कुरुक्षेत्र, 13 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने कहा कि आज विश्वभर में देश को आयुष और योग को नई पहचान मिल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की प्राचीन योग और आयुष परंपरा को दुनिया तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य हुआ है। इस कार्य को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तेजी के साथ सफलतापूर्वक प्रदेश के प्रत्येक घर तक पहुंचा रहे हैं। आज अनेक देश योग और भारतीय चिकित्सा पद्धतियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हजारों वर्ष पुराना भारत का ज्ञान आज आधुनिक विश्व को स्वस्थ जीवन की राह दिखा रहा है।
हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद की उपाध्यक्षा सुमन सैनी शनिवार को गांव कलाल माजरा में राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत आयोजित आयुष ग्राम कार्यक्रम में बोल रही थी। उन्होंने आयुष विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तिका का विमोचन भी किया। उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थी कुंजन, जश्प्रीत व आयुष को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने गुरुद्वारा कलाल माजरा साहिब के परिसर में पौधारोपण किया। कार्यक्रम के दौरान राजकीय विद्यालय कलाल माजरा के विद्यार्थियों ने योग का सुंदर प्रदर्शन किया।
उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने कहा कि गुरु साहिब की शिक्षाएं हमें सेवा, मानवता और परोपकार का संदेश देती हैं और आज इसी पवित्र स्थान गुरुद्वारा कलाल माजरा साहिब पर लोगों के स्वास्थ्य की सेवा के लिए आयुष शिविर का आयोजन उस भावना को और मजबूत करता है। जहां से हमें मानवता की सेवा की प्रेरणा मिलती है, वहीं आज लोगों को स्वस्थ जीवन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे स्वस्थ शरीर, प्रसन्न मन और अच्छे संस्कारों के साथ आगे बढ़ेंगे। इसी सोच के साथ बच्चों, युवाओं, माताओं-बहनों और बुजुर्गों को स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास है। इसी स्वस्थ जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण आधार योग है। करो योग रहो निरोग के नारे को हमने अपनाना है।
उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने कहा कि स्वस्थ जीवन की इसी व्यापक सोच को हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा ने हजारों वर्षों पहले समझ लिया था। आज यहां औषधीय पौधों के महत्व के बारे में भी जानकारी मिली। हमारी परंपरा में प्रकृति को जीवन का आधार माना गया है और आयुर्वेद इसी प्रकृति एवं मानव स्वास्थ्य के गहरे संबंध से विकसित हुई ज्ञान परंपरा है। हमारे आसपास मौजूद अनेक पौधों में औषधीय गुण हैं। इसलिए आयुष को केवल बीमारी के उपचार तक सीमित न रखते हुए हमें प्रकृति, पर्यावरण और स्वस्थ जीवनशैली से भी जोड़ना होगा।
उन्होंने कहा कि हम प्रतिदिन कुछ समय अपने शरीर और मन को दें, तो जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। योग शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ मन को संतुलित और जीवन को अनुशासित बनाता है। इसलिए मेरा आग्रह है कि योग को केवल किसी आयोजन या विशेष दिवस तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपनी नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने कहा कि योग और प्रकृति से जुड़ी इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए कलाल माजरा को आयुष ग्राम के रूप में विकसित करने की पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पूरे गांव के लिए गर्व की बात है, लेकिन इसके साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी है। आयुष ग्राम का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि गांव के प्रत्येक परिवार को स्वस्थ जीवनशैली, योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति जागरूक करना है। हमें बीमारी होने के बाद उपचार कराने के साथ-साथ बीमारी से बचाव को भी अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि हमारी जीवनशैली में तेजी से बदलाव आ रहा है। शारीरिक मेहनत कम हुई है, बाहर का भोजन बढ़ा है, मोबाइल और स्क्रीन पर समय बढ़ा है तथा तनाव भी जीवन का हिस्सा बनता जा रहा है। ऐसे में संतुलित दिनचर्या पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है। पौष्टिक भोजन, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, योग और सकारात्मक सोच स्वस्थ जीवन के मजबूत आधार हैं।
उपाध्यक्षा सुमन सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार भी प्रदेश को स्वस्थ और योगमय बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। गांव-गांव में योग और व्यायाम को बढ़ावा देने के लिए व्यायामशालाएं स्थापित की गई हैं, ताकि ग्रामीणों को नियमित योगाभ्यास की सुविधा मिल सके। कलाल माजरा का आयुष ग्राम के रूप में चयन इसी व्यापक सोच को आगे बढ़ाने का अवसर है। जब घर स्वस्थ होगा तो समाज स्वस्थ होगा, जब समाज स्वस्थ होगा तो राष्ट्र भी स्वस्थ होगा।
औषधीय पौधे स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की अनमोल धरोहर : डा. मंजू शर्मा
जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. मंजू शर्मा ने शिविर के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि एवं अन्य अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया तथा सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि औषधीय पौधे स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की अनमोल धरोहर हैं और इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है। शिविर में आयुष विभाग के संबंधित अधिकारी, कर्मचारी, योग सहायक तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। डॉ. रेणुका ने औषधीय पौधों के स्वास्थ्यवर्धक गुणों, पौधारोपण के महत्व एवं औषधीय पौधों की खेती से होने वाले लाभों के बारे में जानकारी देते हुए ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
317 लाभार्थियों को प्रदान की गई आयुष स्वास्थ्य सेवाएं
शिविर में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा कुल 317 लाभार्थियों को निःशुल्क आयुष स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गई। इनमें 206 आयुर्वेदिक ओपीडी, 103 होम्योपैथिक ओपीडी तथा 8 अग्निकर्म चिकित्सा के लाभार्थी रहे। इसके अतिरिक्त 50 लोगों की ब्लड शुगर जांच, 72 लोगों का प्रकृति परीक्षण तथा 49 लोगों को रोगानुसार योगाभ्यास करवाया गया। ग्रामीणों को निःशुल्क 200 औषधीय पौधे भी वितरित किए गए।
कार्यक्रम में एसडीएम राजेश कुमार सोनी, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. मंजू शर्मा, मंडल अध्यक्ष विकास शर्मा, सीडीपीओ नीतू, सीडीपीओ बबैन निर्मला, ग्राम सरपंच सोहन लाल, डॉ. मोनिका, डॉ. प्रगति, डॉ. संदीप, डॉ. राजीव, डॉ. अश्मी, डॉ. शुभम, सरिता, रीना, सुभाष, भीम सिंह, राय सिंह, कमल किशोर, सोनम सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।






