चंडीगढ़, 1 अक्टूबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ से जुड़े मुद्दों पर पंजाब सरकार ने 7 सदस्यीय समन्वय समिति का गठन किया है। यह समिति श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित पैनल के साथ लगातार समन्वय कर अधिनियम से संबंधित आपत्तियों और सुझावों पर विचार करेगी। इसके बाद समिति अपनी सिफारिशें और रिपोर्ट पंजाब सरकार को सौंपेगी। यह समिति पंजाब सरकार के गृह मामले एवं न्याय विभाग द्वारा 16 सितंबर को जारी आदेशों के तहत गठित की गई थी। समिति में धार्मिक, कानूनी और प्रशासनिक क्षेत्रों से जुड़े सात सदस्यों को शामिल किया गया है।
इन मुद्दों पर होगा विचार-विमर्श
श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से संशोधित कानून की कुछ धाराओं को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। रिपोर्टों के अनुसार, इनमें श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूपों के लिए इस्तेमाल की गई शब्दावली, स्वरूपों के रिकॉर्ड से संबंधित प्रावधान और ‘कस्टोडियन’ की भूमिका जैसे मुद्दे शामिल हैं। वर्ष 2026 में पारित संशोधन कानून के जरिए 2008 के अधिनियम में कई बदलाव किए गए थे। आधिकारिक अधिनियम में ‘Bir’ और ‘Birs’ की जगह ‘Saroop’ और ‘Saroops’ शब्द इस्तेमाल करने का प्रावधान भी किया गया है।
समिति में कौन-कौन शामिल
पंजाब सरकार द्वारा गठित 7 सदस्यीय समिति में शामिल हैं:
- ज्ञानी रघबीर सिंह — श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार
- संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा — दमदमी टकसाल के प्रमुख
- संत बाबा सेवा सिंह — रामपुर खेड़ा
- जस्टिस (सेवानिवृत्त) जसपाल सिंह
- जस्टिस (सेवानिवृत्त) गुरबीर सिंह
- जतिंदर सिंह औलख — पूर्व आईपीएस अधिकारी और पंजाब लोक सेवा आयोग के पूर्व चेयरमैन
- प्रीत इंदर पाल सिंह — कानून अधिकारी
सरकार और अकाल तख्त साहिब के पैनल के बीच समन्वय
समिति को श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित पैनल के साथ लगातार संपर्क और विचार-विमर्श करने की जिम्मेदारी दी गई है। समिति अधिनियम से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर अपने सुझाव सरकार के समक्ष रखेगी।
इससे पहले श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताए जाने के बाद पंजाब सरकार ने अपना जवाब भी प्रस्तुत किया था। इसके बाद कानून से जुड़े मुद्दों पर आगे विचार-विमर्श के लिए समिति गठित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
अब 7 सदस्यीय समिति श्री अकाल तख्त साहिब से संबंधित पैनल के साथ विचार-विमर्श के बाद कानून में संभावित संशोधनों को लेकर अपने सुझाव पंजाब सरकार को सौंपेगी।






