चंडीगढ़, 29 अक्टूबर, 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने गुजरात के उद्योगपतियों और उद्यमियों को हरियाणा में अपने कारोबार का विस्तार करने का आमंत्रण देते हुए कहा कि गुजरात की उद्यमशीलता और हरियाणा का मजबूत औद्योगिक आधार मिलकर दोनों राज्यों के लिए विकास और निवेश के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। हरियाणा सरकार का उद्देश्य केवल निवेशकों को निवेश के लिए आमंत्रित करना नहीं, बल्कि उनके कारोबार के अगले विकास चरण में एक भरोसेमंद भागीदार बनना है।
मुख्यमंत्री बुधवार को गुजरात दौरे के दूसरे दिन गांधीनगर में आयोजित इन्वेस्टर रोड शो में उपस्थित उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा में नई विनिर्माण इकाइयां, कार्यालय, गोदाम और तकनीकी केंद्र स्थापित करने की व्यापक संभावनाएं हैं। गुजरात के उद्यमी अपनी कारोबारी विस्तार योजनाओं में हरियाणा को शामिल करें और प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों का अध्ययन कर अपनी आवश्यकताओं के अनुसार निवेश की संभावनाएं तलाशें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि और कर्मभूमि गुजरात है। इस प्रदेश ने व्यापार, उद्योग और उद्यमिता के क्षेत्र में देश-दुनिया में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। सूरत का हीरा और कपड़ा उद्योग, अहमदाबाद का औद्योगिक विकास तथा गुजरात के रसायन, फार्मा और विनिर्माण क्षेत्र इसकी सफलता के प्रमुख उदाहरण हैं। वहीं, हरियाणा भी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की कर्मभूमि है। गुजरात के उद्यमियों का अनुभव और हरियाणा का औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स नेटवर्क आपसी सहयोग के नए रास्ते खोल सकता है।
भौगोलिक स्थिति और कनेक्टिविटी हरियाणा की बड़ी ताकत
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की सबसे बड़ी ताकत इसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति है। राज्य का लगभग 57 प्रतिशत क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आता है। कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और प्रमुख औद्योगिक कॉरिडोर हरियाणा को बड़े व्यापारिक एवं उपभोक्ता बाजारों से जोड़ते हैं। दिल्ली, चंडीगढ़ और नोएडा के हवाई अड्डों तक पहुंच भी निवेशकों, कर्मचारियों और कारोबारी भागीदारों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी उद्योग के लिए बाजार तक पहुंच, परिवहन, आपूर्ति श्रृंखला और समय पर उत्पादों की डिलीवरी महत्वपूर्ण होती है। हरियाणा की कनेक्टिविटी और राष्ट्रीय राजधानी से निकटता इन जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है। यही कारण है कि राज्य विनिर्माण के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, तकनीकी सेवाओं और कॉरपोरेट संचालन के लिए भी एक आकर्षक विकल्प बन रहा है।
औद्योगिक नेटवर्क से जुड़कर एम.एस.एम.ई. और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला का होगा विस्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा में ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण और फार्मा सहित अनेक क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां चल रही हैं। राज्य में 56 औद्योगिक एस्टेट हैं और 143 ब्लॉकों में एमएसएमई क्लस्टर विकसित करने की पहल की जा रही है।
उन्होंने गुजरात के उद्यमियों को इस औद्योगिक नेटवर्क का हिस्सा बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि बड़ी कंपनियों के निवेश से केवल प्रत्यक्ष रोजगार ही पैदा नहीं होता, बल्कि स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं, छोटे उद्योगों, परिवहन, पैकेजिंग, रखरखाव और तकनीकी सेवाओं के लिए भी नए अवसर बनते हैं। हरियाणा सरकार चाहती है कि निवेश का लाभ प्रदेश के युवाओं, श्रमिकों और छोटे उद्यमियों तक पहुंचे तथा स्थानीय उद्योगों को बड़ी औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ने का अवसर मिले।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा ने औद्योगिक विकास के साथ-साथ आईटी, डिजिटल सेवाओं और कॉरपोरेट संचालन के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। गुरुग्राम में 250 से अधिक फॉर्च्यून 500 कंपनियों के कार्यालय, लगभग 270 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और 19 यूनिकॉर्न कंपनियां कार्यरत हैं। यह उपस्थिति राज्य में तकनीकी कारोबार, डिजिटल सेवाओं और वैश्विक कंपनियों के संचालन से जुड़े निवेश की संभावनाओं को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल और मशीनरी क्षेत्र की कंपनियां हरियाणा के स्थापित औद्योगिक नेटवर्क से जुड़ सकती हैं। वहीं, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और सौर ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियां नई इकाइयां स्थापित करने की संभावनाएं तलाश सकती हैं। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और औद्योगिक बुनियादी ढांचे में भी निवेश के अवसर उपलब्ध हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में हरियाणा का लगभग 3.8 प्रतिशत योगदान है, जबकि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र में राज्य की हिस्सेदारी लगभग 1.34 प्रतिशत है। यह राज्य की आर्थिक क्षमता और उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग को दर्शाता है।
निवेशकों को समय पर प्रोत्साहन और सरल प्रक्रियाएं उपलब्ध करवाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने, डिजिटल सुविधाओं का विस्तार करने और स्पष्ट जानकारी समय पर उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 में राज्य ने आवंटित प्रोत्साहन बजट का 96 प्रतिशत हिस्सा उपयोग किया, जबकि पिछले छह वर्षों में इसका औसत उपयोग 83 प्रतिशत रहा।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें आगे बढ़ाने के दौरान गति, सहयोग और भरोसा मिले। निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता औद्योगिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाती है।
साझा सांस्कृतिक विरासत से कारोबारी सहयोग तक का सफर
