नई दिल्ली, 21 अक्टूबर, 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय संबंधों में जारी चुनौतियों के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की है। तीन दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की। बातचीत में ऊर्जा आपूर्ति के विविधीकरण और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
बैठक से पहले रुबियो ने भारत को कच्चे तेल के शोधन के क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति बताते हुए भारतीय रिफाइनरियों में वेनेजुएला के कच्चे तेल के प्रसंस्करण की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और अमेरिका उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे सकता है। रुबियो बुधवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी का दौरा भी करेंगे।
व्यापार समझौते पर जल्द सहमति की उम्मीद
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर रुबियो ने कहा कि कुछ मुद्दों पर बातचीत अभी बाकी है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि समझौता जल्द पूरा हो सकता है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक नीतियों और अन्य मुद्दों को लेकर तनाव के बावजूद आर्थिक सहयोग बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं।
बैठक के बाद जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्षों ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और लोगों के बीच संपर्क सहित द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, दोनों विदेश मंत्रियों ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के साथ पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर भी चर्चा की।
रूसी तेल पर भारत की ऊर्जा विविधीकरण नीति का जिक्र
भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद को लेकर पूछे गए सवाल पर रुबियो ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाना भारत के हित में है। उन्होंने माना कि इस प्रक्रिया को रातोंरात पूरा करना आसान नहीं है और भारत ने इस दिशा में प्रगति की है। उन्होंने वेनेजुएला सहित अन्य देशों से ऊर्जा आपूर्ति की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।
रुबियो अपने दौरे के दौरान मुंबई पहुंचे और उन्होंने 26/11 आतंकी हमलों के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। इन हमलों में पांच अमेरिकी नागरिक भी मारे गए थे। रुबियो का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब व्यापारिक नीतियों और आव्रजन नियमों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। इसके बावजूद ऊर्जा और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।






