पंचकूला, 3 नवंबर 2026 (संजीव शर्मा): लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों और दृष्टिकोण में भिन्नता हो सकती है। सहमति और असहमति दोनों का अपना महत्व है, लेकिन असहमति का भी सम्मान किया जाना चाहिए। असहमति नई दिशा और दृष्टिकोण प्रदान करती है तथा बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि विचारों में मतभेद होने के बावजूद देश और प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए। शासन चलाना एक जिम्मेदारी है, लेकिन जनसेवा उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है।
श्री ओम बिरला सोमवार को पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में हरियाणा विधानसभा द्वारा संविधान पखवाड़े के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविंदर कल्याण, विपक्ष के नेता श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. कृष्ण मिड्ढा, संसदीय कार्य मंत्री श्री महीपाल ढांडा सहित कई मंत्री और विधायक उपस्थित थे। लोकसभा अध्यक्ष ने दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया।
हरियाणा की धरती कर्म और परिश्रम की धरती
लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि हरियाणा की धरती कर्मभूमि रही है। भगवान श्रीकृष्ण की इस पावन भूमि ने श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से कर्म का संदेश दिया है। यहां के किसान, मजदूर, युवा, उद्यमी और खिलाड़ी प्रत्येक क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि 60 वर्षों की यात्रा में अनेक चुनौतियों और कठिनाइयों के बावजूद हरियाणा विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़ा है और यह सब संविधान की व्यवस्था के कारण संभव हुआ है।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान केवल हमारे देश के लिए ही नहीं, बल्कि विश्व के अन्य लोकतांत्रिक देशों के लिए भी मार्गदर्शक है। संविधान ने हमारी लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूती प्रदान की है। उन्होंने संविधान निर्माताओं, प्रारूप समिति के अध्यक्ष बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, संविधान सभा के सभी सदस्यों और हरियाणा-पंजाब क्षेत्र की उन महान हस्तियों को याद किया, जिन्होंने संविधान सभा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
संविधान भारत की आत्मा है
श्री बिरला ने कहा कि संविधान आज भी जीवंत रूप में हम सभी का मार्गदर्शन कर रहा है। संविधान केवल शासन व्यवस्था चलाने का दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। इसमें देश की राष्ट्रीय चेतना के साथ करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं और उम्मीदों का प्रतिबिंब दिखाई देता है। संविधान हमारे विचारों, दृष्टिकोण और कार्यप्रणाली को दिशा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि संविधान निर्माण के दौरान संविधान सभा में अलग-अलग मत और विचार प्रस्तुत किए गए थे। लंबी चर्चाओं और असहमतियों के बाद ही संविधान का निर्माण संभव हुआ। आजादी के बाद देश के सामने अनेक चुनौतियां थीं। विभिन्न रियासतों का विलय, राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करना और संसदीय लोकतंत्र को अपनाना उस समय के महत्वपूर्ण कार्य थे। भाषा, संस्कृति, भौगोलिक परिस्थितियों और धर्मों की विविधता के बावजूद भारत ने संसदीय लोकतंत्र को अपनाया और सभी नागरिकों को मतदान का अधिकार प्रदान किया।
पंचायत से संसद तक लोकतांत्रिक व्यवस्था
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संसद और विधानसभाओं के साथ-साथ पंचायती राज संस्थाओं तथा शहरी निकायों में भी लोकतांत्रिक व्यवस्था विकसित हुई है। भारत में पंचायत से लेकर संसद तक जनता की भागीदारी और जनशासन की व्यवस्था मौजूद है। संविधान ने प्रत्येक नागरिक को मौलिक अधिकार, समानता, भाईचारा, समान अवसर और न्याय का अधिकार दिया है। संविधान का प्रत्येक शब्द और विचार हमारे जीवन तथा कार्य करने के तरीकों का मार्गदर्शन करता है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा ने भी संविधान के मार्गदर्शन में पिछले 60 वर्षों के दौरान अपने सदस्यों के विचारों और योगदान के माध्यम से प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। देश की सीमाओं की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा में हरियाणा के जवानों का योगदान उल्लेखनीय है। यहां के किसानों ने नई तकनीकों को अपनाकर कृषि क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभाई है। प्रदेश ने प्रत्येक क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ाया है।
संवाद और स्वस्थ बहस लोकतंत्र की पहचान
श्री ओम बिरला ने कहा कि हरियाणा विधानसभा के सदस्यों के विचारों और दृष्टिकोण में भिन्नता हो सकती है, लेकिन प्रदेश और देश को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयासों की परंपरा हमेशा महत्वपूर्ण रही है। हरियाणा का देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान में विशेष योगदान है। राज्य विधानसभा ने समय-समय पर स्वस्थ परंपराओं, उच्चस्तरीय बहस, संवाद और तर्क के माध्यम से अपनी गरिमा को मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी के विचारों और मतों को स्थान मिलना चाहिए। लोकतांत्रिक संस्थाओं में अच्छी परंपराओं को अपनाना समय की आवश्यकता है। विधायिका की जिम्मेदारी कानून और नीतियां बनाना तथा जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं को सदन तक पहुंचाना है। कार्यपालिका का दायित्व बनाए गए कानूनों को निष्पक्ष रूप से लागू करना है, जबकि न्यायपालिका का कार्य प्रत्येक नागरिक को सुलभ न्याय उपलब्ध करवाना है।
उन्होंने कहा कि संविधान की प्रत्येक धारा और अनुच्छेद समाज और शासन व्यवस्था को दिशा प्रदान करते हैं। संसदीय लोकतंत्र में सहमति, असहमति और विचारों की विविधता स्वाभाविक है, लेकिन सामूहिक प्रयासों से देश और प्रदेश को आगे बढ़ाना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।
अंतिम व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाना सभी की नैतिक जिम्मेदारी
लोकसभा अध्यक्ष ने वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति आज भले ही विधानसभा का सदस्य न हो, लेकिन वह समाजसेवा के कार्यों में अपनी भूमिका निभा सकता है। समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना और उसके सामाजिक एवं आर्थिक स्तर को बेहतर बनाना सभी की नैतिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक जीवन में थकान या निराशा के बजाय समाज के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर खुशी लाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों के योगदान का सम्मान करते हुए कहा कि हरियाणा की जनता उनके कार्यों और योगदान को हमेशा याद रखेगी।






