आचार्य स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज निर्मला अखाड़ा के प्रमुख प्रचारक तथा राजेश्वरानंद योगपीठ (Arihant Science of Life), अंबाला के संस्थापक हैं। वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैदिक कथा-वाचक, आयुर्वेद के जानकार और समाजसेवी संत हैं। वे धर्म, आध्यात्मिक ज्ञान, आयुर्वेद, प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण तथा मानवता की सेवा के माध्यम से समाज और संपूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उनकी सार्वजनिक गतिविधियों में वैदिक ज्ञान का प्रचार-प्रसार, धार्मिक आयोजनों में सहभागिता, आयुर्वेद के प्रति जागरूकता, सामाजिक सेवा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न प्रयास शामिल हैं।
स्वामी जी ने आयुर्वेदिक चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा में स्नातक की डिग्री (BAMS) प्राप्त की है तथा आयुर्वेद में एम.डी. की उच्च शिक्षा भी हासिल की है। आयुर्वेद, प्राकृतिक जीवनशैली और स्वस्थ जीवन जीने के तरीकों से संबंधित ज्ञान आम लोगों तक पहुंचाने के लिए वे लगातार जन-जागरूकता के प्रयास कर रहे हैं।
प्रभु की कृपा और प्रेरणा से स्वामी जी ने वैदिक सनातन धर्म के ज्ञान को सरल एवं आम लोगों की समझ में आने वाली भाषा के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया है। वे भारत के विभिन्न छोटे-बड़े शहरों में वैदिक कथाओं और आध्यात्मिक आयोजनों के माध्यम से धर्म, संस्कार, स्वस्थ जीवनशैली, मानव सेवा और भारतीय संस्कृति का संदेश दे रहे हैं। स्वामी जी अब तक सैकड़ों वैदिक कथाओं के माध्यम से लोगों को भारतीय संस्कृति और सनातन जीवन-दर्शन से जोड़ने का प्रयास कर चुके हैं।
स्वामी जी निर्मला अखाड़े से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पहले गुरु ज्ञान देव जी और उसके बाद संत बाबा रेशम सिंह जी का सानिध्य प्राप्त किया, उनसे ज्ञान अर्जित किया तथा अपना विश्वास आदि गुरु श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज में स्थापित किया। आचार्य जी ने लंबे समय तक आदि गुरु श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज का नियमित अध्ययन किया, संतों और गुरबाणी के विद्वानों का सानिध्य प्राप्त किया तथा शब्द गुरु की सच्चाई को समझकर उसे अपने जीवन में आत्मसात किया। आदि गुरु श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज से प्राप्त अनमोल ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने का उन्होंने संकल्प लिया है, क्योंकि आज धार्मिक और सामाजिक ज्ञान से वंचित मानव समाज दुनिया भर के दुखों, झमेलों, पाखंडों और आडंबरों में उलझा हुआ है तथा इन्हीं को अपने इष्ट की प्राप्ति का माध्यम मानकर बार-बार परेशान हो रहा है। उनका मानना है कि आदि गुरु श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज का सहज और सरल ज्ञान ही मानवता का उद्धार कर सकता है।
इस अटल सत्य को आम लोगों तक सरल शब्दों में पहुंचाने के उद्देश्य से आचार्य स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज ने देश-विदेश का दौरा किया और विभिन्न स्थानों पर धार्मिक आयोजन तथा संत समागम करवाए। इन आयोजनों के माध्यम से उन्होंने जहां आदि गुरु श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज में दर्ज गुरबाणी को लोगों तक पहुंचाया, वहीं गुरु साहिबान के जीवन-वृत्तांत से प्रेरणा लेकर उनकी जीवनी, सिखी के प्रति उनकी श्रद्धा, लोकसेवा, धुर की बाणी के प्रचार, सभी धर्मों के सम्मान तथा संपूर्ण मानव जाति को एक अकाल पुरख की संतान मानने वाले गुरमत सिद्धांत का संदेश भी साझा किया। उन्होंने धर्म और न्याय की रक्षा के लिए गुरु साहिबान द्वारा दी गई शहादत के प्रसंगों को मंदिरों, गुरुद्वारों, धार्मिक आयोजनों, गांवों, शहरों और संत समागमों में लोगों के सामने प्रस्तुत किया।
आज जहां धर्म और क्षेत्र के नाम पर लोगों के मन में द्वेष, ऊंच-नीच, जाति-नस्ल तथा अमीर-गरीब के भेदभाव की भावना घर कर गई है, वहीं स्वामी जी ने धर्म से ऊपर उठकर “एकु पिता एकस के हम बारिक तू मेरा गुर हाई” के महान वचनों के अनुरूप गुरबाणी का ज्ञान सभी तक पहुंचाने का अनूठा कार्य किया है। उन्होंने आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश देकर बिखरते रिश्तों में शांति और सद्भाव पैदा करने का प्रयास किया है। आचार्य जी अपने समागमों में अक्सर यह विचार व्यक्त करते हैं कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज ही ऐसे महान गुरु हैं, जिनकी शरण में आकर संसार से हर प्रकार का वैर-विरोध, ऊंच-नीच, अमीरी-गरीबी और सबसे बढ़कर शुद्ध ज्ञान की कमी को दूर किया जा सकता है।
गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत को समर्पित संत समागमों की मुहिम की यात्रा दिल्ली के रामलीला मैदान स्थित श्री राम मंदिर से शुरू हुई और ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री सीस गंज साहिब पहुंची। आचार्य स्वामी राजेश्वरानंद जी ने गुरुद्वारा श्री सीस गंज साहिब में माथा टेककर गुरु साहिब के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की तथा उनकी शहादत के संदेश को देशभर में पहुंचाने के संकल्प को दोहराया। इस अवसर पर धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा का संदेश भी साझा किया गया। इस यात्रा के दौरान तेज बारिश भी हुई, लेकिन लोगों का काफिला नहीं रुका और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ता रहा।

श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज के 350वें शहीदी वर्ष को समर्पित 350 महान संत समागम करवाने के संकल्प के तहत दिल्ली के श्री राम मंदिर से गुरुद्वारा श्री सीस गंज साहिब तक एक विशेष यात्रा निकाली गई।

यह यात्रा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की अनुपम शहादत, महान त्याग, धर्म की रक्षा तथा मानवता को अपने धर्म और विश्वास के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता दिलाने के संदेश को घर-घर तक पहुंचाने के लिए समर्पित है।
श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत को समर्पित 350वें शहीदी पर्व के अवसर पर आचार्य स्वामी राजेश्वरानंद जी ने 350 संत समागम करवाने का संकल्प लिया है। इस संकल्प की श्रृंखला के तहत स्वामी जी अब तक देश-विदेश में भ्रमण करके नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज के जीवन-वृत्तांत और उनकी अनुपम शहादत को समर्पित 250 समागम कर चुके हैं। इसी श्रृंखला में पटियाला के सनातन धर्म कुमार सभा भवन में 31 अक्टूबर 2026, दिन शनिवार को दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक शहीदी समागम को समर्पित 251वां महान संत समागम बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
इस महान संत समागम में श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत के केंद्रीय संदेश को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। यह संदेश धार्मिक स्वतंत्रता, अंतरात्मा की स्वतंत्रता, मानव गरिमा और दूसरों के विश्वास की रक्षा से जुड़ा हुआ है। यह संदेश किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। स्वामी जी की यह मुहिम इसी सार्वभौमिक संदेश को विभिन्न धार्मिक और सामाजिक वर्गों तक पहुंचाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।
आचार्य स्वामी राजेश्वरानंद जी द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज के जीवन और शहादत को समर्पित 350 संत समागम करवाने के संकल्प के तीन महत्वपूर्ण पहलू हैं।
पहला — ऐतिहासिक जागरूकता: नई पीढ़ी को गुरु तेग बहादुर साहिब जी के जीवन, त्याग, दृढ़ विश्वास और महान शहादत से परिचित करवाना।
दूसरा — भाषा के माध्यम से पहुंच: गुरबाणी के संदेश और सिख गुरु साहिबान की शिक्षाओं को हिंदी भाषी लोगों तक सरल भाषा में पहुंचाना। इस कार्य में अनुवाद की शुद्धता, मूल गुरबाणी का सम्मान और सिख विद्वानों का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।
तीसरा — धर्मों के बीच आपसी भाईचारा और सम्मान: विभिन्न धार्मिक परंपराओं से जुड़े लोगों को यह समझाना कि दूसरों के धर्म और आस्थाओं की स्वतंत्रता की रक्षा करना भी मानवता की सच्ची सेवा है।
इस संकल्प का उद्देश्य केवल समागमों की संख्या पूरी करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि इन आयोजनों के माध्यम से गुरु साहिब की शहादत का संदेश कितनी गहराई से आम लोगों तक पहुंचता है।
स्वामी जी के प्रतिनिधियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी पर्व को समर्पित इस मुहिम का 23वां समागम पटियाला में कोहली परिवार के सहयोग से आयोजित किया गया था। समागम में संत बाबा मोहन सिंह बारन वाले, रेशम सिंह जी तथा निर्मल अखाड़े और विभिन्न सिख एवं उदासीन परंपराओं से जुड़े संतों की उपस्थिति बताई गई है। स्वामी जी के संबोधन का मुख्य भाव यह था कि श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत धार्मिक स्वतंत्रता, मानवता और दूसरों के विश्वास की रक्षा का सार्वभौमिक संदेश देती है।
माता नैणा आर्य धर्मशाला, नगर पालिका के निकट, समाना में गौ माता सेवा समिति, समाना की ओर से 8 और 9 अगस्त 2026 को श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी पर्व को समर्पित दिव्य गौ कथा का अमितोज प्रोडक्शन द्वारा सार्वजनिक प्रसारण किया गया। इस कथा में मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज तथा संत सान्निध्य के रूप में संत श्री नारायण पुरी जी महाराज, कलवाणू वाले उपस्थित रहे।
आचार्य स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज ने शहीद-ए-आज़म के ब्यूरो चीफ गुरमीत सिंह तुंग को जानकारी देते हुए बताया कि प्रकृति और पर्यावरण की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एक करोड़ पेड़ और पौधे लगाने का संकल्प लिया है। इस मुहिम के तहत अब तक आठ लाख पेड़ और पौधे धरती पर लगाए जा चुके हैं। इनकी देखभाल, सेवा और उचित विकास के लिए भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
