कुरुक्षेत्र, 23 अक्टूबर 2026 (संजीव शर्मा): उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि जिले में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और ड्रोन के माध्यम से रात के समय भी खेतों में आगजनी की घटनाओं की निगरानी की जा रही है। जिला प्रशासन फसल अवशेष में आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए पूरी तरह से सतर्क हैं। इसके लिए गांव स्तर, खंड स्तर, उपमंडल स्तर और जिला स्तर के कमेटियां भी बनाई हुई हैं। सभी प्रयासों के चलते आगजनी की घटनाओं पर नियंत्रण किया गया है। जिसे आगे भी निरंतर रखा जाएगा।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा वीरवार को लघु सचिवालय में आयोजित पराली प्रबंधन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इससे पहले सीएक्यूएम चेयरमैन रमेश वर्मा ने हरियाणा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की बैठक में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि जिले में पराली प्रबंधन के लिए जोन वाइज निगरानी की जा रही है। येलो जोन के गांव गुढा और दौलतपुर में विशेष निगरानी रखी जा रही है, जबकि रेड जोन के गांव किरमच, कमौदा, गुमथला गढ़ू और भौंर सैयदां में 4 एयर पॉल्यूशन लेवल मॉनिटरिंग यंत्रों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि वैसे तो जिला प्रशासन कोने-कोने की निगरानी कर रहा है, लेकिन जो क्षेत्र येलो और रेड जोन में शामिल हैं। वहां पर निगरानी बढ़ाई हुई हैं। ऐसे में जो किसान आगजनी की घटनाओं में शामिल मिलेंगे, उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। इसके लिए जुर्माना, केस दर्ज और मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री तक का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि किसानों को पराली प्रबंधन के लिए सब्सिडी पर मशीनें उपलब्ध करवाई गई हैं। जिले में किसानों को 241 सुपर सीडर, 28 स्ट्रॉ बेलर और अन्य 122 मशीनें सब्सिडी पर दी गई हैं। जिला में खेतों की निगरानी के लिए 601 नोडल ऑफिसर नियुक्त किए गए हैं। मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर 53,966 किसान रजिस्टर्ड हैं, जिनसे लगातार संपर्क कर पराली न जलाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों में भी पहले से ज्यादा जागरूकता आई है। अब किसान पराली जलाने की बजाए उसका प्रयोग कर रहे हैं। इससे प्रदूषण पर नियंत्रण तो हुआ ही है साथ ही आय में भी बढ़ोतरी हो रही है।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि जिले की 17 इंडस्ट्री यूनिट में पराली का प्रयोग ईंधन के रूप में किया जा रहा है, जिनमें सालाना 4 लाख 22 हजार मीट्रिक टन पराली की खपत हो रही है। इसके अलावा जिले में 61 ईंट भट्टे सक्रिय हैं, जिनमें 20 प्रतिशत पराली की को-फायरिंग हो रही है, जिसे 1 नवंबर से बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया जाएगा। सरकार की ऐसी नीतियों से लगातार अवशेष की डिमांड लगातार बढ़ेगी। उपायुक्त ने सभी नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने क्षेत्र में सक्रिय रहें और किसानों को पराली के उचित प्रबंधन के लाभों के बारे में जागरूक करें। इस मौके पर उप कृषि निदेशक डॉ. गिरीश नागपाल, पॉल्यूशन बोर्ड के एसडीओ हार्दिक सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।






