चंडीगढ़, 19 सितंबर 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): हरियाणा राज्य विजिलेंस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ए.सी.बी.) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए 190 सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची तैयार की है। इनके खिलाफ बार-बार भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतें या इनपुट मिले हैं। ए.सी.बी.अब उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण कर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
रिश्वत लेते पकड़े गए अधिकारियों की उसी जिले में दोबारा तैनाती नहीं
ए.सी.बी. प्रमुख अरशिंदर सिंह चावला के मुताबिक, सभी सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया है कि रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए अधिकारी या कर्मचारी को दोबारा उसी जिले में तैनात न किया जाए। यह फैसला ACB की हाई-पावर कमेटी में विचार-विमर्श के बाद लिया गया। ब्यूरो के अनुसार, पहले कुछ मामलों में कार्रवाई का सामना कर चुके कर्मचारियों को बाद में उसी जिले में दोबारा तैनात किए जाने के मामले सामने आए थे।
2026 में अब तक 138 ट्रैप कार्रवाई
ए.सी.बी. के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक 138 सफल ट्रैप ऑपरेशन किए जा चुके हैं, जिनमें सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया। इसके अलावा 1 जनवरी 2026 से अब तक 21 मामलों में 23 सरकारी कर्मचारियों को अदालतों द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है।
भ्रष्टाचार के ‘हॉटस्पॉट’ किए जा रहे चिन्हित
ए.सी.बी. विभिन्न विभागों से मिल रही शिकायतों का विश्लेषण कर यह पता लगा रही है कि किन विभागों, कार्यालयों और क्षेत्रों में भ्रष्टाचार की शिकायतें अधिक आ रही हैं। हरियाणा में ए.सी.बी के सात पुलिस थाने हैं। इनसे मिलने वाले इनपुट के आधार पर कार्रवाई और प्रशासनिक सुधारों की योजना बनाई जा रही है।
शिकायत प्रक्रिया को और आसान बनाने की तैयारी
ए.सी.बी. नागरिकों के लिए शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए मोबाइल ऐप की ट्रायलिंग कर रही है। प्रस्तावित ऐप के माध्यम से लोग एक टच पर ए.सी.बी. हेल्पलाइन से जुड़ सकेंगे। शिकायतकर्ता की पहचान सुरक्षित रखने के लिए ओ.टी.पी. सहित अन्य सुरक्षा सुविधाएं भी इसमें शामिल की जा रही हैं।
ट्रैप के दौरान इस्तेमाल राशि के लिए रिवॉल्विंग फंड
सरकार ने ट्रैप कार्रवाई के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा इस्तेमाल या उपलब्ध कराई गई राशि के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए रिवॉल्विंग फंड की व्यवस्था भी की है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायतकर्ता को अदालत में हलफनामा देना होता है कि मामला अंतिम रूप से निपटने के बाद राशि सरकारी खजाने में वापस जमा करवा दी जाएगी।