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा और गुजरात के संबंध केवल व्यापार और उद्योग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों राज्य साझा सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़े हुए हैं। कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्मयोग का संदेश दिया था, जबकि गुजरात की द्वारका करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों की सांस्कृतिक निकटता और उद्यमिता की परंपरा आर्थिक सहयोग को भी नई दिशा दे सकती है। गुजरात की व्यापारिक विरासत और हरियाणा की औद्योगिक क्षमता का तालमेल दोनों राज्यों में उद्योग, रोजगार और कारोबारी गतिविधियों के विस्तार का आधार बन सकता है।
मुख्यमंत्री ने गुजरात के उद्यमियों को हरियाणा आने और अपने कारोबार के अगले विस्तार पर चर्चा करने का आमंत्रण देते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि दोनों राज्यों के उद्योगपति आपसी सहयोग से नए उद्योग स्थापित करें, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाएं और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में योगदान दें।
हरियाणा की नई औद्योगिक नीति देश की बेहतरीन नीतियों में से एक, उद्योगपतियों को मिलेंगे व्यापक प्रोत्साहन और सब्सिडी: राव नरबीर सिंह

हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हरियाणा सरकार द्वारा तैयार की गई नई औद्योगिक नीति देश की बेहतरीन नीतियों में से एक है। इस नीति में उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक प्रोत्साहन और सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने विश्वास जताया कि हरियाणा की उद्योग-अनुकूल नीतियां निवेशकों को आकर्षित करने के साथ-साथ प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगी।
उद्योग मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ने उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीति तैयार करने का प्रयास किया है, जिसमें निवेशकों को बेहतर सुविधाएं और प्रोत्साहन मिल सकें। इस नीति की विशेषता यह है कि इसे तैयार करते समय उद्योगपतियों से भी सुझाव लिए गए, ताकि उनकी वास्तविक जरूरतों और व्यावहारिक समस्याओं को समझकर उनका समाधान निकाला जा सके।
राव नरबीर सिंह ने निवेशकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री होने के नाते वह आश्वस्त करते हैं कि जिस उम्मीद और विश्वास के साथ निवेशक हरियाणा आएंगे, सरकार उन उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने उद्योगपतियों को हरियाणा में निवेश करने और प्रदेश की औद्योगिक विकास यात्रा में भागीदार बनने का आमंत्रण दिया।
ऑटोमोबाइल, कपड़ा, इंजीनियरिंग, खाद्य प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में हरियाणा में निवेश की अपार संभावनाएं: अमित अग्रवाल
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने कहा कि गुजरात ने पूरी दुनिया के सामने यह साबित किया है कि जब उद्यमिता, विनिर्माण में उत्कृष्टता और नवाचार एक साथ आते हैं, तो कितनी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में गुजरात के उद्यमियों ने न केवल देश, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
उन्होंने कहा कि गुजरात की असली ताकत वहां के उद्यमियों की दूरदर्शिता, नए अवसरों को पहचानने की क्षमता और उन्हें सफल कारोबारी उपक्रमों में बदलने के कौशल में निहित है।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि हरियाणा ने भी ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण और प्रौद्योगिकी आधारित सेवाओं जैसे क्षेत्रों में एक मजबूत औद्योगिक आधार विकसित किया है। दोनों राज्यों की औद्योगिक विकास यात्रा भले ही अलग-अलग रही हो, लेकिन उद्देश्य एक ही है—कारोबार को आगे बढ़ने के अवसर देना और देश की आर्थिक प्रगति में योगदान करना।
उन्होंने कहा कि यदि कोई उद्यमी नई फैक्ट्री स्थापित करने, किसी नए व्यावसायिक क्षेत्र में प्रवेश करने, अपने उत्पादों का विस्तार करने या नए बाजारों तक पहुंच बनाने की योजना बना रहा है, तो हरियाणा उसके लिए एक मजबूत संभावित भागीदार बन सकता है।
नए बाजारों और ग्राहकों तक पहुंचने तथा कारोबारी गतिविधियों का विस्तार करने के लिए हरियाणा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। दिल्ली-एनसीआर के निकट होने के कारण हरियाणा में बड़े उपभोक्ता बाजारों, औद्योगिक खरीदारों और कॉरपोरेट उपक्रमों तक पहुंच के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। उद्यमी अपने मौजूदा कारोबार को जारी रखते हुए भी हरियाणा में अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ा सकते हैं, वितरण नेटवर्क का विस्तार कर सकते हैं और वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स सुविधाओं को मजबूत बना सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ऐसे निवेश का स्वागत करती है, जो नई तकनीक लेकर आए, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करे, स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के लिए नए अवसर पैदा करे और उद्योगों में मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करे।
डॉ. अमित अग्रवाल ने कहा कि गुरुग्राम आज वैश्विक कारोबार और प्रौद्योगिकी सेवाओं के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। यहां 270 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) कार्यरत हैं, जो पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ऐसे केंद्रों की मौजूदगी का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा हैं।
हरियाणा में लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग और शहरी विकास के क्षेत्रों में भी निवेश की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने गुजरात के उद्योगपतियों और कंपनियों को इन अवसरों का लाभ उठाने तथा हरियाणा में अपनी कारोबारी गतिविधियों का विस्तार करने का आमंत्रण दिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक श्री यश गर्ग, हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम के प्रबंध निदेशक श्री विनय प्रताप सिंह, अतिरिक्त प्रबंध निदेशक श्री अनिरुद्ध यादव, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के संयुक्त निदेशक श्री मानव मलिक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।






