फतेहगढ़ साहिब, 24 सितंबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): श्री गुरु ग्रंथ साहिब वर्ल्ड यूनिवर्सिटी, फतेहगढ़ साहिब में एनएसएस दिवस उत्साह और एनएसएस स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, शारीरिक तंदुरुस्ती और राष्ट्र निर्माण से संबंधित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं।
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिवक्ता सरदार जतिंदर सिंह चीमा ने एनएसएस स्वयंसेवकों के साथ विचार-विमर्श करते हुए उन्हें आत्मचिंतन, जीवन के उद्देश्य की पहचान और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सभी प्रकार के जीवों और अस्तित्व के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता तथा प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग की भावना विकसित करने पर जोर दिया। इसके बाद स्वयंसेवकों ने पौधारोपण अभियान में भाग लिया।
प्रो. (डॉ.) परित पाल सिंह, वाइस चांसलर ने एनएसएस स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि एनएसएस विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा से आगे बढ़कर समाज से जुड़ने और सेवा भावना विकसित करने का सार्थक अवसर प्रदान करता है।

डॉ. हरनीत बिलिंग, एनएसएस प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर ने बताया कि स्वयंसेवकों ने सामाजिक जिम्मेदारी, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की शपथ ली।
इस अवसर पर डॉ. बहादुर सिंह के नेतृत्व में शारीरिक शिक्षा एवं खेल प्रौद्योगिकी विभाग की एनएसएस इकाई द्वारा वॉलीबॉल मैच करवाया गया। डॉ. रमणदीप कौर के नेतृत्व में सामाजिक विज्ञान फैकल्टी की एनएसएस इकाई द्वारा “सामाजिक मूल्य और विश्वास” विषय पर विचार-विमर्श आयोजित किया गया। डॉ. रुचि मल्होत्रा के नेतृत्व में वाणिज्य एवं प्रबंधन फैकल्टी की एनएसएस इकाई द्वारा “राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका” विषय पर भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई।
शिक्षा विभाग की एनएसएस इकाई द्वारा आयोजित गतिविधियों के दौरान श्रीमती रमणदीप कौर, सहायक प्रोफेसर ने “विकसित राष्ट्र के प्रति युवाओं की जिम्मेदारी” विषय पर अपने विचार साझा किए, जबकि डॉ. सुमन प्रीत कौर के नेतृत्व में स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाया गया। इसी तरह डॉ. मोनिका एरी के नेतृत्व में मूलभूत एवं अनुप्रयुक्त विज्ञान फैकल्टी की एनएसएस इकाई द्वारा व्यापक कैंपस स्वच्छता अभियान चलाया गया।
समागम ने एनएसएस के मूल आदर्श “नॉट मी बट यू”, अर्थात “मैं नहीं, आप” की भावना को मजबूत करते हुए स्वयंसेवकों की समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को उजागर किया।






