं। क्या आप हिमाचल प्रदेश में ऐसे 1,000 स्कूल दिखा सकते हैं?” उन्होंने पंजाब और हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों का संयुक्त ऑडिट करवाने की पेशकश भी की और पूछा कि क्या पायलट इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।
स्कूल ऑडिट से शुरू हुआ विवाद
यह राजनीतिक विवाद उस समय शुरू हुआ, जब ‘काकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास के नेतृत्व में एक टीम ने लुधियाना के तीन सरकारी स्कूलों का दौरा कर उनका ऑडिट किया। टीम ने एक सरकारी ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’, एक सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल और एक सरकारी प्राइमरी स्कूल का जायजा लिया।
रिपोर्टों के अनुसार, स्कूल ऑफ एमिनेंस में स्विमिंग पूल, बैडमिंटन कोर्ट, विशेष जरूरतों वाले विद्यार्थियों के लिए रैंप और एआई लैब जैसी सुविधाएं मौजूद थीं। हालांकि, बाकी दो स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी कई कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया। ऑडिट के दौरान तीनों स्कूलों के शौचालयों की स्थिति में और सुधार की जरूरत भी बताई गई।
इस ऑडिट के बाद सचिन पायलट ने कहा था कि पंजाब में भी स्कूलों की जांच उसी दृष्टिकोण, उन्हीं सवालों और उसी साहस के साथ होनी चाहिए, जिस तरह दूसरे राज्यों में सरकारी स्कूलों का मूल्यांकन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब को किसी भी प्रकार की विशेष छूट नहीं मिलनी चाहिए और आम आदमी पार्टी की सरकार को भी निष्पक्ष जांच का सामना करना चाहिए।
‘आप’ का पलटवार
सचिन पायलट के बयान के बाद आम आदमी पार्टी ने भी तीखा पलटवार किया। मनीष सिसोदिया ने पंजाब के स्कूलों की तुलना हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों से करने की बात कही। उनका तर्क है कि यदि पंजाब की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का भी उसी स्तर पर मूल्यांकन होना चाहिए।
‘आप’ के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने भी पायलट को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वह हिमाचल प्रदेश के 1,000 सरकारी स्कूलों की सूची देते हैं, तो आम आदमी पार्टी पंजाब के 1,000 स्कूलों की सूची पेश कर सकती है। उन्होंने दोनों राज्यों के स्कूलों का संयुक्त दौरा कर ऑडिट करवाने की बात भी कही।
पंजाब के शिक्षा मॉडल पर ‘आप’ का दावा
आम आदमी पार्टी पंजाब में सरकारी शिक्षा के क्षेत्र में किए गए सुधारों को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। पार्टी का दावा है कि पंजाब के सरकारी स्कूलों में स्मार्ट इंटरैक्टिव पैनल, साफ पीने का पानी, चालू शौचालय, सैनिटरी पैड इन्सिनरेटर, वाई-फाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया गया है।
‘आप’ नेताओं का यह भी कहना है कि पंजाब के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी अब नीट और जेईई जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। पार्टी के दावे के अनुसार, सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने यूजी-नीट 2026 परीक्षा पास की है। हालांकि, ऐसे आंकड़ों की अंतिम पुष्टि सरकारी और आधिकारिक रिकॉर्ड के माध्यम से किया जाना जरूरी है।
‘आप’ पंजाब के स्कूलों की कार्यप्रणाली को परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स, नीति आयोग की रिपोर्टों और राष्ट्रीय सर्वेक्षणों से जोड़कर भी पेश कर रही है। पार्टी का कहना है कि पंजाब ने कक्षा में सीखने और शिक्षा परिणामों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
राजनीतिक टकराव या शिक्षा की वास्तविक जांच?
स्कूलों की गुणवत्ता को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप लेता दिखाई दे रहा है। आम आदमी पार्टी अपने शिक्षा मॉडल को सरकार की कार्यप्रणाली का प्रमुख उदाहरण बता रही है, जबकि कांग्रेस सरकारी स्कूलों में मौजूद कमियों, बुनियादी सुविधाओं और सरकारी दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल उठा रही है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था का मूल्यांकन केवल चुनिंदा अच्छे स्कूलों या कुछ कमजोर संस्थानों के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए स्कूल भवनों की स्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यार्थियों की उपस्थिति, शिक्षा परिणाम, शौचालय, पीने का पानी, प्रयोगशालाएं, डिजिटल सुविधाएं तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच असमानता जैसे सभी पहलुओं की जांच जरूरी है।
निष्पक्ष ऑडिट से ही स्पष्ट होगी वास्तविक तस्वीर
मनीष सिसोदिया की चुनौती और सचिन पायलट के बयान ने सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति पर नई बहस छेड़ दी है। यदि पंजाब और हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों का समान मापदंडों के आधार पर स्वतंत्र और पारदर्शी ऑडिट कराया जाता है, तो इससे राजनीतिक दावों के बजाय जमीनी हकीकत सामने आ सकती है।
अब देखना यह होगा कि सचिन पायलट और कांग्रेस इस चुनौती को स्वीकार करते हैं या नहीं। इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण रहेगा कि दोनों पक्ष केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहते हैं या वास्तव में स्कूलों की संयुक्त जांच के लिए आगे आते हैं।
आखिरकार, इस पूरी बहस का केंद्र राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बच्चों को बेहतर सरकारी शिक्षा उपलब्ध करवाना होना चाहिए।






