चंडीगढ़, 23 सितंबर 2026 (छत्रपाल सिंह): पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के जिला अस्पतालों में जरूरी चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने कहा कि मरीजों को बेहतर इलाज या जरूरी जांच के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकने की नौबत नहीं आनी चाहिए। चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की डिवीजन बेंच ने पंजाब सरकार को अदालत के निर्देशों के अनुपालन के संबंध में हलफनामा दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।
सिर्फ इमारतों और मशीनों से नहीं बनेगी स्वास्थ्य व्यवस्था: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों में इमारतें और मेडिकल उपकरण उपलब्ध करवाना ही पर्याप्त नहीं है। इन सुविधाओं को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए पर्याप्त डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी। अदालत ने स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाएं केवल सरकारी रिकॉर्ड या कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि मरीजों को वास्तव में उनका लाभ मिलना चाहिए।
मालेरकोटला सिविल अस्पताल से उठा था मुद्दा: यह मामला मालेरकोटला सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। भीष्म किंगर द्वारा दायर याचिका में अस्पताल के चिकित्सा ढांचे और जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता का मुद्दा उठाया गया था। मामले की पिछली सुनवाई के दौरान मालेरकोटला अस्पताल में CT स्कैन और MRI जैसी जांच सुविधाएं निजी एजेंसी के माध्यम से उपलब्ध करवाने की व्यवस्था पर भी अदालत ने सवाल उठाए थे। अदालत ने कहा था कि बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना राज्य की जिम्मेदारी है।
डॉक्टरों के पद और विशेषज्ञों की उपलब्धता भी जांच के दायरे में: पिछली अदालती कार्यवाही में मालेरकोटला में डॉक्टरों के खाली पदों का मुद्दा भी सामने आया था। अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, एक चरण में 19 मेडिकल अधिकारियों की तैनाती किए जाने की जानकारी दी गई थी, जबकि विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। अब हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से जिला अस्पतालों में मौजूदा चिकित्सा सुविधाओं, डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की स्थिति तथा आवश्यक संसाधनों के बारे में अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।
अदालत का फोकस—सुविधाएं जमीन पर भी दिखाई दें: हाईकोर्ट के निर्देशों का मुख्य केंद्र यह है कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाएं, स्टाफ और जांच की व्यवस्था वास्तव में कार्यशील हो। सरकार द्वारा अगली सुनवाई के दौरान हलफनामे के माध्यम से इस संबंध में जानकारी अदालत के सामने रखी जाएगी।