इस मुहिम का उद्देश्य केवल पौधे लगाना ही नहीं है, बल्कि लोगों के भीतर पेड़ों के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करना, प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने के प्रति जागरूकता फैलाना भी है।
स्वामी जी ने प्रेम, प्रकृति और जल संरक्षण की मुहिम के तहत प्रमुख धर्म प्रचार समिति, निर्मल अखाड़ा धर्म ध्वजा के चेयरमैन तथा इंटरनेशनल संत समाज सेवा दल के माध्यम से एक हजार सत्संगों का आयोजन करके लोगों को प्रेम, प्रकृति और पानी की संभाल के प्रति जागरूक एवं प्रेरित किया है।
इन सत्संगों के माध्यम से जल संरक्षण, पर्यावरण की रक्षा, प्रकृति के प्रति प्रेम, मानवता की सेवा और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश घर-घर तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
स्वामी जी ने गुरबाणी का गहनता और श्रद्धा के साथ अध्ययन किया है। वे गुरबाणी में दर्ज मानव कल्याण, स्वास्थ्य, प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशों को सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
इसी प्रकार श्रीमद्भगवद्गीता और अन्य भारतीय धर्मग्रंथों में दर्ज जीवन को सही दिशा देने वाले ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए भी वे निरंतर प्रयासरत हैं।
स्वामी जी ने आगे जानकारी देते हुए अपनी अन्य सामाजिक गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला, जिनमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित शामिल हैं।
इंटरनेशनल संत समाज सेवा दल
आचार्य स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज इंटरनेशनल संत समाज सेवा दल के चेयरपर्सन हैं। इस संगठन के माध्यम से विश्वभर में संत समाज और जनसेवा से जुड़े विभिन्न प्रयासों को आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है।
अरिहंत आयुर्वेदा फाउंडेशन
स्वामी जी अरिहंत आयुर्वेदा फाउंडेशन के संस्थापक हैं। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद, प्राकृतिक जीवनशैली, प्रकृति संरक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना है।
प्रमुख संकल्प एवं जनसेवा के प्रयास
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एक करोड़ पेड़ और पौधे लगाने का संकल्प: अब तक आठ लाख पौधे धरती पर लगाए जाने का दावा।
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श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज के 350वें शहीदी पर्व को समर्पित 350 समागमों का संकल्प: अब तक मंदिरों और गुरुद्वारा साहिबान में 220 समागम करवाए जाने का दावा।
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एक हजार सत्संगों के माध्यम से जन-जागरूकता: प्रेम, प्रकृति और जल संरक्षण का संदेश।
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आयुर्वेद और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता फैलाना।
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प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रयास करना।
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गुरबाणी, गीता और वैदिक ज्ञान का जन-जन तक प्रचार-प्रसार करना।
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मानवता की सेवा और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देना।
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वैदिक सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना।
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पानी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए लोगों को प्रेरित करना।
मूल उद्देश्य
आचार्य स्वामी राजेश्वरानंद जी महाराज का मूल उद्देश्य धर्म, ज्ञान, स्वास्थ्य, प्रकृति संरक्षण और मानवता की सेवा को एक सूत्र में पिरोकर समाज के कल्याण के लिए कार्य करना है।
वे भारतीय ज्ञान परंपरा में दर्ज मानव कल्याण, प्रकृति की रक्षा, स्वस्थ जीवन और सामाजिक सद्भाव के संदेशों को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
सेवा का संकल्प
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धर्म के साथ मानवता की सेवा।
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आयुर्वेद के साथ स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना।
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प्रकृति के साथ प्रेम और उसका संरक्षण।
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जल संरक्षण के साथ जीवन की रक्षा।
- पर्यावरण की सुरक्षा के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित बनाना।
गुरमीत सिंह तुंग
ब्यूरो चीफ (98552 21193)







