कुरुक्षेत्र 30 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा): प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने तथा गौशालाओं को टिकाऊ कृषि व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से पशुपालन एवं डेयरी विभाग और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग कुरुक्षेत्र की संयुक्त अध्यक्षता में जिले की विभिन्न गौशालाओं के प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में गौशाला प्रतिनिधियों से प्राकृतिक कृषि एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वैच्छिक रूप से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया। इस दौरान धान अवशेष के संग्रहण एवं भंडारण के लिए आगे आने तथा पराली जलाने की समस्या के समाधान में सहयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डा. गिरीश नागपाल ने कहा कि इस बैठक में गौशालाओं में चारे के लिए उपयोग किए जा रहे खेतों में प्राकृतिक कृषि का क्षेत्र बढ़ाने तथा प्राकृतिक कृषि आधारित चारा उत्पादन को प्रोत्साहित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। अच्छी गुणवत्ता वाली देशी गायों की पहचान एवं पृथक्करण कर उन्हें प्राकृतिक कृषि करने वाले इच्छुक किसानों को उपलब्ध करवाने की दिशा में सहयोग का आह्वान किया गया। बैठक में प्रत्येक गौशाला से 2-3 कर्मचारियों/कार्यकर्ताओं को प्राकृतिक कृषि का प्रशिक्षण दिलाने का सुझाव दिया गया ताकि वे गोबर एवं गोमूत्र आधारित प्राकृतिक कृषि आदानों जैसे जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत आदि तैयार करने में सक्षम हो सकें। इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इस बैठक में गौशालाओं को स्वैच्छिक रूप से बायो रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) स्थापित करने के लिए भी प्रेरित किया गया ताकि प्राकृतिक कृषि के जैव-आदान तैयार कर किसानों को उपलब्ध करवाए जा सकें। बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि गौशालाएं देशी गाय, जैव-आदान, फसल अवशेष एवं प्राकृतिक कृषि को एक-दूसरे से जोड़ते हुए प्राकृतिक कृषि के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इससे संसाधनों के पुनर्चक्रण, स्थानीय स्तर पर जैव-आदानों की उपलब्धता, टिकाऊ कृषि तथा किसानों की आय में वृद्धि की दिशा में सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते है।






