हरियाणा , 24 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा सरकार ने धान की पराली जलाने की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर ‘पराली सुरक्षा बल’ गठित करने का फैसला किया है। यह बल पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी और रोकथाम के साथ-साथ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा, देर शाम और रात के समय गश्त बढ़ाई जाएगी तथा खेतों में आग की घटनाओं की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के बेहतर उपयोग के लिए किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन देने का भी प्रावधान किया है।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज यहां पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशों की पालना के संबंध में राज्य कार्य योजना की समीक्षा की। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से राज्य में पराली प्रबंधन और निगरानी के लिए की जा रही तैयारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्य योजना के तहत गठित ‘पराली सुरक्षा बल’ में पुलिस कर्मचारियों के साथ कृषि विभाग के अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, नोडल एवं क्लस्टर अधिकारियों तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। यह बल जिला और ब्लॉक स्तर पर काम करेगा तथा खेतों में आग लगने की घटनाओं की निगरानी के साथ-साथ पराली जलाने की घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विजेंद्र कुमार ने बताया कि देर शाम गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, क्योंकि कुछ किसानों द्वारा उपग्रह निगरानी से बचने के लिए अंधेरा होने के बाद पराली जलाने का प्रयास किया जाता है। ऐसे मामलों की प्रभावी रोकथाम के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी और गश्त को और मजबूत किया जा रहा है।
कार्य योजना के अनुसार पराली जलाने की प्रत्येक सत्यापित घटना में तीन स्तरों पर कार्रवाई की जाएगी। संबंधित मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी, चालान किया जाएगा और किसान के भूमि रिकॉर्ड में ‘रेड एंट्री’ की जाएगी। इसके साथ ही निर्धारित पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि भी संबंधित उल्लंघनकर्ता से वसूल की जाएगी।
सरकार की ओर से पराली जलाने के विकल्प उपलब्ध करवाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के बेहतर उपयोग के लिए 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसके अलावा, फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी की खरीद पर सब्सिडी भी उपलब्ध करवाई जा रही है।
धान की कटाई के कार्यक्रम के अनुसार बेलर, रेकर्स और अन्य फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी को विभिन्न जिलों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है। सितंबर महीने से यमुनानगर, अंबाला, करनाल और कुरुक्षेत्र में धान की कटाई शुरू होती है, जबकि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में सिरसा, फतेहाबाद, हिसार और जींद जैसे जिलों में कटाई का काम तेज होता है। अधिकारियों को पड़ोसी राज्यों और हरियाणा के आसपास के जिलों में मशीनरी मालिकों के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कटाई के समय आवश्यक मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
पराली प्रबंधन और खेत स्तर पर निगरानी के लिए 8,134 गांव स्तर के नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। राज्य में लगभग 5,600 गांवों में 6,21,285 पंजीकृत धान उत्पादक किसान हैं, जिनके पास लगभग 34.1 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की खेती है। अब तक 6,04,314 किसानों को नोडल अधिकारियों द्वारा कवर किया जा चुका है, जबकि 16,971 किसानों को अभी कवर किया जाना बाकी है।
निगरानी प्रणाली के तहत सामान्य गांवों में एक नोडल अधिकारी को अधिकतम 100 किसानों और हॉटस्पॉट गांवों में अधिकतम 50 किसानों के साथ जोड़ा जाएगा। नोडल अधिकारी मोबाइल ऐप के माध्यम से खेतों में सक्रिय आग की लोकेशन की सूचना देंगे और यह भी दर्ज करेंगे कि संबंधित किसान फसल अवशेष का प्रबंधन खेत में ही करने, खेत से बाहर निकालकर करने या चारे के रूप में इस्तेमाल करने जैसी विधियों का उपयोग कर रहे हैं या नहीं। मोबाइल ऐप पर दर्ज सक्रिय आग की घटनाओं पर पराली सुरक्षा बल द्वारा तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार ने ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली को भी मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं। CAQM के निर्देशों के अनुरूप राज्य में ‘दृश्य’ के सहयोग से पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी के लिए ड्रोन तैनात किए जा रहे हैं। उपायुक्तों को पहले ही उन गांवों और स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां ड्रोन के माध्यम से निगरानी की जाएगी।
क्षेत्रीय अधिकारियों को CAQM और NRSE की ओर से खेतों में जले हुए क्षेत्र का आकलन करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। अधिकारियों को केंद्र सरकार द्वारा विकसित ‘भुवन’ ऐप के माध्यम से निर्धारित स्थानों का सर्वेक्षण पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
कार्य योजना के तहत सरकारी और पंचायत की जमीन की पहचान कर वहां पराली से तैयार गांठों के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था की जाएगी। पराली का उपयोग करने वाले उद्योगों के साथ समन्वय कर भंडारण सुविधाएं विकसित की जाएंगी। जिला स्तर पर सप्लाई चेन की कार्य योजना भी तैयार की जाएगी। इसके तहत बेलिंग, पैलेटिंग, ब्रिकेटिंग और भंडारण की उपलब्ध सुविधाओं को चिन्हित कर किसानों को पराली का उपयोग करने वाले अंतिम उपभोक्ता उद्योगों से जोड़ा जाएगा।
राज्य सरकार की ओर से पराली जलाने के दुष्प्रभावों और फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपायों के बारे में जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। अब तक गांव और ब्लॉक स्तर पर 646 कैंप, संवाद कार्यक्रम और प्रदर्शन आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 23 हजार से अधिक किसानों ने भाग लिया। इसके अलावा, स्कूलों और कॉलेजों में 370 जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गई हैं, जिनमें 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने संबंधित विभागों और जिला प्रशासन को पराली जलाने की घटनाओं की रोकथाम के लिए निगरानी, लागूकरण, प्रवर्तन, मशीनरी की उपलब्धता तथा किसानों के साथ निरंतर संवाद और प्रभावी समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को आवश्यक साधन और व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध करवाने के साथ-साथ नियमों की प्रभावी पालना भी सुनिश्चित की जाए।






