वाशिंगटन डी.सी., 27 अक्टूबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव में कथित धोखाधड़ी के बारे में जानकारी देने वालों के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर के इनाम की घोषणा की है। ट्रंप के अनुसार, यह इनाम उन लोगों को दिया जाएगा, जो पिछले चुनावों या आगामी 2026 के मध्यावधि चुनावों में वोटों से संबंधित धोखाधड़ी के मामलों के बारे में कार्रवाई योग्य जानकारी देंगे। हालांकि, उनकी पोस्ट के अनुसार, इनाम का भुगतान कथित धोखाधड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी और दोष सिद्ध होने से जुड़ा हुआ है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट साझा करते हुए अमेरिकी चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं का मुद्दा फिर से उठाया। उन्होंने लिखा कि पिछले चुनावों या आगामी 2026 के मध्यावधि चुनावों में वोटों की धोखाधड़ी के बारे में जानकारी देने वाले व्यक्ति को संबंधित लोगों की गिरफ्तारी और दोष सिद्ध होने पर 10 लाख डॉलर दिए जाएंगे।
3 नवंबर को होंगे अमेरिका के मध्यावधि चुनाव
अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन चुनावों के नतीजे यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों—प्रतिनिधि सभा और सीनेट—में किस पार्टी का कितना प्रभाव रहेगा। इन परिणामों का असर राष्ट्रपति ट्रंप के विधायी एजेंडे और वाशिंगटन में राजनीतिक शक्ति के संतुलन पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका में मध्यावधि चुनाव हर चार साल में राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच में होते हैं। इन चुनावों के दौरान प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की लगभग एक-तिहाई सीटों के लिए मतदान होता है। इसके अलावा, देशभर में कई राज्यों और स्थानीय स्तर पर भी चुनाव कराए जाते हैं।
आर्थिक चिंताएं और लोकप्रियता में गिरावट भी चर्चा का विषय
ये चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं, जब ट्रंप प्रशासन को आर्थिक चिंताओं और लोकप्रियता में गिरावट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक सर्वेक्षण में ट्रंप की स्वीकृति दर घटकर 37 प्रतिशत रह गई थी। अखबार के अनुसार, 1990 में शुरू हुए उसके सर्वेक्षण रिकॉर्ड में मध्यावधि चुनावों से पहले किसी भी राष्ट्रपति के लिए यह सबसे कम स्वीकृति दर थी।
चुनावों से पहले ट्रंप की ओर से मतदान प्रक्रिया में कथित धोखाधड़ी के बारे में जानकारी देने वालों के लिए इनाम की घोषणा अमेरिकी चुनावों और चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकती है।