Monday, September 28, 2026
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सहकारिता को तकनीक और पारदर्शिता के साथ बनाएंगे समृद्धि का मजबूत आधार – डॉ. अरविंद शर्मा

अंबाला छावनी, 14 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि सहकारिता का मूल मंत्र ‘मैं नहीं, हम’ है। सहकारी संस्थाओं को तकनीक, पारदर्शिता, जवाबदेही और आधुनिक प्रबंधन से जोड़कर किसानों, कर्मचारियों, महिलाओं और युवाओं की आर्थिक मजबूती का बड़ा आधार बनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र को हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में तेजी से धरातल पर उतारा जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का संकल्प है कि देश को वर्ष 2047 तक विकसित बनाने में सभी लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

डॉ. अरविंद शर्मा रविवार को अंबाला छावनी में ‘द पोस्टल एंड आर.एम.एस. एम्प्लाइज कोऑपरेटिव बैंक’ के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बैंक के चेयरमैन सचिन खरब, निदेशक मंडल, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा डाक एवं बीएसएनएल परिवार को संस्था की लंबी सहकारी यात्रा के लिए बधाई दी।

मंत्री ने कहा कि वर्ष 1928 में लाहौर में शुरू हुई यह सहकारी संस्था विभाजन के बाद वर्ष 1947 में अंबाला छावनी आई और आज लगभग एक सदी की विरासत के साथ आगे बढ़ रही है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली तक डाक एवं बीएसएनएल विभाग के 13 हजार से अधिक स्थायी कर्मचारियों का शेयरधारक के रूप में इससे जुड़ना सहकारिता की ताकत को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि सदस्यों को जरूरत के समय तत्काल 11 लाख रुपये तक की ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था संस्था की सदस्य हितैषी भावना को दर्शाती है। बच्चों की शिक्षा, विवाह, मकान या संकट के समय जब अपनी सहकारी संस्था कर्मचारी के साथ खड़ी होती है, तो वह केवल बैंक नहीं बल्कि परिवार के सहयोगी की भूमिका निभाती है।

डॉ. शर्मा ने कहा कि हरियाणा में पैक्स (PACS) को केवल खाद और ऋण वितरण तक सीमित रखने के बजाय बहुउद्देश्यीय बनाया जा रहा है। 710 पैक्स के कंप्यूटरीकरण, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र और साझा सेवा केंद्र जैसी सुविधाओं के माध्यम से गांवों में सहकारी संस्थाओं को सेवाओं का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

हैफेड और अन्य सहकारी संस्थाएं किसानों की फसल खरीद और खाद उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जबकि दुग्ध सहकारिता हजारों पशुपालक परिवारों को बाजार से जोड़ रही है। उन्होंने हरियाणा की पहचान के साथ सहकारिता को जोड़ते हुए कहा, “दूध-दही का खाना, यो सै म्हारा हरियाणा।” हमारा प्रयास है कि दूध-दही की यही ताकत सहकारिता के माध्यम से पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक समृद्धि की ताकत भी बने।

सहकारिता मंत्री ने बैंक प्रबंधन को सदस्य हित को प्रत्येक निर्णय के केंद्र में रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मौजूदा निदेशक मंडल के प्रयासों से पिछले लगभग दो वर्षों में बैंक की कार्यशील पूंजी में लगभग 200 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है। किसी सहकारी संस्था की सबसे बड़ी पूंजी उसकी बैलेंस शीट से भी अधिक उसके सदस्यों का विश्वास होता है। इस विश्वास को पारदर्शिता और बेहतर सेवाओं के माध्यम से और मजबूत किया जाना चाहिए।

डॉ. शर्मा ने डाक कर्मचारियों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि बदलते समय और तकनीक के बावजूद डाक विभाग के प्रति समाज का विश्वास कायम है। एक दौर में गांव का डाकिया केवल चिट्ठी ही नहीं, बल्कि परिवारों की खुशियां और संदेश लेकर आता था। उसी विश्वास को यह बैंक आर्थिक सहयोग और सहकारिता की शक्ति के साथ आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकार और सहकारिता विभाग सकारात्मक प्रयास करने वाली सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने में हर संभव सहयोग के लिए तत्पर हैं। हमारा लक्ष्य है कि हरियाणा की सहकारी संस्थाएं सेवा, पारदर्शिता, आधुनिक तकनीक और सदस्य हित के मामले में देश के सामने एक मिसाल बनें।

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