नई दिल्ली, 28 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ की बहाली को लेकर चल रहा आंदोलन बुधवार को 17वें दिन भी जारी रहा। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का निर्णय लेने के बावजूद छात्रों ने धरना समाप्त करने से इनकार कर दिया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मुख्य मांग है कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन (JMISU) के चुनावों की निश्चित तारीख घोषित की जाए। उनका कहना है कि वर्ष 2006 से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं और संघ के संविधान को मंजूरी देने के लिए भी समय-सीमा निर्धारित की जानी चाहिए।
इस बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन ने टूटी हुई खिड़कियों की तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि कुछ छात्रों ने जबरन परिसर के कुछ हिस्सों में प्रवेश किया और सीसीटीवी कैमरों सहित विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। हालांकि, प्रशासन ने कथित नुकसान के मामले में की जा रही कार्रवाई के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी।
विश्वविद्यालय की ओर से सोमवार को जारी आदेश में छात्रों को दिए गए निलंबन आदेशों और कारण बताओ नोटिसों को रद्द करने की बात भी शामिल थी। इसके अलावा, प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों के व्यवहार की जांच के लिए एक समिति गठित करने का प्रावधान किया गया। प्रशासन के आदेश के अनुसार, संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।
लेकिन छात्रों ने इस फैसले को अपनी मांगों की पूरी पूर्ति नहीं माना। उनका कहना है कि जब तक संविधान को मंजूरी देने की समय-सीमा और चुनावों की निश्चित तारीख तय नहीं होती, तब तक अनिश्चितता बनी रहेगी। इस मुद्दे को लेकर चार छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में से रेहान खान ने पहले कहा था कि उनकी मुख्य मांग छात्र संघ को बहाल करना और चुनावों की तारीख घोषित करवाना है।
प्रशासन के आदेश में यह भी कहा गया कि छात्र आंदोलन के दौरान प्रशासन के खिलाफ की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों, गतिविधियों और सोशल मीडिया पोस्टों के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और ऐसी पोस्टों को हटाने पर सहमत हुए हैं। आदेश में धरना वापस लेने की बात भी दर्ज थी, लेकिन छात्रों ने अपना आंदोलन जारी रखा।
इससे पहले सोमवार को परिसर में सुरक्षा बढ़ाए जाने के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और अर्धसैनिक बलों के जवानों के बीच झड़पें होने की खबर सामने आई थी। सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन किए जाने के बाद पुलिस ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे छात्रों को विश्वविद्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया।
छात्र संघ की बहाली, चुनावों की तारीख और संविधान को मंजूरी देने की समय-सीमा को लेकर छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है।






