टोहाना, 29 अक्टूबर, 2026 (संजीव शर्मा): कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन स्कीम के अंतर्गत डांगरा रोड स्थित किसान रेस्ट हाऊस में उपमंडल स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में एसडीएम आकाश शर्मा ने ग्रामीण स्तर पर गठित कमेटी के सदस्यों के साथ फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर चर्चा की तथा पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों एवं कमेटी सदस्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
एसडीएम आकाश शर्मा ने कहा कि धान की कटाई के बाद फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित करना सभी संबंधित विभागों एवं ग्रामीण स्तर पर गठित कमेटियों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए गांव स्तर पर प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल तरीकों के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारी एवं कमेटी सदस्य आपसी तालमेल के साथ कार्य करें और किसानों से निरंतर संपर्क बनाए रखें।
उन्होंने कहा कि पराली प्रबंधन को लेकर किसानों को समय रहते उचित मार्गदर्शन एवं उपलब्ध विकल्पों की जानकारी दी जाए, ताकि वे फसल अवशेषों को आग लगाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन कर सकें। ग्रामीण स्तर पर गठित कमेटियां अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहकर किसानों को जागरूक करें तथा पराली प्रबंधन से संबंधित गतिविधियों पर नजर रखें। उन्होंने अधिकारियों एवं कमेटी सदस्यों को निर्देश दिए कि वे फील्ड में सक्रिय रहकर कार्य करें और पराली प्रबंधन के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रभावी ढंग से लागू करवाना सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष फसल अवशेष प्रबंधन की निगरानी के लिए ड्रोन का भी उपयोग किया जा रहा है। सभी संबंधित अधिकारी एवं कमेटी सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था को मजबूत रखें और यह सुनिश्चित करें कि पराली जलाने की कोई भी घटना न हो। किसानों को पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान तथा मिट्टी की उर्वरता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों के बारे में भी जागरूक किया जाए।
उपमंडल कृषि अधिकारी मुकेश मेहला ने कहा कि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों पर सब्सिडी उपलब्ध करवाई जा रही है। इनमें सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्ट्रॉ रीपर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, रोटावेटर तथा बेलर-कम-रीपर-बाइंडर जैसे कृषि यंत्र शामिल हैं। इन कृषि यंत्रों की सहायता से किसान धान के अवशेषों का उचित प्रबंधन कर सकते हैं और पराली जलाने की आवश्यकता से बच सकते हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा फसल अवशेषों के इन-सीटू एवं एक्स-सीटू प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए पात्र किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कमेटी के सदस्यों एवं संबंधित अधिकारियों से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को सरकार की योजनाओं, कृषि यंत्रों पर उपलब्ध सब्सिडी तथा प्रोत्साहन राशि के बारे में जागरूक करें, ताकि अधिक से अधिक किसान इन सुविधाओं का लाभ उठाकर फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कर सकें। विभाग का उद्देश्य किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपलब्ध सुविधाओं एवं विकल्पों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करना है।
कार्यशाला में नायब तहसीलदार रसविन्द्र सिंह, नायब तहसीलदार अनिल कुमार, कृषि विषय विशेषज्ञ रामेश्वर दास एवं संजय सेलवाल सहित ग्रामीण स्तर पर गठित कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।






